बजट को भाजपा ने ऐतिहासिक, कांग्रेस ने निराशाजनक बताया
केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा संसद में पेश किए गए बजट को मध्यप्रदेश के भाजपा नेताओं ने ऐतिहासिक और मिशनरी बजट बताया है
भोपाल। केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा संसद में पेश किए गए बजट को मध्यप्रदेश के भाजपा नेताओं ने ऐतिहासिक और मिशनरी बजट बताया है, वहीं प्रदेश में सत्ताधारी कांग्रेस ने बजट को निराशाजनक बताया है, जिसमें किसानों और बेरोजगारों के लिए कुछ भी नहीं है। भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष राकेश सिंह ने कहा है कि केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2020-21 के लिए प्रस्तुत किया गया बजट ऐतिहासिक और मिशनरी बजट है। यह बता रहा है कि दुनिया की एक आर्थिक महाशक्ति बनने की दिशा में भारत ने तेजी और मजबूती के साथ अपने कदम बढ़ा दिए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देशन और मार्गदर्शन में तैयार किया गया यह बजट जीवन के हर क्षेत्र और समाज के हर वर्ग को बेहतरी देने वाला बजट है, जिससे देश के विकास को गति मिलेगी, लोगों के जीवन स्तर में सुधार आएगा।
उन्होंने आगे कहा, अधोसंरचना और उद्योगों के लिए सरकार ने जो प्रावधान किए हैं उनसे स्पष्ट है कि यह बजट देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने वाला है।
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने केंद्रीय बजट पर प्रतिक्रिया देते कहा कि बजट सर्वव्यापी, सर्वस्पर्शी, सर्वसमावेशी है। यह एक दूरदर्शी बजट है, इस बजट का लक्ष्य गांव, गरीब और किसान की जिंदगी बदलना है। यह बजट गरीब को शक्ति देगा, किसान को मजबूती देगा, आम व्यक्ति को सम्मान देगा।
उन्होंने कहा कि 5 लाख तक की सलाना आय वालों को टैक्स में छूट देना और टैक्स दरों में कटौती सरकार का मध्यवर्ग के लिए क्रांतिकारी कदम है।
भाजयुमो के प्रदेशाध्यक्ष अभिलाष पांडे ने बजट को युवाओं के लिए समर्पित और रोजगारोन्मुखी बताया। उनका कहना है कि इस बजट में मोदी सरकार ने युवाओं के कौशल विकास और शिक्षा के साथ ही रोजगार के नए अवसर सृजित करने पर विषेष ध्यान दिया गया है।
भारतीय जनता पार्टी महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष लता ऐलकर ने बजट ने बजट केा महिला सशक्तीकरण को बढ़ावा देने वाला बजट बताया है। किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष रणवीर सिंह रावत ने केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तुत बजट को किसानों का हितैषी बताया है।
दूसरी ओर, मध्यप्रदेश कांग्रेस मीडिया विभाग की अध्यक्षा शोभा ओझा ने आम बजट को घोर निराशाजनक, जुमलों की बौछार और झूठ का पुलिंदा निरूपित करते हुए कहा कि अब तक के सबसे लंबे बजट भाषण में देश की चरमराई अर्थव्यवस्था, किसानों और बेरोजगारों के लिए न तो कोई राहतकारी घोषणा हुई और न ही यह बताया गया कि पिछले जुमला-बजटों से देश को क्या हासिल हुआ। साथ ही किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य कहां तक पहुंचा, नोटबंदी के बाद आतंकवाद की कमर कितनी टूटी, कितना काला धन प्राप्त हुआ, किसानों की आत्महत्याएं कितनी रुकीं और एयर इंडिया, रेलवे, भारत पेट्रोलियम, आईडीबीआई और एलआईसी जैसे महत्वपूर्ण संस्थान बिकने की कगार पर क्यों और कैसे आ पहुंचे हैं? इसका कोई उल्लेख नहीं है।
किसान नेता केदार सिरोही का कहना है कि यह बजट ग्रामीण भारत को निराश करने वाला है, क्योंकि इस बजट में 9.3 प्रतिशत ही राशि ग्रामीण भारत के लिए है, जबकि 70 फीसदी आबादी यहां रहती है।
कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष के मीडिया समन्वयक नरेंद्र सलूजा ने बजट को पूरी तरह से आमजन विरोधी बताते हुए कहा कि यह बजट 'खोदा पहाड़-निकली चुहिया' जैसा है। इस बजट में किसी भी वर्ग के लिए कुछ भी राहत नहीं है।