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600-700 लोगों ने किया रेप, पाकिस्तानी ग्रूमिंग गैंग्स पर ब्रिटिश सांसद का बड़ा खुलासा, सुनकर संसद रह गई सन्‍न

रूपर्ट लोव ने संसद में जिन गवाहियों का उल्लेख किया, वे स्वतंत्र जांचों के दौरान दर्ज की गई थीं। इन बयानों में पीड़िताओं ने अपने बचपन और किशोरावस्था के दौरान हुए शोषण, धमकियों और भय के माहौल का वर्णन किया।

600-700 लोगों ने  किया रेप, पाकिस्तानी ग्रूमिंग गैंग्स पर ब्रिटिश सांसद का बड़ा खुलासा, सुनकर संसद रह गई सन्‍न
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लंदन: ब्रिटेन में बच्चों के यौन शोषण से जुड़े पाकिस्तान के "ग्रूमिंग गैंग" मामलों को लेकर एक बार फिर राष्ट्रीय बहस छिड़ गई है। इस मुद्दे को ब्रिटिश सांसद रूपर्ट लोव ने संसद में जोरदार तरीके से उठाया, जिसके बाद वर्षों पुराने मामलों और उनसे जुड़ी जांच रिपोर्टों पर फिर से चर्चा शुरू हो गई है। अपने संबोधन में लोव ने कई पीड़िताओं के बयान पढ़ते हुए दावा किया कि संगठित अपराधी समूहों ने लंबे समय तक बच्चों और किशोरियों को निशाना बनाया, जबकि कई मामलों में संस्थागत स्तर पर गंभीर विफलताएं भी सामने आईं। उन्‍होंने कई पीड़िताओं के बयान पढ़े, जिसमें एक पीड़िता का कहना था कि तीन वर्ष में 600-700 अलग-अलग व्यक्तियों ने उसके साथ दुष्कर्म किया था। एक गवाही में बच्चे के साथ हुई हिंसा के बारे में बताया गया जिसमें अपराधियों ने बच्चे के चेहरे पर सिगरेट बुझाई थी।

पीड़िताओं की गवाहियों का किया जिक्र

रूपर्ट लोव ने संसद में जिन गवाहियों का उल्लेख किया, वे स्वतंत्र जांचों के दौरान दर्ज की गई थीं। इन बयानों में पीड़िताओं ने अपने बचपन और किशोरावस्था के दौरान हुए शोषण, धमकियों और भय के माहौल का वर्णन किया। लोव के अनुसार, कई पीड़िताओं ने बताया कि उन्हें कम उम्र में अपराधी गिरोहों द्वारा फंसाया गया और लंबे समय तक उनका शोषण किया गया। कुछ गवाहियों में यह भी आरोप लगाया गया कि पीड़िताओं की शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया गया और कई अवसरों पर संबंधित संस्थाएं समय रहते प्रभावी कार्रवाई करने में विफल रहीं।

संस्थागत विफलताओं पर उठे सवाल

सांसद लोव ने अपने भाषण में केवल अपराधियों की भूमिका पर ही नहीं, बल्कि पुलिस, स्थानीय प्रशासन और बाल संरक्षण संस्थाओं की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कई मामलों में पीड़िताओं ने मदद की गुहार लगाई, लेकिन उनकी बातों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया। ब्रिटेन में पहले भी कई जांच रिपोर्टों में यह सामने आया है कि कुछ क्षेत्रों में अधिकारियों ने शिकायतों पर अपेक्षित स्तर की तत्परता नहीं दिखाई, जिससे अपराध लंबे समय तक जारी रहे। यही कारण है कि इस विषय को केवल आपराधिक मामला नहीं, बल्कि संस्थागत जवाबदेही के मुद्दे के रूप में भी देखा जाता है।

अपराधियों की पृष्ठभूमि पर बहस

ब्रिटेन में ग्रूमिंग गैंग विवाद का एक महत्वपूर्ण पहलू अपराधियों की सामाजिक और जातीय पृष्ठभूमि को लेकर भी रहा है। विभिन्न जांचों और अदालती मामलों में कुछ अपराधियों का संबंध पाकिस्तानी मूल के समुदायों से बताया गया था। हालांकि, विशेषज्ञों और सरकारी एजेंसियों ने बार-बार इस बात पर जोर दिया है कि यौन अपराध किसी एक समुदाय, धर्म या जातीय समूह तक सीमित नहीं होते। अपराधियों की पहचान चाहे जो भी हो, कानून के तहत सभी मामलों की निष्पक्ष जांच और कार्रवाई आवश्यक है।

रादरहैम से शुरू हुई थी व्यापक चर्चा

ब्रिटेन में इस मुद्दे ने सबसे पहले व्यापक ध्यान तब खींचा जब साउथ यार्कशायर के रादरहैम शहर में बच्चों के यौन शोषण के मामले सामने आए। वर्ष 2001 के आसपास स्थानीय अधिकारियों को कई शिकायतें मिली थीं, लेकिन बाद में यह आरोप लगा कि पर्याप्त कार्रवाई नहीं की गई। मामले में महत्वपूर्ण कानूनी कार्रवाई लगभग एक दशक बाद हुई, जब 2010 में पाकिस्तानी मूल के पांच व्यक्तियों को 12 से 16 वर्ष आयु की लड़कियों के खिलाफ विभिन्न अपराधों के लिए दोषी ठहराया गया। इसके बाद देश के अन्य हिस्सों में भी इसी तरह के मामलों की जांच शुरू हुई।

50 से अधिक शहरों में सामने आए मामले

रादरहैम के बाद रोचडेल, ऑक्सफोर्ड, टेलफोर्ड, ब्रिस्टल समेत ब्रिटेन के 50 से अधिक शहरों में ऐसे मामलों की जांच हुई। इन घटनाओं ने बाल सुरक्षा तंत्र, सामाजिक सेवाओं और कानून-व्यवस्था से जुड़े संस्थानों की कार्यप्रणाली पर व्यापक सवाल खड़े किए। इन मामलों के उजागर होने के बाद ब्रिटिश सरकार ने कई स्तरों पर जांच शुरू की और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े नियमों तथा प्रक्रियाओं में सुधार की दिशा में कदम उठाए।

2014 की रिपोर्ट ने चौंकाए थे आंकड़े

प्रोफेसर एलेक्सिस जे द्वारा तैयार की गई 2014 की चर्चित रिपोर्ट में रादरहैम में 1997 से 2013 के बीच 1,400 से अधिक बच्चों के यौन शोषण का अनुमान लगाया गया था। इस रिपोर्ट ने पूरे देश को झकझोर दिया और बाल संरक्षण व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर किया। रिपोर्ट के बाद कई अधिकारियों की भूमिका की जांच हुई और सरकार पर कठोर कदम उठाने का दबाव बढ़ा। इसके साथ ही पीड़ितों को न्याय दिलाने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए नई नीतियों पर भी काम शुरू किया गया।

फिर उठी जवाबदेही की मांग

रूपर्ट लोव के हालिया संसदीय संबोधन के बाद एक बार फिर इस बात की मांग तेज हो गई है कि पुराने मामलों की समीक्षा की जाए, पीड़ितों को पूरा न्याय मिले और जिन संस्थाओं ने अपने दायित्वों का निर्वहन नहीं किया, उनकी जवाबदेही तय की जाए। ब्रिटेन में यह मुद्दा केवल अतीत की घटनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि बाल सुरक्षा, कानून के प्रभावी क्रियान्वयन और संस्थागत पारदर्शिता से जुड़ी एक बड़ी राष्ट्रीय बहस का हिस्सा बन चुका है।


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