दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति की ट्रंप को दो टूक, दबाव में ईरान नहीं भेजेंगे सेना

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दक्षिण कोरिया की भूमिका को लेकर सार्वजनिक रूप से अपनी नाराजगी जाहिर की है। हालांकि, ट्रंप ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि वह सियोल से किस तरह की सैन्य सहायता चाहते हैं।;

Update: 2026-09-19 10:37 GMT

सियोल: दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग ने ईरान के खिलाफ अमेरिका के नेतृत्व वाले सैन्य अभियान में अपने देश की भागीदारी को लेकर स्थिति स्पष्ट कर दी है। शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में ली ने कहा कि दक्षिण कोरिया ईरान के खिलाफ जारी युद्ध में सैनिक या सैन्य संसाधन नहीं भेजेगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सियोल ऐसी किसी गतिविधि में शामिल नहीं होगा, जिसे ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के समर्थन के तौर पर देखा जा सकता है। राष्ट्रपति का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा में सहयोग को लेकर दक्षिण कोरिया की भूमिका पर सार्वजनिक रूप से नाराजगी जताई है।

सैन्य भागीदारी से सियोल ने किया इनकार

राष्ट्रपति ली ने कहा कि दक्षिण कोरिया युद्ध में शामिल होने या उसमें हस्तक्षेप करने के लिए अपने सैनिकों को तैनात नहीं करेगा और न ही सैन्य संसाधन भेजेगा। उनके बयान से संकेत मिलता है कि सियोल ईरान के खिलाफ किसी सैन्य अभियान का प्रत्यक्ष हिस्सा बनने के बजाय अपनी समुद्री और आर्थिक सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित करना चाहता है। दक्षिण कोरिया के लिए यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि देश की ऊर्जा जरूरतों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार का बड़ा हिस्सा समुद्री मार्गों से जुड़ा है। होर्मुज स्ट्रेट और लाल सागर जैसे समुद्री मार्गों में किसी भी तरह का सैन्य तनाव वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार पर असर डाल सकता है।

व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा पर अलग रणनीति

ली जे-म्युंग ने बताया कि दक्षिण कोरिया सोमालिया के तट पर समुद्री डकैती रोधी अभियान के लिए तैनात अपने नौसेना के विध्वंसक पोत और सहायक जहाजों की भूमिका बढ़ाने पर विचार कर रहा है। अगर इन जहाजों को लाल सागर या होर्मुज स्ट्रेट के आसपास तैनात किया जाता है तो उनका प्राथमिक उद्देश्य दक्षिण कोरियाई तेल टैंकरों और अन्य व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा करना होगा। राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि इन नौसैनिक संसाधनों का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ किसी सैन्य अभियान में नहीं किया जाएगा। सियोल का तर्क है कि व्यापारिक और ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े अपने जहाजों की सुरक्षा करना तथा किसी देश के खिलाफ युद्ध में सैन्य रूप से शामिल होना दो अलग-अलग विषय हैं।

ट्रंप ने मांगी थी ‘थोड़ी मदद’

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दक्षिण कोरिया की भूमिका को लेकर सार्वजनिक रूप से अपनी नाराजगी जाहिर की है। हालांकि, ट्रंप ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि वह सियोल से किस तरह की सैन्य सहायता चाहते हैं। ट्रंप ने पिछले महीने कहा था कि उन्होंने दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति से संघर्ष में “थोड़ी मदद” करने के लिए कहा था। उन्होंने दक्षिण कोरिया में तैनात अमेरिकी सैनिकों की मौजूदगी का भी उल्लेख किया था। इसके बावजूद सियोल ने अब स्पष्ट कर दिया है कि वह ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के लिए अपने सैनिक या सैन्य संसाधन उपलब्ध नहीं कराएगा।

अमेरिका-दक्षिण कोरिया संबंधों के बीच आया बयान

राष्ट्रपति ली का यह रुख अमेरिका और दक्षिण कोरिया के बीच व्यापक सुरक्षा संबंधों के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण है। दोनों देशों के बीच उत्तर कोरिया से जुड़े सुरक्षा मुद्दों को लेकर लंबे समय से सैन्य सहयोग रहा है। हालांकि, पिछले महीने ट्रंप ने दक्षिण कोरिया के साथ होने वाले वार्षिक संयुक्त सैन्य अभ्यासों में से एक को एकतरफा रूप से कम कर दिया था। ट्रंप ने इन अभ्यासों को महंगा बताया था और कहा था कि वे उत्तर कोरिया के प्रति अनुचित तथा शत्रुतापूर्ण हैं।

उत्तर कोरिया पर ट्रंप की अलग टिप्पणी

ट्रंप ने यह भी कहा था कि उनके कार्यकाल के दौरान उत्तर कोरिया का व्यवहार उनके प्रति “बिना किसी खतरे वाला और सम्मानजनक” रहा है। उन्होंने उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन के साथ अपने संबंधों को “बहुत अच्छे” बताया था। दक्षिण कोरिया के लिए एक ओर अमेरिका के साथ सुरक्षा गठबंधन महत्वपूर्ण है, वहीं दूसरी ओर ईरान संघर्ष में सीधे शामिल होने से जुड़े जोखिम भी हैं। ऐसे में सियोल ने फिलहाल अपने नौसैनिक संसाधनों के इस्तेमाल को व्यापारिक और ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा तक सीमित रखने का संकेत दिया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अमेरिका दक्षिण कोरिया के इस रुख पर आगे क्या प्रतिक्रिया देता है और होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा को लेकर दोनों सहयोगियों के बीच किस तरह का समन्वय विकसित होता है।

Tags:    

Similar News