तुर्की: एर्दोआन सरकार के निशाने पर एक और समाचार चैनल
तुर्की में अधिकारियों ने विपक्ष समर्थक समाचार चैनल हाक टीवी पर छापा मारकर उसका प्रसारण रोक दिया.;
तुर्की में अधिकारियों ने विपक्ष समर्थक समाचार चैनल हाक टीवी पर छापा मारकर उसका प्रसारण रोक दिया और कंपनी की निगरानी के लिए सरकारी प्रशासक नियुक्त कर दिया.
तुर्की के अधिकारियों ने इस्तांबुल में हाक टीवी के दफ्तरों पर छापा मार करक प्रसारण बंद करा दिया. इसके बाद कथित भ्रष्टाचार की जांच के दौरान कंपनी की निगरानी के लिए एक सरकारी प्रशासक नियुक्त किया गया. यह राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोआन के दौर में दशकों से जारी मीडिया पर नियंत्रण की प्रक्रिया का ताजा घटनाक्रम है.
तुर्की के अधिकारियों ने बुधवार को हाक टीवी का नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया. लोकप्रिय समाचार चैनल ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा, "हाक टीवी के मुख्यालय पर पुलिस की छापेमारी! एक प्रशासक नियुक्त किया गया है और प्रसारण रोक दिया गया है.”
इस दौरान पुलिस इमारत के बाहर तैनात रही, वित्तीय अपराधों की जांच करने वाले अधिकारियों ने दफ्तरों की तलाशी ली और तकनीकी कर्मचारियों ने चैनल के सीधे प्रसारण और यूट्यूब प्रसारण बंद कर दिए.
ऑनलाइन साझा किए गए वीडियो में वह पल दिखाई दिया, जब चैनल का सीधा प्रसारण अचानक बंद हो गया. उस समय चैनल पर एक बड़े निवेश कोष में घोटाले को लेकर बातचीत चल रही थी. इसके बाद प्रसारण की जगह 1973 में बनी तुर्की की एक पुरानी फिल्म दिखने लगी.
एर्दोआन को चुनौती देने वाले इस्तांबुल के मेयर हिरासत में
इस्तांबुल के अभियोजन कार्यालय ने एक बयान में बताया कि हाक टीवी के मालिक जाफर माहिरोग्लू के खिलाफ "रिश्वतखोरी, निविदाओं में धांधली और अपराध से अर्जित संपत्ति को वैध बनाने” के आरोपों की जांच की जा रही है. माहिरोग्लू की हाक टीवी और उनकी दूसरी कंपनियों में सरकारी प्रशासक नियुक्त किए गए हैं.
अभियोजन पक्ष के मुताबिक, कुल 17 लोगों को हिरासत में लेने के लिए वारंट जारी किए गए, जिनमें से 11 लोगों को पकड़ लिया गया.
विदेश में रहने वाले और अधिकारियों की तलाश में शामिल माहिरोग्लू ने इस कार्रवाई को "तुर्की के लिए एक काला दिन” बताया. एक्स पर साझा किए गए एक वीडियो में उन्होंने अपने खिलाफ लगे आरोपों को "बेबुनियाद” करार दिया. विपक्ष समर्थक इस समाचार चैनल ने कहा कि माहिरोग्लू के सात रिश्तेदारों को भी अधिकारियों ने हिरासत में लिया है.
माहिरोग्लू ने कहा, "जनता के जानकारी पाने का अधिकार राजनीतिक कारणों से छीना जा रहा है.” वो आगे कहते हैं, "न्यायपालिका को हथियार के रूप में इस्तेमाल करना तुर्की को पहुंचाया गया सबसे बड़ा नुकसान है.”
एर्दोआन तुर्की में मीडिया की असहमति को दबा रहे हैं
प्रेस फ्रीडम के लिए काम करने वाले संगठनों और विपक्षी दलों ने माहिरोग्लू के साथ मिलकर सरकार की ओर से हाक टीवी का नियंत्रण अपने हाथ में लेने की निंदा की. उन्होंने इसे राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोआन की ओर से अपने आलोचकों की आवाज दबाने की दिशा में उठाया गया ताजा कदम कहा.
