भारत पर नजर रखो, क्या दिन ला दिए मोदी जी!

केन्द्रीय वाणिज्य मंत्री पीयुष गोयल यह तो बता रहे हैं कि कौन कौन से उत्पाद भारत में नहीं आएंगे। मगर यह नहीं बता रहे कि कौन कौन से आएंगे।

Update: 2026-02-08 20:50 GMT

शकील अख्तर

केन्द्रीय वाणिज्य मंत्री पीयुष गोयल यह तो बता रहे हैं कि कौन कौन से उत्पाद भारत में नहीं आएंगे। मगर यह नहीं बता रहे कि कौन कौन से आएंगे। सारा खेल इसी में छुपा है। अमेरिका जो चाहेगा वह आएगा। जीएम (जेनेटिक मोटिफाइड) फसलों के लिए वह भारत को प्रयोगशाला बनाएगा। यही कहा जा रहा है कि मीडिल क्लास चेत जाए। यह जीएम फसलें इस पीढ़ी को नहीं अगली कई पीढ़ियों को क्या नुकसान पहुंचाएंगी यह सोचना भी बहुत डरावना है। डीएनए बदल जाएगा।

किसी से लड़ना, अवाइड करना या और कुछ भी तिरस्कार वगैरह इन सबसे बुरी बात समझी जाती है नजर रखना। नजर किस पर रखी जाती है? वह तो सब ठीक है अपराधी वगैरह। लेकिन उससे भी बुरी बात है नजर अपने आश्रित पर रखी जाती है। शब्द बहुत गंदा है मगर सच वही है कि गुलाम पर। कि वह गुलामी से बाहर जाने की तो नहीं सोच रहा। नजर रखो इस पर।

तो मोदी जी आज भारत को इस स्थिति पर ले आए कि अमेरिका के अधिकारी हम पर निगाह रखेंगे। अब क्या कहें? हद तो यह हो गई कि इस शर्मनाक स्थिति में लाने को मोदी अपनी शान समझ रहे हैं! संसद परिसर में एनडीए के सांसदों से अपना स्वागत करवा रहे हैं। हार पहन रहे हैं। जीत का!

हम किस से तेल खरीदेंगे किस से नहीं यह अमेरिका तय करेगा। और हम उसके अनुसार करेंगे। मगर फिर भी वह हम पर निगाह रखेगा। इससे ज्यादा शर्म की, अपमान की बात और क्या हो सकती है। लेकिन क्या यह भारत का अपमान है? ऊपर से देखने में हैं। मगर वास्तव में यह मोदी का पराभव है। सारी नकली कलई खुल गई। 56 इंच की छाती, लाल आंखों और एक अकेला सब पर भारी की असलियत सब के सामने आ गई। अमेरिका के सामने पूरी तरह आत्मसमर्पण कर दिया। राहुल गांधी के शब्दों में नरेन्द्र ...सरेन्डर!

बाहर इस तरह सरेन्डर किया और यहां राहुल का सामना होने से डर कर लोकसभा में नहीं आए। राहुल ने सुबह कहा था मोदी जी में लोकसभा में आने की हिम्मत नहीं है। उन्हें राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब देना था। मगर वे वास्तव में नहीं आए और उसके बाद लोकसभा अध्यक्ष से कहलवाया यह गया कि मोदी को सदन में खतरा था। विपक्ष की महिला सांसदों से। इसलिए नहीं आए।

प्रधानमंत्री को सदन के अंदर खतरा! वह भी महिला सांसदों से! बहुत बड़ा मजाक हो गया यह। और यहीं से मोदी जी की उलटी गिनती की शुरुआत हो जाती है। विदेशों से भारत की निगरानी का फरमान आता है और उन्हें जवाब देना तो दूर वे देश में अपनी लोकसभा में जिसके वे नेता हैं वहां इसलिए नहीं जाते क्योंकि उन्हें वहां खतरा दिखता है।

अमेरिका से डील मोदी की है। कमजोर और लाचार भारत दिख रहा है। भारत न कभी था न कभी है। लेकिन जैसा कि भक्तों ने मोदी का मतलब भारत कर दिया था। वैसा ही अब मोदी के कमजोर होने से अमेरिका भारत को कमजोर समझ रहा है। उस पर नजर रखने की बात कर रहा है। इसका जवाब विपक्ष तो कड़े शब्दों में दे ही रहा है। कांग्रेस ने साफ कह दिया कि आपकी जो भी सीक्रेट अमेरिका के पास हों हमें कोई मतलब नहीं है। आप इस वजह से सरेंडर कर दीजिए मगर भारत नहीं झुकेगा। कांग्रेस के मीडिया डिपार्टमेंट के चैयरमेन पवन खेड़ा ने यह कहते हुए एपस्टीन फाइल का भी •िाक्र किया। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी कर चुके हैं।

