बेला एस्टेट के मतदाताओं का मुद्दा उठा, राहुल गांधी ने चुनाव आयोग पर लगाए गंभीर आरोप
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने यमुना किनारे स्थित बेला एस्टेट इलाके के मतदाताओं का मुद्दा उठाते हुए चुनाव आयोग की मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं

मतदाता सूची विवाद पर राहुल गांधी का हमला, बेला एस्टेट के लोगों के नाम हटाने का आरोप
- यमुना किनारे बसी बस्ती के वोटरों का मामला उठा, चुनाव आयोग पर विपक्ष के सवाल
नई दिल्ली। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने यमुना किनारे स्थित बेला एस्टेट इलाके के मतदाताओं का मुद्दा उठाते हुए चुनाव आयोग की मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने दावा किया कि इलाके में रहने वाले सैकड़ों लोगों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं, जबकि वे लंबे समय से वहीं रह रहे हैं और पिछले चुनावों में मतदान भी कर चुके हैं।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर राहुल गांधी ने कहा कि बेला एस्टेट में रहने वाले लोगों ने लोकसभा और विधानसभा चुनावों में मतदान किया था, लेकिन हालिया मतदाता सूची संशोधन के बाद बड़ी संख्या में उनके नाम सूची में नहीं दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने इस मुद्दे को लेकर इलाके का दौरा करने और स्थानीय लोगों से बातचीत करने का भी दावा किया।
यमुना किनारे बेला एस्टेट में 728 लोग रहते हैं। SIR के बाद वोटर लिस्ट में सिर्फ़ एक नाम बचा - बाकी 727 नाम काट दिए गए।
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) September 28, 2026
ये लोग दशकों से यहाँ रह रहे हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव और 2025 के दिल्ली चुनावों में वोट डाल चुके हैं। 2023 में इनके घर तोड़ दिए गए थे - पर ये कहीं नहीं गए, यहीं… pic.twitter.com/27cJZjqJg6
कांग्रेस नेता ने कहा कि आवासीय स्थिति और मतदान के अधिकार को एक-दूसरे से जोड़ना उचित नहीं है। उनका तर्क है कि यदि कोई व्यक्ति पात्र मतदाता है तो केवल मकान या स्थायी पते से जुड़े कारणों के आधार पर उसका नाम मतदाता सूची से नहीं हटाया जाना चाहिए।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया पारदर्शी नहीं रही है और इससे गरीब तथा कमजोर वर्गों के लोगों के मतदान अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने इस मामले में चुनाव आयोग से स्पष्टीकरण देने की मांग की।
वहीं, चुनाव आयोग की ओर से इन आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। मतदाता सूची के पुनरीक्षण और सत्यापन से जुड़े मामलों को लेकर हाल के दिनों में राजनीतिक बहस तेज हुई है और विभिन्न दल इस मुद्दे पर अलग-अलग दावे कर रहे हैं।


