आठवां अजूबा रचते महामानव-विश्वगुरु

भारत तो इन अजूबों का सबसे बड़ा दावेदार है, क्योंकि हमारे पास ताजमहल है, जिसे अजूबा मानकर ही दुनिया भर के सैलानी देखने आते हैं और देखते रह जाते हैं।;

Update: 2026-07-08 21:50 GMT

सत्ता की सीढ़ियां चढ़ने में भी मोदी के लिए आठ की संख्या ने बड़ा योगदान दिया है। 26 जनवरी 2001 को भुज में विनाशकारी भूकंप आया था। जोड़ आठ का ही बनता है। उस समय केशुभाई पटेल गुजरात के मुख्यमंत्री थे और इस त्रासदी के बाद राहत और पुनर्वास कार्यों को लेकर उनकी खूब आलोचना हुई, फिर वो सत्ता से हटे।

दुनिया में हमेशा सात अजूबों की ही बात होती है। भारत तो इन अजूबों का सबसे बड़ा दावेदार है, क्योंकि हमारे पास ताजमहल है, जिसे अजूबा मानकर ही दुनिया भर के सैलानी देखने आते हैं और देखते रह जाते हैं। लेकिन मुगलों की बनाई इस नायाब कृति को पछाड़ने का काम नरेन्द्र मोदी करने जा रहे हैं। सात अजूबों के बाद अब वो आठवें अजूबे के प्रबल दावेदार हो गए हैं। इस गणित को समझना कठिन नहीं है। अगर नरेन्द्र मोदी से पूछेंगे तो वो बता देंगे कि आठ से उनका रिश्ता कितना पुराना है। इस रिश्ते को समझा कर वे अल्बर्ट आइंस्टीन को भी पीछे छोड़ देंगे, जिन्होंने कहा था कि चक्रवृद्धि ब्याज दुनिया का आठवां अजूबा है। जो इसे समझता है, वह कमाता है; जो नहीं समझता, वह चुकाता है। अब भारत के लोग बेचारे कर्ज के बोझ में तो ऐसे दबे हुए हैं कि उनके लिए हर तरह का ब्याज चक्रवृद्धि की तरह ही है। जब तक उन्हें पता चलता है कि हमने इस महीने इतने रुपए कमाए हैं, तब तक उससे कहीं ज्यादा का खर्च मोदी सरकार उनके सामने खड़ा कर देती है। आइंस्टीन ने मोदी का शासन नहीं देखा था, वर्ना वो चक्रवृद्धि ब्याज को नहीं मोदी शासन के तौर तरीकों को आठवां अजूबा बता देते और शायद इस देश की जनता को नौवां अजूबा, जो सारे जुल्मो-सितम और तकलीफों के बावजूद इस आस में है कि अच्छे दिन आएंगे। अगर अच्छे दिन आने की तारीख में कहीं आठ का अंक आता, तो मोदी इसे ले भी आते। क्योंकि आठ अंक से उन्हें बड़ा लगाव है।

मोदीजी के गणित के हिसाब से चलें तो उनका जन्मदिन 17 सितम्बर को आता है, एक और सात का जोड़ आठ होता है। ऐसे ही गणित से तो मोदी ने इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो से अपना रिश्ता जोड़ा है। उन्होंने कहा कि मेरे मित्र का जन्मदिन 17 तारीख को आता है, हालांकि आठ का जोड़ बताने के लिए मोदी ने 26 तारीख का सहारा लिया। इंडोनेशिया में दिए अपने भाषण में नरेन्द्र मोदी ने कहा कि हमने पिछले साल 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस मनाया था और 2 और 6 का जोड़ आठ होता है। मोदी समर्थक ऐसे ही उन्हें विश्वगुरु नहीं बताते हैं। 17 और 26 कितनी अलग संख्याएं हैं, एक विषम है एक सम है, दोनों में एक नजर में कोई समानता नहीं दिखती। अगर समानता दिखाने की चुनौती सामने रखी जाए तो गणितज्ञों को न जाने कितने तरह के फॉर्मूले लगाने पड़ेंगे और तब जाकर कोई मेल दोनों संख्याओं का किया जाएगा। लेकिन बड़ी से बड़ी मुश्किल को आसान करने का नाम ही तो मोदी है। बताइए कितने मजे लेकर कह दिया कि 2 और 6 का जोड़ आठ होता है, 1 और 7 का जोड़ भी आठ ही होता है। ये और बात है कि उन्हें इसके लिए 26 जनवरी याद आई वो भी पिछले साल की। आम भारतीय अब तक यही जानता है कि हमने केवल पिछले साल ही नहीं हर साल 26 जनवरी को ही गणतंत्र दिवस मनाया है।

