ईडी की मुंबई और गुजरात में बड़ी कार्रवाई, मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 11 ठिकानों पर छापेमारी
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के मुंबई जोनल ऑफिस-I ने 'प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट' (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत बुधवार को मुंबई और गुजरात में लगभग 11 जगहों पर तलाशी अभियान चलाया।

मुंबई। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के मुंबई जोनल ऑफिस-I ने 'प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट' (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत बुधवार को मुंबई और गुजरात में लगभग 11 जगहों पर तलाशी अभियान चलाया।
ईडी की ओर से चलाए गए इस तलाशी अभियान का उद्देश्य अपराध से प्राप्त आय (पीओसी) का पता लगाना और यह देखना था कि इस पैसे को आगे कहां भेजा गया या कैसे छिपाया गया।
इस मामले में, नवीन चिचकर और अन्य लोगों के एक सुव्यवस्थित अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क ने मुख्य रूप से भारत के बाहर से तस्करी करके लाए गए नशीले पदार्थों (कोकीन, हाइड्रोपोनिक कैनबिस, एलएसडी और कैनबिस से बने खाद्य पदार्थ) को बेचकर यह अवैध कमाई (पीओसी) की थी।
मुंबई में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) और नवी मुंबई पुलिस के एंटी-नारकोटिक्स सेल (एएनसी) द्वारा भारी मात्रा में उच्च गुणवत्ता वाले हाइड्रोपोनिक कैनबिस (गांजा), कोकीन और बिना हिसाब-किताब वाली नकदी जब्त किए जाने के बाद, नवीन गुरुनाथ चिचकर और अन्य के खिलाफ पीएमएएल, 2002 के तहत जांच शुरू की गई थी।
जांच के दौरान पता चला है कि नवीन चिचकर ने अवैध रूप से कमाई गई बड़ी रकम को क्रिप्टोकरेंसी में निवेश किया है। यह भी सामने आया है कि नशीले पदार्थों की बिक्री से मिली रकम सीधे हवाला ऑपरेटरों के पास जमा की जाती थी, जो बाद में नवीन चिचकर को यूएसडीटी या थाई बाहत के रूप में भुगतान करते थे।
तलाशी के दौरान कई आपत्तिजनक सामग्री, डिजिटल उपकरण और ऐसे सबूत मिले हैं, जो नशीले पदार्थों की बिक्री से मिली रकम की मनी लॉन्ड्रिंग को साबित करते हैं। जांच से पता चला है कि आरोपियों ने नशीले पदार्थों की बिक्री से मिली रकम को हवाला चैनलों और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए भारत के बाहर भेजी थी।
ईडी की तलाशी के दौरान मिले सबूत भी इस बात की पुष्टि करते हैं। वहीं, ईडी की ओर से इस मामले से संबंधित आगे की जांच और विधिवत कार्रवाई जारी है।


