ललित सुरजन की कलम से जनतांत्रिक शक्तियों की विजय

'चुनावों के दौरान श्री मोदी ने बिहार में बत्तीस आम सभाएं कीं। आज तक किसी भी प्रधानमंत्री ने किसी प्रदेश के चुनाव में इतनी दिलचस्पी नहीं दिखाई।;

By :  National
Update: 2026-10-26 21:50 GMT

'चुनावों के दौरान श्री मोदी ने बिहार में बत्तीस आम सभाएं कीं। आज तक किसी भी प्रधानमंत्री ने किसी प्रदेश के चुनाव में इतनी दिलचस्पी नहीं दिखाई। फिर पार्टी अध्यक्ष अमित शाह बिहार में पैंतालीस दिन तक डेरा डाले रहे। केन्द्र में इस प्रदेश से आधे दर्जन मंत्री तो पहले से हैं। फिर भी दर्जन भर और मंत्रियों की ड्यूटी चुनाव में लगा दी गई। ऐसा माहौल खड़ा किया गया मानो नरेन्द्र मोदी मुख्यमंत्री का चुनाव लड़ रहे हों। मतदाताओं ने इस रवैय्ये को पसंद नहीं किया।'

'यही नहीं, श्री मोदी ने चुनाव अभियान के प्रारंभ में ही बिहार के डीएनए की बात उठा दी। प्रधानमंत्री से ऐसी असंयत भाषा की उम्मीद नहीं की जाती थी। फिर उन्होंने पैकेज देने की बात कुछ इस अंदाज में की मानो जनता पर अहसान कर रहे हों। प्रदेश के खुद्दार मतदाताओं ने इसे भी अपना अपमान ही माना। फिर दिल्ली के पास दादरी से लेकर मुंबई तक जो दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएं घटित हुईं उनका भी कोई संज्ञान लेना मोदी सरकार ने उचित नहीं समझा तथा आम जनता के मन में यही बात आई कि यह बिहार चुनाव के समय साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण व बहुमतवाद तैयार करने की कोशिश ही है। लेखकों, कलाकारों द्वारा पुरस्कार व सम्मान लौटाने पर भी उनकी बात को समझने की कोशिश करने की बजाय उल्टे उन पर अनर्गल आरोप जडऩे व टिप्पणियां करने का जो काम भाजपा के मंत्रियों व नेताओं ने किया उसे भी बिहार की राजनीतिक चेतना से लैस प्रबुद्ध मतदाताओं ने स्वीकार नहीं किया।'

(देशबन्धु में 09 नवंबर 2015 को प्रकाशित विशेष सम्पादकीय)

https://lalitsurjan.blogspot.com/2015/11/blog-post_8.html

Tags:    

Similar News