1950 से यही सिलसिला चल रहा है। अब अगले साल मना पाएंगे या नहीं, क्या मोदी ने इस बारे में कोई इशारा दिया है। बड़े, सयाने लोग ऐसा ही करते हैं, सीधे-सीधे चेतावनी न देकर इशारों में समझते हैं। इस तरह जनता की समझदारी की परीक्षा भी हो जाती है। जैसे जब नरेन्द्र मोदी ने कहा था कि मैं सत्ता में आऊंगा तो हरेक के खाते में 15-15 लाख डालूंगा, तो लोगों ने उनकी बात का यकीन कर लिया था। अब 15 लाख नहीं आए तो दोष मोदी पर डाल रहे हैं कि वादाखिलाफी की। लेकिन गौर से देखें तो इसमें जनता के गणित की कमजोरी निकली। 15 यानी एक और पांच का जोड़ छह होता है। अंग्रेजी में छह लिखें तो तुम्हारा छह मेरा नौ या मेरा छह तुम्हारा नौ हो सकता है। जिस संख्या में यही तय न हो कि वो असल में क्या है, उसे लेकर कही किसी भी बात पर यकीन ही नहीं करना चाहिए था। मोदी ने तो जनता के यकीन और समझदारी की परीक्षा ली, जिसमें जनता फेल हो गई। अब ये कोई नीट पेपर लीक का मामला तो है नहीं कि बार-बार उसे कराया जाए। इसलिए अब 15 लाख वाली बात को जुमला बोलकर अमित शाह ने ठंडे बस्ते में डालने का पुण्य काम किया है। मोदी अगर कहते कि मैं सबके खाते में 17-17 लाख डालूंगा, तब उनसे सवाल किए जाने थे।

वैसे आठ से मोदी का रिश्ता केवल गणतंत्र दिवस और जन्मदिन तक सीमित नहीं है। वो अपने कार्यकाल की शुरुआत से इसे निभाते आ रहे हैं। मोदी ने 26 मई 2014 को पहली बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी, यहां भी जोड़ आठ बैठा। इसमें आठ देशों के प्रतिनिधियों ने शिरकत की थी, पाकिस्तान से प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़, श्रीलंका से राष्ट्रपति महिंद्रा राजपक्षे, अफगानिस्तान से राष्ट्रपति हामिद करज़ई, नेपाल से प्रधानमंत्री सुशील कोइराला, भूटान से प्रधानमंत्री शेरिंग टोबगे, मालदीव से राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन, बांग्लादेश से संसद की स्पीकर शिरिन शर्मिन चौधरी और मॉरीशस से प्रधानमंत्री नवीनचंद्र रामगुलाम मोदी के प्रधानमंत्री बनने के साक्षी बने। मोदी ने नोटबंदी का फैसला 8 नवंबर को ही लिया। जब राष्ट्र के नाम संबोधन करना हो तो मोदी रात आठ बजे का वक्त ही चुनते थे। पिछले कुछ बार से इसमें तब्दीली आई है वर्ना आठ से मोदी का रिश्ता तोड़ना कठिन था।

