सैक्सनी-अनहाल्ट चुनाव: एएफडी की बड़ी जीत के आसार, क्या अकेले बना लेगी सरकार?
पूर्वी जर्मन राज्य सैक्सनी-अनहाल्ट में भले ही देश के कुल वोटरों में से तीन फीसदी भी ना रहते हों, लेकिन यहां के चुनावी नतीजे पूरे जर्मनी के लिए एक बड़ा संकेत हो सकते हैं;
पूर्वी जर्मन राज्य सैक्सनी-अनहाल्ट में भले ही देश के कुल वोटरों में से तीन फीसदी भी ना रहते हों, लेकिन यहां के चुनावी नतीजे पूरे जर्मनी के लिए एक बड़ा संकेत हो सकते हैं.
रविवार को जर्मनी के पूर्वी राज्य सैक्सनी-अनहाल्ट में एक ऐसे चुनाव के लिए वोटिंग शुरू हुई, जिस पर जर्मनी ही नहीं दुनियाभर की नजरें टिकी हैं. यहां 'अल्टरनेटिव फॉर जर्मनी' (एएफडी) नाम की एक धुर-दक्षिणपंथी पार्टी द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पहली बार जर्मनी में कहीं सत्ता पर काबिज होने के बेहद करीब नजर आ रही है.
पार्टी के 35 वर्षीय प्रमुख उम्मीदवार उलरिष जीगमुंड के नेतृत्व में एएफडी पिछले कई महीनों से सर्वे में सबसे आगे चल रही है. अगर राज्य की कई छोटी पार्टियां संसद में पहुंचने के लिए जरूरी पांच फीसदी वोटों का आंकड़ा नहीं छू पाती हैं, तो इस बात की पूरी संभावना है कि रविवार शाम तक एएफडी को पूर्ण बहुमत मिल जाए.
चांसलर मैर्त्स के लिए बड़ा टेस्ट
इस चुनाव को जर्मन चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स की सरकार के लिए एक लिटमस टेस्ट माना जा रहा है. चांसलर मैर्त्स ने प्रवासन और सुरक्षा जैसे मुद्दों पर सख्त रवैया अपनाकर एएफडी की बढ़ती लोकप्रियता को कम करने की कोशिश की है. हाल के सर्वे बताते हैं कि एएफडी को 40 फीसदी से थोड़ा ज्यादा समर्थन मिल रहा है, जबकि मैर्त्स की पार्टी क्रिश्चियन डेमोक्रेट्स (सीडीयू) 23 प्रतिशत के साथ दूसरे नंबर पर है. राज्य के करीब 17 लाख वोटर शाम 6 बजे तक अपने वोट डालेंगे.
कासेल यूनिवर्सिटी के राजनीति विज्ञानी वोल्फगांग श्रोएडर का कहना है, "अगर सैक्सनी-अनहाल्ट में एएफडी जीतती है, तो मैर्त्स के आलोचक और ज्यादा मुखर हो जाएंगे और बेहतर नेतृत्व की मांगों को नजरअंदाज करना नामुमकिन हो जाएगा." हालांकि, श्रोएडर यह भी मानते हैं कि मैर्त्स को पद से नहीं हटाया जाएगा, क्योंकि फिलहाल उनके सामने कोई मजबूत प्रतिद्वंद्वी नहीं है. उन्होंने कहा, "जहां तक मैं देख पा रहा हूं, चांसलर पद का कोई दूसरा विकल्प नहीं है."
एएफडी के लिए सैक्सनी-अनहाल्ट का यह चुनाव 2029 में होने वाले राष्ट्रीय चुनाव में सत्ता हासिल करने की उसकी बड़ी महत्वाकांक्षा की तरफ एक अहम कदम है. शनिवार शाम राज्य की राजधानी माग्देबुर्ग में अपनी आखिरी रैली में जीगमुंड ने पूरे आत्मविश्वास के साथ कहा, "कल के चुनाव का नतीजा चाहे जो हो, हमने पहले ही इतिहास रच दिया है."
भीड़ को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, "हमने यहां सैक्सनी-अनहाल्ट में जो शुरुआत की है, वह इस वक्त पूरे जर्मनी में फैल रही है और अब इसे रोका नहीं जा सकता." रविवार को जीगमुंड अपने होमटाउन टांगेरमुएंडे में नीले रंग के एक पुराने सिमसन मोपेड पर सवार होकर वोट डालने पहुंचे, जहां उनके समर्थकों ने उनका स्वागत किया.
