कैंसर के इलाज में नैनो टेक्नॉलॉजी की उपयोगिता पर हुआ मंथन

रामईश कॉलेज में राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया, जिसका विषय नैनो फार्मास्यूटिकल्स-अवसर एवं चुनौतियां था

Update: 2017-08-19 13:31 GMT

ग्रेटर नोएडा। रामईश कॉलेज में राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया, जिसका विषय नैनो फार्मास्यूटिकल्स-अवसर एवं चुनौतियां था। कार्यक्रम का शुभारम्भ संस्थान के चेयरमैन डा. आर.सी. शर्मा द्वारा दीप प्रज्वलित करके किया गया।

सेमिनार में दिप्सार विश्वविद्यालय, दिल्ली से डा. सुषमा ताले गोंकर ने कैंसर के इलाज में नैनोटेक्नोलॉजी का उपयोग समझाते हुए बताया कि भविष्य में केवल नैनोटेक्नोलॉजी के इस्तेमाल से ही विभिन्न लाइलाज बीमारियों को ठीक किया जायेगा। ईशान हर्बोटक की निदेशिका डा. निधि महेश्वरी ने बताया कि दवा के अंतरराष्ट्रीय बाजार में नैनोटेक्नोलॉजी आधारित दवाओं की बहुत मांग है क्योंकि ये दवाएं सीधा रोग के कारण पर असर डालकर बिना किसी दुष्प्रभाव के रोग का निवारण करती है।

गुरुकुल कांगड़ी विश्वविधालय के डा. विपिन कुमार ने दवाओं में बायोपालिमर के उपयोग पर व्या यान दिया। सेमिनार में विभिन राज्यों के फार्मेसी एवं बायोटेक्नोलॉजी के शिक्षकों, छात्रों सहित लगभग 150 प्रतिभागियों ने भाग लिया। सेमिनार में रामईश की प्रबंध निदेशिका डा. प्रतिभा शर्मा, एमिटी यूनिवर्सिटी के फार्मेसी विभाग के प्रधानाचार्य डा. तनवीर नावेद, डा. श्वेता डाग, डा. सौरभ दहिया, डा. जैनेन्द्र जैन, डा. पल्लवी राय, डा. लुभान सिंह, डा. संदीप बंसल, डा. सोनल सेतिया आदि मौजूद थे। 

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