ट्रंप का दावा, 'ग्रीनलैंड सुरक्षा' पर अमेरिका और डेनमार्क में समझौता

ग्रीनलैंड की सुरक्षा पर अमेरिका और डेनमार्क के बीच समझौता हुआ है, अमेरिका इसे "स्थायी समझौता" बता रहा है.;

Update: 2026-09-19 11:58 GMT

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड की सुरक्षा पर "स्थायी नियंत्रण" के लिए डेनमार्क के साथ समझौते का दावा किया है. उनका कहना है कि इसका उद्देश्य रूस और चीन को आर्कटिक क्षेत्र में सैन्य ठिकाने बनाने से रोकना है.

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने शुक्रवार, 18 सितंबर को ग्रीनलैंड से जुड़े एक समझौते की घोषणा की. उन्होंने बताया कि ग्रीनलैंड की सुरक्षा पर वॉशिंगटन को "स्थायी नियंत्रण" देने के लिए डेनमार्क के साथ एक समझौता किया है. ट्रंप के मुताबिक, इस कदम का मुख्य उद्देश्य रूस और चीन को इस आर्कटिक क्षेत्र में अपने सैन्य ठिकाने स्थापित करने से रोकना है.

जनवरी 2025 में दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद से ही ट्रंप रणनीतिक कारणों से ग्रीनलैंड पर नियंत्रण की मांग कर रहे थे, जिससे नाटो सहयोगी डेनमार्क चिंतित था. नाटो सदस्यों ने इसका कड़ा विरोध भी किया था.

ग्रीनलैंड, डेनमार्क के अधीन आने वाला स्वायत्त क्षेत्र है और दोनों ने ही इस समझौते का स्वागत किया है. उन्होंने कहा है कि वे अगले सप्ताह न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के इतर इस पर हस्ताक्षर करेंगे. इसके बावजूद समझौते की शर्तें अभी भी अनिश्चित हैं. हालांकि डेनमार्क का कहना है कि उसकी संप्रभुता बरकरार है.

संप्रभुता और सुरक्षा पर नेताओं के बयान

डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडेरिक्सन के मुताबिक, यह एक ऐसा समझौता है जो एक ही समय में डेनिश किंगडम की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और ग्रीनलैंड के लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार को मान्यता देता है.

दूसरी ओर ट्रंप ने अपने ट्रुथ सोशल नेटवर्क पर कहा, "मुझे यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि अमेरिका ने डेनमार्क किंगडम और ग्रीनलैंड के साथ एक समझौता किया है, जो अमेरिका को ग्रीनलैंड में सुरक्षा और अन्य सभी जरूरतों पर स्थायी नियंत्रण देता है."

ट्रंप ने आगे लिखा, "अब से कोई भी अमेरिकी विरोधी हमारी स्पष्ट लिखित स्वीकृति के बिना ग्रीनलैंड में कभी भी बेस नहीं बना सकता, ग्रीनलैंड में सैन्य मौजूदगी नहीं रख सकता, या संवेदनशील निवेश नहीं कर सकता." 80 वर्षीय ट्रंप ने इसे 'इन्फिनिट लाइफ' यानी बिना किसी अंतिम तारीख वाला समझौता बताया है.

आर्कटिक रणनीति और एक 'अच्छा समझौता'

ट्रंप लगातार चेतावनी देते रहे हैं कि गर्म होते आर्कटिक में वर्चस्व की रणनीतिक लड़ाई के बीच रूस और चीन ग्रीनलैंड में अपना पैर जमाने की कोशिश कर रहे हैं. अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने भी साफ कर दिया कि वॉशिंग्टन उन्हें ऐसा करने की इजाजत नहीं देगा.

इसी साल जनवरी में दावोस आर्थिक मंच पर ट्रंप ने ग्रीनलैंड के भविष्य को लेकर नाटो महासचिव मार्क रुटे के साथ एक कथित समझौता किया था, जिसकी शर्तें अस्पष्ट बनी हुई हैं. फ्रेडेरिक्सन ने सोमवार को कहा था कि वे "आशावादी" हैं कि जनवरी से अमेरिका और ग्रीनलैंड के साथ चल रही बातचीत से विवाद हल हो सकता है. शुक्रवार को फ्रेडेरिक्सन ने कहा कि वह "खुश हैं कि ग्रीनलैंड, डेनमार्क और अमेरिका के लिए एक अच्छे समझौते की संभावना है," और उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह "नाटो और यूरोप के लिए अच्छा है."

ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री येंस-फ्रेडरिक नील्सन ने भी कहा कि अमेरिका के साथ यह समझौता इस क्षेत्र की सुरक्षा को "मजबूत करता है".

नाटो के साथ तनाव और सैन्य विस्तार

ट्रंप ने यह नहीं बतया कि यह समझौता व्यावहारिक रूप से कैसे काम करेगा. ग्रीनलैंड में अमेरिका का एक सैन्य ठिकाना पहले से ही है जिसे पिटुफिक बेस कहा जाता है. उसके अलावा, अमेरिका दक्षिणी ग्रीनलैंड में तीन नए सैन्य ठिकाने खोलना चाहता है.

1951 का एक रक्षा समझौता, वॉशिंगटन को द्वीप पर सैनिकों की तैनाती और सैन्य ठिकानों को बढ़ाने की अनुमति देता है, बशर्ते डेनमार्क और ग्रीनलैंड को पहले से सूचित किया जाए.

तनाव के चरम पर, ट्रंप ने 57,000 निवासियों वाले इस क्षेत्र पर कब्जा करने के लिए बल प्रयोग से कभी इनकार नहीं किया. इस कारण यूरोपीय संघ और नाटो संगठनों में यह मुश्किल का सबब बन गया. समाचार एजेंसी एएफपी के अनुसार, तब से तनाव कुछ हद तक कम हुआ है, और ट्रंप को शांत करने के एक स्पष्ट प्रयास के तहत नाटो ने आर्कटिक में सुरक्षा को मजबूत करने के लिए एक नया मिशन शुरू किया है.

Tags:    

Similar News