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करोड़ों लोगों की थाली तक क्यों नहीं पहुंच रहा पौष्टिक भोजन?

नई दिल्ली, दुनिया में इतना अनाज पैदा होता है कि हर इंसान का पेट भरा जा सकता है, लेकिन इसके बावजूद करोड़ों लोग आज भी भूख का सामना कर रहे हैं।

करोड़ों लोगों की थाली तक क्यों नहीं पहुंच रहा पौष्टिक भोजन?
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नई दिल्ली, दुनिया में इतना अनाज पैदा होता है कि हर इंसान का पेट भरा जा सकता है, लेकिन इसके बावजूद करोड़ों लोग आज भी भूख का सामना कर रहे हैं। वहीं, बड़ी संख्या में ऐसे लोग भी हैं, जो चाहकर भी पौष्टिक भोजन नहीं खरीद पाते। ऐसे में सवाल उठता है कि जब दुनिया में अनाज और खाद्य पदार्थों की कमी नहीं है, तो आखिर हर व्यक्ति की थाली तक पौष्टिक भोजन क्यों नहीं पहुंच पा रहा है?

इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) ने विश्व खाद्य दिवस के मौके पर नवाचार को बढ़ावा देने और खाद्य व्यवस्था को मजबूत बनाने का संदेश दिया है।

विश्व खाद्य दिवस का संदेश है, ''आज नवाचार करें, कल को समृद्ध बनाएं।'' इसका उद्देश्य ऐसी व्यवस्थाओं को बढ़ावा देना है, जो आज लोगों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने के साथ आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों को भी सुरक्षित रखें।

एफएओ के मुताबिक, दुनिया में लगभग 64 करोड़ लोग भूख का सामना कर रहे हैं, जबकि 2.69 अरब लोग पौष्टिक आहार खरीदने में असमर्थ हैं। संघर्ष, आर्थिक अस्थिरता और जलवायु परिवर्तन के कारण यह चुनौती और गंभीर हो रही है। ऐसे में केवल अधिक भोजन पैदा करना ही काफी नहीं है, बल्कि उसे सही तरीके से लोगों तक पहुंचाना भी जरूरी है।

खाद्य व्यवस्था को बेहतर बनाने में नवाचार की अहम भूमिका है। आज तकनीक की मदद से खेती, खाद्य पदार्थों के भंडारण, परिवहन और बाजार तक पहुंचने के तरीकों में बदलाव लाया जा सकता है। किसानों को डिजिटल माध्यम से मौसम, फसलों और खेती से जुड़ी जरूरी जानकारी दी जा सकती है। बेहतर बीज, नई कृषि तकनीक और पानी व जमीन का सही इस्तेमाल भी उत्पादन बढ़ाने में मदद कर सकते हैं।

इसके साथ ही पारंपरिक खेती के अनुभवों को आधुनिक विज्ञान से जोड़ना भी जरूरी है। किसान, मछुआरे, पशुपालक और वन क्षेत्रों में रहने वाले समुदाय अपने अनुभवों से खाद्य व्यवस्था को अधिक मजबूत बनाने में योगदान दे सकते हैं। खासतौर पर महिलाओं और युवाओं की भागीदारी इस दिशा में नए अवसर पैदा कर सकती है।

भूख और कुपोषण से निपटना किसी एक व्यक्ति या संस्था की जिम्मेदारी नहीं है। इसके लिए सरकारों, निजी कंपनियों, किसानों, वैज्ञानिकों और आम लोगों को मिलकर काम करना होगा।

सरकारें कृषि अनुसंधान में निवेश करके, ग्रामीण इलाकों में बुनियादी सुविधाएं बढ़ाकर और किसानों के लिए बेहतर नीतियां बनाकर मदद कर सकती हैं। वहीं, निजी क्षेत्र खाद्य आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने, रोजगार के अवसर पैदा करने और नए कारोबारी मॉडल विकसित करने में योगदान दे सकते हैं।

शैक्षणिक संस्थानों और अनुसंधान केंद्रों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है, ताकि नई तकनीकों और शोध को खेतों तक पहुंचाया जा सके। इससे किसानों को फायदा होगा और लोगों के लिए पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना आसान हो सकता है।

खाद्य सुरक्षा का मतलब सिर्फ इतना नहीं है कि लोगों को आज खाने के लिए भोजन मिल जाए। यह भी जरूरी है कि आने वाले वर्षों में खेती के लिए पर्याप्त पानी, उपजाऊ जमीन और दूसरे प्राकृतिक संसाधन सुरक्षित रहें। जलवायु संबंधी संकटों से निपटने की तैयारी और संसाधनों का जिम्मेदारी से इस्तेमाल खाद्य व्यवस्था को मजबूत बना सकता है।


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