मुख्य विपक्षी पार्टी न्यू पार्टी के नेता ओजगुर ओजेल ने कहा कि चैनल पर छापा मारना सरकारी शक्तियों का गलत इस्तेमाल है.
ओजेल ने इन छापों को "कमजोर और कायरतापूर्ण” बताया. उन्होंने कहा कि यह महज संयोग नहीं है कि यह कार्रवाई ऐसे समय हुई, जब जेल में बंद एर्दोआन के विरोधी और इस्तांबुल के मेयर एकरेम इमामोग्लू एक बड़े भ्रष्टाचार मुकदमे में अपना बचाव पेश करने वाले थे. इस पर व्यापक चर्चा होने की उम्मीद थी.
ओजेल ने एक्स पर लिखा, "सुबह-सुबह किसी टेलीविजन चैनल पर छापा मारना और वहां प्रशासक नियुक्त करना ऐसा काम है, जो सिर्फ तानाशाह ही कर सकते हैं. दुर्भाग्य से, उन्होंने हमारे देश को ऐसी स्थिति में पहुंचा दिया है.”
एर्दोआन के 22 साल के शासनकाल में तुर्की में प्रेस की आजादी को गंभीर नुकसान पहुंचा है. रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स के सबसे हालिया विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक में तुर्की 180 देशों में 163वें स्थान पर रहा.
एर्दोआन के दौर में कई मीडिया संस्थानों पर नियंत्रण
अंकारा के समकालीन पत्रकार संघ ने हाक टीवी के खिलाफ हुई कार्रवाई की निंदा की. संगठन ने कहा, "हाक टीवी में प्रशासक की नियुक्ति और उसके प्रसारण पर रोक प्रेस की आजादी और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर गंभीर हमला है. यह फैसला संवैधानिक अधिकारों और जानकारी पाने के जनता के अधिकार की अनदेखी करता है, जिसे स्वीकार नहीं किया जा सकता.”
हाक टीवी पर नियंत्रण के साथ ही तुर्की में सरकारी प्रशासकों के अधीन जबरन लाए गए प्रमुख समाचार संस्थानों की संख्या पांच हो गई है. इससे पहले फ्लैश टीवी, एको तुर्क, हाबरतुर्क और टेली1 के साथ भी इसी तरह की कार्रवाई हो चुकी है.
मीडिया अधिकारों की निगरानी करने वाले संगठन एमएलएसए के सह-निदेशक वेयसेल ओक ने कहा कि हाक टीवी के खिलाफ कार्रवाई "सूचना के प्रवाह पर एकाधिकार स्थापित करने की सरकार की कोशिशों में सबसे महत्वपूर्ण कदमों में से एक है.”
फ्रांस की समाचार एजेंसी एएफपी से बातचीत में ओक ने कहा कि हाक टीवी का सबसे ज्यादा देखा जाने वाला समाचार चैनल होना "इस कार्रवाई के असली निशाने को भी उजागर करता है: जनता को अलग-अलग स्रोतों से खबरें पाने के अधिकार से वंचित करना.”
उन्होंने आगे कहा, "प्रेस की आजादी की रक्षा करने का मतलब है जनता के सच जानने, सरकार को जवाबदेह ठहराने और अपने भविष्य का फैसला स्वतंत्र रूप से करने के अधिकार की रक्षा करना.”
यूरोपीय संसद में तुर्की मामलों के प्रतिवेदक नाचो सांचेज आमोर ने भी एक्स पर इस कार्रवाई की आलोचना की. उन्होंने कहा कि सरकार स्पष्ट रूप से "मीडिया के 90 फीसदी हिस्से पर नियंत्रण से संतुष्ट नहीं है” और अब "100 फीसदी नियंत्रण” हासिल करना चाहती है.
उन्होंने आगे कहा, "पत्रकारों की हिरासत और इंटरनेट पर व्यापक सेंसरशिप के बीच मीडिया की आजादी और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जल्द ही केवल याद बनकर रह जाएगी.”