रिपब्लिकन सीनेटर बोले-लिंडसे ग्राहम होते तो दुखी होते
वाशिंगटन, रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर लगाए जाने वाले नए अमेरिकी टैरिफ और प्रतिबंधों में छूट देने के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फैसले के खिलाफ अमेरिकी कांग्रेस में विरोध बढ़ता जा रहा है। इस मुद्दे पर भारतीय मूल के कई अमेरिकी सांसद सबसे मुखर आलोचकों में शामिल रहे जबकि एक वरिष्ठ रिपब्लिकन सीनेटर ने भी डेमोक्रेट नेताओं के साथ मिलकर इस फैसले की आलोचना की।

वाशिंगटन, रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर लगाए जाने वाले नए अमेरिकी टैरिफ और प्रतिबंधों में छूट देने के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फैसले के खिलाफ अमेरिकी कांग्रेस में विरोध बढ़ता जा रहा है। इस मुद्दे पर भारतीय मूल के कई अमेरिकी सांसद सबसे मुखर आलोचकों में शामिल रहे जबकि एक वरिष्ठ रिपब्लिकन सीनेटर ने भी डेमोक्रेट नेताओं के साथ मिलकर इस फैसले की आलोचना की।
कैलिफोर्निया से डेमोक्रेट सांसद अमी बेरा ने 'एक्स' पर कहा कि अगर कोई पूछ रहा है कि क्या ट्रंप प्रशासन यूक्रेन का साथ छोड़ रहा है, तो इस फैसले से उसका जवाब साफ मिल जाता है।
उन्होंने कहा, "मेरे रिपब्लिकन सहयोगियों ने हमारे सत्र खत्म होने से पहले 'लिंडसे ग्राहम रूस प्रतिबंध विधेयक' को पास कराने के लिए काफी जोर लगाया था। अब उन्हें खुलकर कहना चाहिए कि अमेरिका रूस का पक्ष नहीं ले रहा है।"
वर्जीनिया से डेमोक्रेट सांसद सुहास सुब्रमण्यम ने कहा, "ट्रंप वही कर रहे हैं जिसकी हमने चेतावनी दी थी। वह कांग्रेस के अधिकार को कमजोर कर रहे हैं, यूक्रेन का साथ छोड़ रहे हैं और पुतिन को जवाबदेही से बचने का मौका दे रहे हैं।"
टेक्सास से रिपब्लिकन सीनेटर जॉन कॉर्निन, जो 'सीनेट इंडिया कॉकस' के संस्थापकों में से एक हैं, ने ट्रंप के आदेश पर आई न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट साझा करते हुए सिर्फ एक लाइन लिखी, "लिंडसे यह देखकर हैरान और दुखी होते।"
जिस कानून की चर्चा हो रही है, उसका नाम रिपब्लिकन नेता लिंडसे ग्राहम के नाम पर रखा गया था। उनका जुलाई में निधन हो गया था।
सीनेट के डेमोक्रेटिक नेता डिक डर्बिन ने कहा, "राष्ट्रपति ट्रंप ने एक बार फिर क्रेमलिन के सामने झुकने का रास्ता चुना है। लिंडसे ग्राहम, जॉन मैक्केन और रोनाल्ड रीगन यह देखकर दुखी हो रहे होंगे।"
हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी में शीर्ष डेमोक्रेट सदस्य ग्रेगरी मीक्स ने कहा कि ट्रंप के पास रूस पर प्रतिबंध लगाने की ताकत कई वर्षों से थी, लेकिन उनमें ऐसा करने की इच्छा नहीं है।
उन्होंने कहा कि पुतिन के प्रति लगातार नरम रवैया अपनाने और इस विवादित छूट के बाद ट्रंप को एक नया सम्मान मिलना चाहिए 'नेविल चेम्बरलेन तुष्टिकरण पुरस्कार।'
मैसाचुसेट्स से डेमोक्रेट सांसद जिम मैकगवर्न ने सवाल उठाया, "आखिर पुतिन ने ट्रंप से इसके बदले क्या वादा किया है? क्या वह फिर से अमेरिकी चुनावों को प्रभावित करने की कोशिश करेंगे?" उन्होंने कहा कि रूस से आयात जारी रखने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि रूस की आक्रामक नीतियों पर लगाम लगाना और मुश्किल हो जाएगा।
सभी प्रतिक्रियाएं आलोचनात्मक नहीं थीं। अमेरिका स्थित संगठन फाउंडेशन फॉर इंडिया एंड इंडियन डायस्पोरा स्टडीज (एफआईआईडीएस) ने ट्रंप को धन्यवाद दिया। संगठन ने कहा कि यूक्रेन और ईरान से जुड़े संघर्षों के कारण डीजल और ऊर्जा की कीमतें बढ़ रही हैं, ऐसे समय में तेल आयात शुल्क पर अस्थायी राहत एक व्यावहारिक कदम है।
संगठन ने कहा, "सर्दियां नजदीक हैं। ऐसे में सस्ती ऊर्जा और कूटनीतिक समाधान प्राथमिकता बने रहने चाहिए।"
ट्रंप ने 16 अक्टूबर को एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए थे। इसके तहत रूसी तेल और गैस के सबसे बड़े खरीदारों पर 100 प्रतिशत तक शुल्क लगाने का प्रावधान लागू किया गया, लेकिन उसी आदेश में इन शुल्कों को अस्थायी रूप से माफ भी कर दिया गया। इससे भारत जैसे देशों को राहत मिली, जो रूसी कच्चे तेल के बड़े खरीदारों में शामिल हैं।