एपस्टीन फाइल में नाम आया है। संदेश यही जा रहा है कि एपस्टीन फाइल की वजह से ट्रंप मनमानी कर रहा है। पहले उसने सीज फायर करवाया। और फिर यह डील। जो पूरी तरह इकतरफा है। भारत के राष्ट्रीय हितों के खिलाफ। भारत का जो सामान पहले अमेरिका 3 परसेन्ट टैरिफ देकर जाता था। अब 18 परसेन्ट देकर जाएगा। सामान्य शब्दों में पहले भारत के बने सामान पर अमेरिका केवल तीन प्रतिशत शुल्क ( टैरिफ) लेता था। फिर उसने हमें धमकाते हुए पहले 50 प्रतिशत किया। सौ प्रतिशत की धमकी दी। फिर 25 प्रतिशत पर लाया। और अब जो नई डील हो गई है उस में 18 प्रतिशत लेगा। मतलब तीन से 18 प्रतिशत बढ़ाया गया है और हमारे प्रधानमंत्री इस अपनी जीत बताते हुए विजय माला पहन रहे हैं।

और देखिए! डील में इससे भी ज्यादा जो खतरनाक पहलू है जिसे सरकार छुपाने की कोशिश कर रही है वह है अमेरिका के लिए अपना पूरा बाजार खोल देना। अमेरिका कह रहा है कि इस डील से उसका किसान मालामाल हो जाएगा। और हमारे किसान का दिवाला निकल जाएगा। अमेरिका से जो कृषि और डेयरी उत्पाद आएंगे वह टैरिफ फ्री होंगे। मतलब उस पर भारत एक पैसा भी शुल्क ( टैरिफ) नहीं लगाएगा। अमेरिका को जो भी अतिरिक्त उत्पादन है वह सब यहां डंप किया जाएगा। भारत का किसान उसका मुकाबला नहीं कर पाएगा। किसान संगठनों ने कहा है कि यह तीन काले कानूनों से बड़ी तबाही होने जा रही है। उसके साफ शब्द हैं कि उन्हें सरकार की सफाइयों पर भरोसा नहीं है।

डील में जितना बताया जा रहा है उससे ज्यादा छुपाया जा रहा है। अमेरिका का साफ कहना है वह इसके जरिए 500 अरब डालर का माल भारत में बेचेगा। 500 अरब डालर मतलब 45 लाख करोड़ रुपए! यह भी समझना मुश्किल है इतना रुपया कितना होता है? तो थोड़ा सा ऐसे समझ लीजिए कि अभी जितना माल विदेशों से भारत आता है उसका ढाई गुने से ज्यादा केवल अमेरिका से हमें आयात करना होगा। और माल आता हो तो किसका पैसा जाता है। आम भारतीय का ही। उससे यही माल खरीदवाया जाएगा। किसकी कीमत पर? भारतीय किसान और पशुपालक की कीमत पर। प्रचार और कीमतों में काम्पीटिशन करवा कर वे भारतीय किसान को मुकाबले से बाहर कर देंगे।

खतरे बहुत बड़े हैं। जनता को ही समझना होंगे। और अगर नहीं समझती तो वह आने वाली पीढ़ियों की बर्बादी की कहानी लिखने में खुद भी शामिल मानी जाएगी। कांग्रेस ने मध्यम वर्ग को सचेत किया है। माहौल वही बनाता है। मोदी मोदी का जाप सबसे पहले उसी ने किया था।

केन्द्रीय वाणिज्य मंत्री पीयुष गोयल यह तो बता रहे हैं कि कौन कौन से उत्पाद भारत में नहीं आएंगे। मगर यह नहीं बता रहे कि कौन कौन से आएंगे। सारा खेल इसी में छुपा है। अमेरिका जो चाहेगा वह आएगा। जीएम (जेनेटिक मोटिफाइड) फसलों के लिए वह भारत को प्रयोगशाला बनाएगा। यही कहा जा रहा है कि मीडिल क्लास चेत जाए। यह जीएम फसलें इस पीढ़ी को नहीं अगली कई पीढ़ियों को क्या नुकसान पहुंचाएंगी यह सोचना भी बहुत डरावना है। डीएनए बदल जाएगा। यह संयोग प्रयोग डीएनए ऐसे शब्दों का प्रधानमंत्री बहुत उपयोग करते हैं। मगर क्या इनका मतलब उन्हें मालूम है? भारत में जीएम फसलों पर रोक है। केवल कपास की खेती की अनुमति है। यह बहुत बड़ी बहस है कि खाने-पीने की चीजें जीएम होना चाहिए या नहीं और इसका मानव शरीर पर क्या प्रभाव पड़ता है। यह प्रयोग भारतीय लोगों पर किया जाएगा?

बहुत संक्षेप में जीएम मतलब किसी बीज, जीव या पौधे के जीन को दूसरे में आरोपित कर एक नई प्रजाति विकसित करना। जीएम फसलों की जरूरत वहां होती है जहां उत्पादन कम हो। मगर भारत में तो इन्दिरा गांधी ने हरित क्रान्ति करके देश में अतिरिक्त अनाज पैदा करवा दिया था। किसान और कृषि वैज्ञानिकों ने उनका साथ दिया था।

वाणिज्य मंत्री पीयुष गोयल ने कहा है कि भारत ने अमेरिकी खाद्य और कृषि उत्पाद व्यापार में मौजूद पुरानी बाधाओं को पार करने पर सहमति जताई है। इससे साफ और क्या होगा? सरकार कितना ही छुपाने की कोशिश करे इसका मतलब साफ है जीएम फसलों के लिए दरवाजे खोलना।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार है)

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