छत्तीसगढ़ में 26 हजार क्विंटल धान खा गए चूहे, कबीरधाम में अनियमितताओं और हेराफेरी के संकेत मिले

छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले में समर्थन मूल्य पर किसानों से खरीदे गए धान के भंडारण में भारी गड़बड़ी का मामला सामने आया है। विपणन विभाग की आंतरिक जांच में जिले के दो प्रमुख संग्रहण केंद्रों से लगभग 26 हजार क्विंटल धान की कमी पाई गई है।

Update: 2026-01-09 10:03 GMT
कवर्धा। छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले में समर्थन मूल्य पर किसानों से खरीदे गए धान के भंडारण में भारी गड़बड़ी का मामला सामने आया है। विपणन विभाग की आंतरिक जांच में जिले के दो प्रमुख संग्रहण केंद्रों से लगभग 26 हजार क्विंटल धान की कमी पाई गई है। इस धान की अनुमानित कीमत करीब आठ करोड़ रुपये बताई जा रही है। मामले ने प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा दिया है और इसे लेकर अनियमितताओं तथा संभावित हेराफेरी की आशंका भी जताई जा रही है।

खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 से जुड़ा मामला
यह पूरा मामला खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 के दौरान किसानों से समर्थन मूल्य पर खरीदे गए धान से संबंधित है। विभागीय रिकॉर्ड के मुताबिक, उस अवधि में कबीरधाम जिले के बाजार चारभाठा और बघर्रा स्थित संग्रहण केंद्रों में कुल सात लाख 99 हजार क्विंटल धान का भंडारण किया गया था। यह धान बाद में चावल मिलों को आपूर्ति के लिए रखा गया था।

जब मिलर्स द्वारा धान का उठाव पूरा हो गया और दस्तावेजों के आधार पर भौतिक सत्यापन किया गया, तब इन दोनों संग्रहण केंद्रों से 26 हजार क्विंटल धान की कमी सामने आई। प्रारंभिक तौर पर यह कमी सामान्य नुकसान से कहीं अधिक मानी जा रही है।

चूहा, दीमक और मौसम को बताया गया कारण
जिला विपणन अधिकारी अभिषेक मिश्रा के अनुसार, धान में आई कमी को आधिकारिक तौर पर मौसम के प्रभाव, नमी, चूहा, दीमक और अन्य कीट-पतंगों से हुए नुकसान के रूप में दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक भंडारण के दौरान कुछ हद तक प्राकृतिक नुकसान संभव है, लेकिन इतनी बड़ी मात्रा में धान की कमी ने सवाल खड़े कर दिए हैं। इसी बीच संग्रहण केंद्र प्रभारी प्रितेश पांडेय को उनके दायित्व से हटा दिया गया है। यह कार्रवाई एहतियातन की गई है ताकि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जा सके।

प्रारंभिक जांच में अनियमितताओं के संकेत
हालांकि, सहायक जिला खाद्य अधिकारी मदन साहू ने संकेत दिए हैं कि मामला केवल प्राकृतिक नुकसान तक सीमित नहीं हो सकता। उनके अनुसार, प्रारंभिक जांच में लगाए गए कई आरोप सही पाए गए हैं। उन्होंने बताया कि धान के रखरखाव, रिकॉर्ड संधारण और भौतिक सत्यापन में गंभीर खामियां सामने आई हैं। मदन साहू ने कहा कि पूरे मामले की गहराई से जांच के लिए एक विशेष जांच टीम गठित की गई है, जो दस्तावेजों, स्टॉक रजिस्टर, परिवहन अभिलेखों और भंडारण व्यवस्था की बारीकी से जांच करेगी। जरूरत पड़ने पर जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों से पूछताछ भी की जाएगी।

करोड़ों की राशि पर सवाल, किसानों में चिंता
26 हजार क्विंटल धान की अनुमानित कीमत करीब आठ करोड़ रुपये बताई जा रही है। इतनी बड़ी राशि से जुड़ा मामला सामने आने के बाद किसानों में भी चिंता बढ़ गई है। किसानों का कहना है कि उन्होंने सरकार पर भरोसा कर समर्थन मूल्य पर धान बेचा था और अब अगर भंडारण में ही अनियमितताएं हो रही हैं, तो इसका खामियाजा अंततः किसानों और सरकारी खजाने को भुगतना पड़ेगा। स्थानीय किसान संगठनों ने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

अन्य जिलों की तुलना में स्थिति बेहतर होने का दावा
जिला विपणन अधिकारी अभिषेक मिश्रा ने यह भी दावा किया कि प्रदेश के अन्य 65 संग्रहण केंद्रों की तुलना में कबीरधाम जिले की स्थिति बेहतर है। उनका कहना है कि अन्य जगहों पर भी भंडारण के दौरान नुकसान सामने आया है, लेकिन कबीरधाम में स्थिति नियंत्रण में है। हालांकि, इस बयान को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। जानकारों का कहना है कि अगर अन्य केंद्रों में भी इसी तरह की गड़बड़ियां हैं, तो यह राज्यव्यापी समस्या का संकेत हो सकता है।

आगे की कार्रवाई पर टिकी निगाहें 
फिलहाल, पूरे मामले की विस्तृत जांच जारी है। जांच टीम की रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि धान की कमी प्राकृतिक कारणों से हुई या इसके पीछे लापरवाही, भ्रष्टाचार या संगठित हेराफेरी है। अगर अनियमितताएं साबित होती हैं, तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ कानूनी कदम भी उठाए जा सकते हैं। कबीरधाम का यह मामला न सिर्फ जिले बल्कि पूरे राज्य की धान खरीदी और भंडारण व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है। अब सबकी नजरें जांच के नतीजों और प्रशासन की आगे की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

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