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पशुओं के चोकर से बनाया जा रहा था बिस्किट

नई दिल्ली, भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए कड़े नियमों का पालन सुनिश्चित कर रहा है।

पशुओं के चोकर से बनाया जा रहा था बिस्किट
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नई दिल्ली, भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए कड़े नियमों का पालन सुनिश्चित कर रहा है। इसी कड़ी में खाद्य सुरक्षा के गंभीर उल्लंघनों के लिए मेसर्स सूर्य फूड एंड एग्रो लिमिटेड (प्रियागोल्ड बिस्किट्स), मेसर्स डोडला डेयरी लिमिटेड और मेसर्स उइर ऑर्गेनिक फूड्स प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। इसके अलावा, नरपधम फूड्स, सन रिजेस हेल्थ केयरर्स और मेसर्स शाह कांतिलाल जयंतीलाल को भी नोटिस जारी किए गए हैं।

एफएसएसएआई ने शनिवार को बताया कि उसने 'प्रियागोल्ड बिस्कुट' बनाने वाली कंपनी 'सूर्या फूड एंड एग्रो लिमिटेड' के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। कंपनी पर आरोप है कि उसने बिस्कुट बनाने में कच्चे माल के तौर पर उस चोकर का इस्तेमाल किया, जो असल में पशुओं के चारे के लिए होता है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक बयान में खाद्य नियामक (फूड रेगुलेटर) ने बताया कि एक उपभोक्ता की शिकायत के बाद 'सूर्या फूड एंड एग्रो लिमिटेड' का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान दौरान खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता से जुड़ी गंभीर कमियां पाई गईं।"

खाद्य नियामक ने कहा, "पशुओं के चारे के लिए बना चोकर का इस्तेमाल 'प्रियागोल्ड' बिस्किट बनाने में फाइबर के स्रोत के रूप में किया जा रहा था। चोकर से भरे बोरों पर साफ तौर पर लिखा था कि यह सामग्री पशुओं के चारे के लिए है।"

एफएसएसएआई ने बताया कि इसके अलावा प्लांट की स्वच्छता, कीट नियंत्रण (पेस्ट कंट्रोल), कच्चे माल के भंडारण और उसे अलग-अलग रखने की व्यवस्था, कर्मचारियों की साफ-सफाई, परिसर के रखरखाव और बीच के चरणों वाले फॉर्मूलेशन को संभालने के तरीकों में भी कमियां पाई गईं।

एफएसएसएआई ने आगे कहा कि "निरीक्षण के दौरान नियमों के गंभीर उल्लंघन पाए जाने के बाद 'सूर्या फूड एंड एग्रो लिमिटेड' का एफएसएसएआई लाइसेंस सस्पेंड कर दिया गया है। साथ ही, सक्षम प्राधिकारी ने "इन उल्लंघनों के लिए" 'सूर्या फूड एंड एग्रो लिमिटेड' के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू करने की मंजूरी दे दी है।

एफएसएसएआई ने बताया कि उसने खाद्य सुरक्षा के गंभीर उल्लंघनों के लिए 'डोडला डेयरी लिमिटेड' और 'उइर ऑर्गेनिक फूड्स प्राइवेट लिमिटेड' के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।

खाद्य नियामक ने कहा, "जांच के लिए 'डोडला डेयरी लिमिटेड' से 'फुल क्रीम दूध' का एक रेगुलेटरी सैंपल लिया गया था। खाद्य विश्लेषक ने पाया कि यह सैंपल एफएसएस नियमों के तहत तय किए गए 'मिल्क फैट' (दूध में वसा) के मानकों को पूरा नहीं करता है, इसलिए इसे 'सबस्टैंडर्ड' (घटिया गुणवत्ता वाला) घोषित कर दिया गया।"

खाद्य व्यवसाय संचालक (एफबीओ) की अपील पर इस सैंपल को 'रेफरल फूड लेबोरेटरी' भेजा गया। वहां पुष्टि हुई कि सैंपल में डिटर्जेंट/कॉस्टिक सोडा मौजूद होने के कारण यह 'असुरक्षित' है, और इसमें मिल्क फैट की मात्रा तय न्यूनतम सीमा से कम होने के कारण यह 'सबस्टैंडर्ड' है।

प्रयोगशाला की जांच से साबित हुआ कि यह मामला एफएसएस एक्ट, 2006 के तहत असुरक्षित और सबस्टैंडर्ड खाद्य पदार्थों से जुड़े नियमों के उल्लंघन का है। सक्षम प्राधिकारी ने 'डोडला डेयरी लिमिटेड' और इस उत्पाद के निर्माण व मार्केटिंग से जुड़े अन्य संबंधित एफबीओ के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू करने की मंजूरी दे दी है। अधिकारियों ने असुरक्षित और सबस्टैंडर्ड खाद्य पदार्थों के मामले में आगे की कानूनी कार्यवाही करने के निर्देश दिए हैं।"

इसके अलावा, 'नारपाधम फूड्स,' 'सन रिजेज हेल्थ केयरर्स,' और 'शाह कांतिलाल जयंतीलाल' को भी नोटिस जारी किए गए हैं। नारपाधाम फूड्स में निरीक्षण के दौरान पाया गया कि अपडेट किया गया एफएसएसएआई लाइसेंस परिसर में कहीं भी स्पष्ट रूप से प्रदर्शित नहीं था। काम करने के लिए पर्याप्त जगह नहीं थी, गंदगी और धूल जमा थी, हवा आने-जाने (वेंटिलेशन) की उचित व्यवस्था नहीं थी और दरवाजे-खिड़कियां ठीक से नहीं लगे थे। मेसर्स शाह कांतिलाल जयंतीलाल को परिसर बंद होने और व्यावसायिक गतिविधियों के सत्यापन के संबंध में नोटिस जारी किया गया है। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि लाइसेंस प्राप्त परिसर बंद था।

सन रिजेज हेल्थ केयरर्स में कीड़े-मकोड़ों को अंदर आने से रोकने के लिए दरवाजे ठीक से नहीं लगे थे और परिसर में काम करने के लिए पर्याप्त जगह और स्वच्छता की उचित स्थिति नहीं थी।

खाद्य पदार्थों के संपर्क में आने वाले उपकरणों और कंटेनरों की ठीक से सफाई नहीं की गई थी, और साफ-सफाई व स्वच्छता के उचित तरीकों का पालन नहीं किया जा रहा था। खाद्य परीक्षण, पीने के पानी की जांच, स्वीकृत आपूर्तिकर्ताओं और कच्चे माल के निरीक्षण का कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं था।


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