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नेशनल हेराल्ड मनी लॉन्ड्रिंग केस: सोनिया-राहुल के खिलाफ ED की याचिका पर आज दिल्ली हाई कोर्ट में होगी सुनवाई

दिल्ली हाई कोर्ट आज नेशनल हेराल्ड मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की याचिका पर सुनवाई करेगा। ED ने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें उसकी चार्जशीट पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया गया था।

नेशनल हेराल्ड मनी लॉन्ड्रिंग केस: सोनिया-राहुल के खिलाफ ED की याचिका पर आज दिल्ली हाई कोर्ट में होगी सुनवाई
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नई दिल्ली। नेशनल हेराल्ड मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की याचिका पर हाईकोर्ट सोमवार को सुनवाई करेगा। यह याचिका ट्रायल कोर्ट के उस आदेश के खिलाफ है, जिसमें ईडी की चार्जशीट पर संज्ञान लेने से इन्कार कर दिया गया था। इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की पीठ करेगी। यह मामला सोनिया गांधी, राहुल गांधी और अन्य आरोपियों से जुड़ा है।

ईडी ने आरोप लगाया है कि नेशनल हेराल्ड से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कथित साजिश और वित्तीय अनियमितताएं हुई हैं। ईडी का कहना है कि आरोपियों ने एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) की करीब 2000 करोड़ रुपये की संपत्तियों पर नियंत्रण हासिल किया। एजेंसी के अनुसार, यह काम यंग इंडियन नाम की कंपनी के जरिए किया गया, जिसमें गांधी परिवार की बहुमत हिस्सेदारी बताई गई है।

ट्रायल कोर्ट ने 16 दिसंबर 2025 के आदेश में कहा था कि ईडी की शिकायत पर संज्ञान लेना कानूनी रूप से सही नहीं है, क्योंकि मामला किसी एफआईआर पर आधारित नहीं था। इसी आदेश को ईडी ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है। ईडी का तर्क है कि मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामलों में सिर्फ एफआईआर होना जरूरी नहीं है और ट्रायल कोर्ट का फैसला गलत है।

ईडी का यह भी कहना है कि इस तरह के फैसले गंभीर आर्थिक अपराधों की जांच को प्रभावित कर सकते हैं। इससे पहले 22 दिसंबर को हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को नोटिस जारी किया था, जिसमें सोनिया गांधी और राहुल गांधी के अलावा सुमन दुबे, सैम पित्रोदा, यंग इंडियन और अन्य को भी शामिल किया गया था।

ईडी की दलील

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने ED की ओर से पक्ष रखते हुए कहा कि यह “कानून का सीधा सवाल” है और ट्रायल कोर्ट के निष्कर्ष “स्पष्ट रूप से त्रुटिपूर्ण” हैं।

उन्होंने कहा कि इस मामले को तथ्यों के बजाय कानूनी आधार पर देखा जाना चाहिए और निचली अदालत का फैसला अन्य मामलों में भी बाधा बन सकता है।

ट्रायल कोर्ट ने क्यों ठुकराई चार्जशीट

ट्रायल कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत जांच और अभियोजन तब तक मान्य नहीं है, जब तक संबंधित “शेड्यूल्ड ऑफेंस” के लिए FIR दर्ज न हो।

अदालत ने यह भी कहा कि ED की जांच एक निजी शिकायत के आधार पर शुरू हुई थी, न कि किसी FIR पर। यह शिकायत भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी द्वारा दायर की गई थी, जिसके बाद 2014 में समन जारी हुआ, लेकिन केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने FIR दर्ज नहीं की।

ईडी का पक्ष

ED ने हाई कोर्ट में दायर याचिका में कहा है कि ट्रायल कोर्ट का आदेश ऐसे मामलों में आरोपितों को “छूट” देने जैसा है, जहां शेड्यूल्ड अपराध निजी शिकायत के जरिए सामने आता है।

एजेंसी का कहना है कि सक्षम अदालत द्वारा निजी शिकायत पर लिया गया संज्ञान, पुलिस द्वारा दर्ज FIR से कमतर नहीं होता, बल्कि कई मामलों में अधिक मजबूत आधार माना जाता है।


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