ललित सुरजन की कलम से - बजट क्या कहता है-1
'यह तथ्य संभवत: स्पष्ट करने की आवश्यकता है कि बजट भाषण के दो हिस्से होते हैं
'यह तथ्य संभवत: स्पष्ट करने की आवश्यकता है कि बजट भाषण के दो हिस्से होते हैं। भाग-ब या भाग-दो में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर की दरों में छूट या बढ़ोतरी के ब्यौरे होते हैं। जबकि भाग-अ या पहले हिस्से में वित्तमंत्री देश की भावी अर्थनीति का खुलासा करते हैं और इसे जाने बिना बजट को नहीं समझा जा सकता।
अब जैसे वर्ष 16-17 के बजट में प्रचारित किया गया है कि यह किसानों का और ग्रामीण भारत का बजट है। हमें यह बात अच्छी लगना चाहिए कि सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए अपनी प्रतिबद्धता दर्शा रही है।
लेकिन प्रश्न उठता है कि यह सिर्फ आश्वासन के स्तर पर है या ठोस कदम उठाए जाएंगे और इसके सुपरिणाम कब सामने आएंगे। प्रधानमंत्री ने रविवार को बरेली की सभा में जो कहा वह बात वित्तमंत्री ने बजट में दोहराई कि अगले पांच वर्षों में किसानों की आय दुगुनी हो जाएगी। सुनकर अच्छा लगा। अब हम वित्तमंत्री से जानना चाहेंगे कि वर्तमान में किसान की औसत आय कितनी है और पांच साल बाद याने 2022 में बढ़कर वह कितनी हो जाएगी।'
(देशबन्धु में 03 मार्च 2016 को प्रकाशित)
https://lalitsurjan.blogspot.com/2016/03/1.html