सत्ता की सीढ़ियां चढ़ने में भी मोदी के लिए आठ की संख्या ने बड़ा योगदान दिया है। 26 जनवरी 2001 को भुज में विनाशकारी भूकंप आया था। जोड़ आठ का ही बनता है। उस समय केशुभाई पटेल गुजरात के मुख्यमंत्री थे और इस त्रासदी के बाद राहत और पुनर्वास कार्यों को लेकर उनकी खूब आलोचना हुई, फिर वो सत्ता से हटे और अक्टूबर 2001 में नरेंद्र मोदी को गुजरात का नया मुख्यमंत्री बनाया गया था। तब तक मोदी विधायक तक नहीं बने थे, लेकिन सारे दिग्गज नेताओं को पछाड़ते हुए अटलबिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवानी ने उन्हें मुख्यमंत्री बनाया। इसके बाद 24 फरवरी 2002 को हुए उपचुनाव में मोदी पहली बार विधायक बने। इस संख्या के जोड़ में अतिरिक्त दो आ गया है, लेकिन ये वैसा ही है जैसे मोदी ने एक्स्ट्रा 2 एबी का फार्मूला कनाडा में बताया था। ये भी मोदी की राजनैतिक दूरदर्शिता ही है कि आठ के अंक के अलावा 2 एक्स्ट्रा साथ में रखो, न जाने कब कहां कौन सा फार्मूला फिट करने की जरूरत पड़ जाए।

विश्वगुरु मोदी के लिए नए फार्मूले गढ़ना तो बाएं हाथ का काम है। अपनी बुद्धि का कमाल वो अमेरिका में भी दिखा चुके हैं। ट्रंप मेक अमेरिका ग्रेट अगेन बोलते रह गए, मोदी ने फौरन उसमें फिट होने का प्लान तैयार किया, और कह दिया कि मेक इंडिया ग्रेट अगेन, फिर मागा और मीगा को मिलाकर मेगा कैसे बनता है, ये संधि ट्रंप को समझा दी। आठ का गणित यहां भी काम कर गया। मेक अमेरिका ग्रेट अगेन में चार शब्द हैं और मेक इंडिया ग्रेट अगेन में भी चार, चार और चार आठ होते हैं। इस फॉर्मूले के बाद कायदे से नासा वालों को कोई नया ग्रह खोजकर उसका नाम मोदी एट जैसा कुछ रख देना चाहिए। अंतरराष्ट्रीय खगोलीय संघ को भी यह स्पष्ट करना चाहिए कि सौरमंडल के नवग्रहों को आठ ग्रह बनाने का फैसला क्या मोदी से प्रेरित होकर लिया गया। 24 अगस्त 2006 तक बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल, बृहस्पति, शनि, यूरेनस, नेपच्यून के साथ प्लेटो भी सौरमंडल के ग्रहों में शामिल था, लेकिन इस दिन प्लेटो को अलग कर केवल आठ ग्रहों को मान्यता दी गई। अभी महाद्वीप तो सात ही हैं, देखना होगा कि आठ के आकार जैसा अनंत रूप धरने वाले मोदी की प्रेरणा से आठवां महाद्वीप बनता है या नहीं जिसे मोदी महाद्वीप कहा जाएगा। हालांकि अभी भारत में ऐसा ही अहसास होता है कि मोदी समर्थक अपने ही बनाए मोदीद्वीप पर रहते हैं, जिन्हें वास्तविकताओं से परे ऐसे गणितों में उलझे रहने में ही परमआनंद की प्राप्ति होती है।

इन्हें आठ की संख्या से पहलगाम आतंकी हमले में मारे गए 26 लोग 2+6=8, भारत की सबसे खराब पासपोर्ट रैंकिंग 125, 1+2+5=8, नीट पेपर लीक की तारीख 3 मई 3+5=8 इन सबको भी याद रखना चाहिए। और ये भी कि राम मंदिर के ट्रस्टी कुल 15 हैं और इनमें सुपर ट्रस्टियों के तौर पर नरेन्द्र मोदी, अमित शाह को जोड़ दें तो 17 का अंक ही बनता है यानी आंकड़ा आठ का ही बन रहा है।

इंद्रधनुष के सात रंग, संगीत के सात सुर अभी खैर मनाएं कि राजनीति की नजर उन पर नहीं पड़ी है। वर्ना सुर-ताल सब बिगड़ा हुआ ही दिखेगा। आखिरी में एक सुझाव, मोदीजी अबकि सुनहरी जरी वाला कोई सूट सिलवाएं तो नमो-नमो की जगह आठ-आठ लिखवाएं, आठ की संख्या धन्य हो जाएगी।

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