यूनिवर्सिटी के खिलाफ ट्रंप प्रशासन ने क‍िया मुकदमा

वॉशिंगटन, अमेरिकी न्याय विभाग ने यूनिवर्सिटी ऑफ डेलावेयर के खिलाफ मुकदमा दायर किया है। मामला यूनिवर्सिटी की उस नीति से जुड़ा है, जिसके तहत अमेरिका में कानूनी दर्जे के बिना रह रहे कुछ प्रवासी कम 'इन-स्टेट ट्यूशन' फीस के लिए योग्य हो सकते हैं;

By :  IANS
Update: 2026-10-02 06:36 GMT

वॉशिंगटन, अमेरिकी न्याय विभाग ने यूनिवर्सिटी ऑफ डेलावेयर के खिलाफ मुकदमा दायर किया है। मामला यूनिवर्सिटी की उस नीति से जुड़ा है, जिसके तहत अमेरिका में कानूनी दर्जे के बिना रह रहे कुछ प्रवासी कम 'इन-स्टेट ट्यूशन' फीस के लिए योग्य हो सकते हैं जबकि डेलावेयर से बाहर रहने वाले अमेरिकी नागरिकों को आम तौर पर ज्यादा नॉन-रेजिडेंट फीस देनी पड़ती है।

यह मुकदमा ट्रंप प्रशासन की उन कार्रवाइयों की नई कड़ी है, जिनमें राज्यों और यूनिवर्सिटीज की ऐसी ट्यूशन नीतियों को चुनौती दी जा रही है, जो बिना कानूनी इमिग्रेशन स्टेटस वाले छात्रों को स्थानीय निवासियों वाली कम फीस का फायदा देती हैं।

अमेरिकी न्याय विभाग का आरोप है कि यूनिवर्सिटी ऑफ डेलावेयर की यह नीति फेडरल कानून का उल्लंघन करती है। विभाग का कहना है कि इसके तहत अमेरिका में कानूनी रूप से मौजूद नहीं रहने वाले लोगों को उच्च शिक्षा में ऐसा फायदा दिया जा रहा है, जो सभी अमेरिकी नागरिकों को उनके रहने वाले राज्य की परवाह किए बिना नहीं मिलता। हालांकि, इन आरोपों पर अभी अदालत ने फैसला नहीं सुनाया है।

अमेरिका के एसोसिएट अटॉर्नी जनरल स्टेनली ई. वुडवर्ड जूनियर ने कहा, "न्याय विभाग की कोशिश तब तक नहीं रुकेगी, जब तक हम ऐसे हर राज्य के कानून या यूनिवर्सिटी की नीति को चुनौती नहीं दे देते, जो हमारे अपने नागरिकों के मुकाबले अवैध प्रवासियों को प्राथमिकता देती है।"

उन्होंने कहा, "कांग्रेस ने काफी पहले यह साफ कर दिया था कि राज्य अवैध प्रवासियों को ऐसी कम ट्यूशन फीस नहीं दे सकते, जो सभी अमेरिकियों के लिए उपलब्ध न हो।"

न्याय विभाग ने फेडरल कोर्ट से यूनिवर्सिटी की उस नीति को लागू होने से रोकने की मांग की है, जिसमें डेलावेयर में रहने वाले लोगों को इन-स्टेट ट्यूशन फीस मिल सकती है, भले ही वे अमेरिका में कानूनी रूप से रह रहे हों या नहीं।

सरकार यह भी चाहती है कि अदालत यूनिवर्सिटी को भविष्य में ऐसी नई ट्यूशन नीतियां बनाने से रोके, जिनसे इमिग्रेशन स्टेटस के आधार पर इसी तरह का फायदा मिल सके।

अमेरिकी न्याय विभाग के सिविल डिवीजन के असिस्टेंट अटॉर्नी जनरल ब्रेट ए. शुमेट ने कहा, "यह फेडरल कानून का सीधा मामला है। कॉलेज अवैध प्रवासियों को ऐसा फायदा नहीं दे सकते, जो अमेरिकी नागरिकों को नहीं दिया जाता।"

उन्होंने कहा, "न्याय विभाग यह बर्दाश्त नहीं करेगा कि अमेरिकी छात्रों के साथ उनके अपने देश में दूसरे दर्जे के नागरिकों जैसा व्यवहार किया जाए।"

न्याय विभाग के मुताबिक, गुरुवार को दायर इस मामले के साथ ऐसी नीतियों को चुनौती देने वाले मुकदमों की संख्या 26 हो गई है। ये मामले बिना कानूनी इमिग्रेशन स्टेटस वाले प्रवासियों को इन-स्टेट ट्यूशन फीस देने से जुड़ी नीतियों के खिलाफ हैं।

विभाग ने कहा कि टेक्सास, केंटकी, ओक्लाहोमा, नेब्रास्का, इलिनॉय और कंसास से जुड़े छह मामलों में अदालतों ने ऐसे आदेश दिए हैं, जो फेडरल सरकार के रुख के पक्ष में रहे हैं।

न्याय विभाग के मुताबिक, कैलिफोर्निया, न्यूयॉर्क, न्यू जर्सी, मैसाचुसेट्स, वर्जीनिया, मिनेसोटा, मैरीलैंड, कोलोराडो, कनेक्टिकट, वरमोंट, एरिजोना, न्यू मैक्सिको, ओरेगन, वॉशिंगटन और हवाई समेत कई राज्यों से जुड़े दूसरे मुकदमे अभी चल रहे हैं।

रिपोर्ट तैयार किए जाने तक यूनिवर्सिटी ऑफ डेलावेयर ने गुरुवार को दायर मुकदमे को लेकर अपने मुख्य सार्वजनिक बयान वाले पेज पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया जारी नहीं की थी।

2026-27 शैक्षणिक सत्र के लिए यूनिवर्सिटी ने कुछ अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम में डेलावेयर के निवासियों के लिए 656 डॉलर प्रति क्रेडिट आवर की ट्यूशन फीस तय की है।

वहीं, डेलावेयर के बाहर के छात्रों के लिए यह फीस 1,770 डॉलर प्रति क्रेडिट आवर है। इस पूरे कानूनी विवाद के केंद्र में एक फेडरल कानून है, जो निवास के आधार पर उच्च शिक्षा में मिलने वाले फायदों से जुड़ा है।

अमेरिकी न्याय विभाग का तर्क है कि इस कानून के तहत राज्य या शिक्षण संस्थान बिना कानूनी इमिग्रेशन स्टेटस वाले प्रवासियों को निवास के आधार पर ऐसा फायदा नहीं दे सकते, जब तक कि वही फायदा सभी अमेरिकी नागरिकों को भी उनके रहने की जगह की परवाह किए बिना उपलब्ध न हो।

Tags:    

Similar News