भूपेश बघेल ने कपिल सिब्बल के पाडकास्ट में किया दावा- भाजपा में आने का मिला था ऑफर

भूपेश बघेल ने बताया कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने उन्हें एक-दो बार मिलने के लिए बुलाया था। इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी बातचीत के लिए आमंत्रित किया था।

Update: 2026-02-12 05:06 GMT
नई दिल्‍ली/ रायपुर। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने केंद्र सरकार के शीर्ष नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने उन्हें भाजपा में शामिल होने का संकेत दिया था। जब उन्होंने किसी तरह का “कमिटमेंट” नहीं दिया, तो उनके खिलाफ केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई तेज हो गई और लगातार छापे पड़ने लगे। भूपेश बघेल ने ये बातें वरिष्ठ अधिवक्ता और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल के पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान कही। उनके इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में नई बहस छिड़ गई है।

‘पीएम और शाह ने बुलाया

भूपेश बघेल ने बताया कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने उन्हें एक-दो बार मिलने के लिए बुलाया था। इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी बातचीत के लिए आमंत्रित किया था। उन्होंने कहा, “शुरुआत में समझ नहीं आया कि आखिर किस मकसद से बुलाया जा रहा है। सामान्य राजनीतिक मुलाकात समझकर गया था। लेकिन बाद में लगा कि इन मुलाकातों के पीछे कोई और उद्देश्य था।” बघेल के मुताबिक, जब भी वे इन बैठकों से लौटते थे, कुछ ही दिनों के भीतर उनके यहां जांच एजेंसियों की कार्रवाई शुरू हो जाती थी।

‘मदद’ का ऑफर

पूर्व मुख्यमंत्री ने दावा किया कि मुलाकातों के दौरान उनसे पूछा जाता था कि उनके खिलाफ कौन-कौन से मामले चल रहे हैं, कौन से अधिकारी भरोसेमंद हैं और किस तरह उनकी मदद की जा सकती है। उन्होंने कहा, “मुझे यह सुनकर हैरानी होती थी कि मदद की बात क्यों की जा रही है। मैं विपक्ष में हूं और विपक्ष का धर्म सरकार की आलोचना करना है। मैं वही कर रहा था और करता रहूंगा।” भूपेश बघेल ने स्पष्ट किया कि उन्होंने किसी भी तरह की राजनीतिक प्रतिबद्धता देने से इनकार कर दिया था।

‘8-10 दिन में पड़ जाता था छापा’

बघेल ने आरोप लगाया कि वे अपनी बात स्पष्ट करके लौट आते थे, लेकिन करीब आठ-दस दिनों के भीतर फिर से उनके यहां छापा पड़ जाता था। उन्होंने बताया कि एक बार उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फोन कर कहा कि आपने तो मदद की बात कही थी, लेकिन मेरे यहां फिर छापा पड़ गया। इस पर प्रधानमंत्री ने कथित तौर पर कहा कि वे अधिकारियों से बात करेंगे। हालांकि, बघेल के अनुसार, इसके बावजूद कार्रवाई रुकने के बजाय जारी रही।

‘सीधे नहीं कहा, लेकिन इशारा साफ था’

भूपेश बघेल ने कहा कि शुरुआत में उन्हें स्पष्ट तौर पर भाजपा में शामिल होने का प्रस्ताव नहीं दिया गया था। उन्होंने कहा, कभी सीधे तौर पर यह नहीं कहा गया कि भाजपा में आ जाइए, लेकिन बाद में यह साफ हो गया कि इशारा उसी दिशा में था। जब मैं कोई कमिटमेंट देकर नहीं लौटता था, तो चार-पांच दिन में फिर कार्रवाई हो जाती थी” । उनका आरोप है कि राजनीतिक दबाव बनाने के लिए जांच एजेंसियों का इस्तेमाल किया गया।

चैतन्य बघेल की गिरफ्तारी

भूपेश बघेल के बयान ऐसे समय में आए हैं, जब उनके बेटे चैतन्य बघेल का नाम कथित शराब घोटाला और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सामने आ चुका है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 18 जुलाई 2025 को चैतन्य बघेल को गिरफ्तार किया था। एजेंसी का आरोप है कि शराब घोटाले से प्राप्त रकम में से 16.70 करोड़ रुपए चैतन्य बघेल को मिले थे। यह भी आरोप है कि इस कथित ब्लैक मनी को रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में निवेश किया गया। ED के अनुसार, पूरे मामले में लगभग 1000 करोड़ रुपए की हेराफेरी हुई। हालांकि, चैतन्य बघेल को 2 जनवरी को हाईकोर्ट से जमानत मिल गई थी। इसी मामले में हाईकोर्ट ने सह-आरोपी लक्ष्मी नारायण बंसल की गिरफ्तारी न होने पर नाराजगी भी जताई थी।

61.20 करोड़ की संपत्ति अटैच

प्रवर्तन निदेशालय ने कार्रवाई करते हुए चैतन्य बघेल की 61.20 करोड़ रुपए की संपत्ति अटैच की है। एजेंसी का कहना है कि यह संपत्ति कथित रूप से अवैध धन से अर्जित की गई है। हालांकि, बघेल परिवार ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है और इसे राजनीतिक प्रतिशोध की कार्रवाई बताया है।

राजनीतिक हलकों में तेज हुई प्रतिक्रिया

भूपेश बघेल के ताजा आरोपों के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ गई है। कांग्रेस नेताओं ने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों पर हमला बताया है, जबकि भाजपा की ओर से अब तक आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बघेल का यह बयान आने वाले समय में केंद्र और राज्य की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन सकता है, खासकर तब जब एजेंसियों की निष्पक्षता को लेकर पहले से ही सवाल उठते रहे हैं।

राजनीति में नई बहस

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का यह दावा कि भाजपा में शामिल होने का इशारा किया गया और इनकार के बाद उनके यहां छापे पड़े, राजनीतिक तौर पर बेहद गंभीर आरोप है। दूसरी ओर, उनके बेटे से जुड़े शराब घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच भी जारी है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि इन आरोपों पर केंद्र सरकार या भाजपा की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है और जांच एजेंसियों की कार्रवाई किस दिशा में आगे बढ़ती है। फिलहाल, बघेल के बयान ने छत्तीसगढ़ सहित राष्ट्रीय राजनीति में नई बहस को जन्म दे दिया है।
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