हालांकि, एएफडी के सत्ता में आने की संभावनाओं ने मुख्यधारा की पार्टियों और अल्पसंख्यक समूहों की चिंता बढ़ा दी है. वोटिंग से एक दिन पहले माग्देबुर्ग में पार्टी के हजारों विरोधियों ने एक रैली भी निकाली. जर्मन इकोनॉमिक इंस्टीट्यूट ने चेतावनी दी है कि राज्य की आबादी पहले ही बूढ़ी और कम हो रही है, ऐसे में विदेशी कामगारों पर निर्भर इस राज्य के लिए एएफडी की प्रवासन नीति 'बर्बादी' लाने वाली साबित होगी.
कुछ लोगों को यह भी डर है कि अगर राज्य का सुरक्षा तंत्र एएफडी के हाथ में आ गया, तो वह रूस को खुफिया जानकारी लीक कर सकती है. थुरिंगिया राज्य के गृह मंत्री जॉर्ज मायर ने हांडेल्सब्लाट अखबार को बताया, "क्रेमलिन यह बात बिल्कुल नहीं छिपाता कि पुतिन के लिए जर्मनी को अस्थिर करने का सबसे अहम हथियार एएफडी ही है."
क्या है एएफडी का प्लान?
21 लाख की आबादी वाले इस छोटे से राज्य में अगर एएफडी जीतती है, तो उसकी योजना स्कूलों में एलजीबीटीक्यू प्राइड वाले झंडे बैन करने, बिना कागजात वाले प्रवासियों को वापस भेजने, नए पवन ऊर्जा संयंत्रों पर रोक लगाने और जर्मनी के पब्लिक ब्रॉडकास्टिंग सिस्टम से बाहर निकलने की है. हालांकि, देश की सुरक्षा एजेंसी ने इस पार्टी को 'कट्टरपंथी दक्षिणपंथी' करार दिया है.
जर्मनी की आनुपातिक चुनाव प्रणाली में किसी एक पार्टी के लिए पूर्ण बहुमत हासिल करना काफी मुश्किल होता है. अगर एएफडी पूर्ण बहुमत हासिल नहीं कर पाती है तो उसका सरकार बनाना काफी मुश्किल होगा. इसकी वजह यह है कि जर्मनी की मुख्यधारा की अन्य पार्टियां 'फायरवॉल' नीति के तहत एएफडी के साथ किसी भी तरह के गठबंधन से साफ इनकार करती हैं.
खुद जीगमुंड ने भी गठबंधन से इनकार करते हुए 45 फीसदी या उससे ज्यादा वोट पाने का लक्ष्य रखा है. उनका कहना है कि जिन मुख्यधारा के नेताओं ने पिछले 30 सालों में जर्मनी को बर्बाद किया है, उनके साथ सरकार चलाना संभव नहीं है. अगर एएफडी बहुमत से दूर रह जाती है, तो सबसे ज्यादा संभावना राज्य के मौजूदा मुख्यमंत्री स्वेन शुल्त्से के नेतृत्व में सीडीयू की सरकार बनने की है. सर्वे में शुल्त्से नेताओं की रेस में लोगों की पहली पसंद बने हुए हैं.
हालांकि, अगर नौबत गठबंधन की आई तो यह इस बात पर निर्भर करेगा कि कौन सी पार्टियां पांच फीसदी के जादुई आंकड़े को पार कर पाती हैं. पोल के मुताबिक, सीडीयू की मौजूदा सहयोगी 'फ्री डेमोक्रेटिक पार्टी' (एफडीपी) इसके नीचे रह सकती है और 'सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी' (एसपीडी) दस फीसदी से भी नीचे है. धुर-वामपंथी 'सारा वागेनक्नेष्ट अलायंस' (बीएसडब्ल्यू) इकलौती ऐसी पार्टी है जिसने एएफडी के साथ गठबंधन से इनकार नहीं किया है, लेकिन उसके भी पांच फीसदी से नीचे रहने के आसार हैं.
चूंकि सीडीयू ने वामपंथी पार्टी 'लेफ्ट पार्टी' के साथ गठबंधन से साफ इनकार किया है, ऐसे में एक विकल्प यह हो सकता है कि मुख्यमंत्री शुल्त्से के नेतृत्व में एक अल्पमत सरकार बने, जिसे लेफ्ट पार्टी का बाहर से समर्थन हासिल हो, ठीक वैसा ही मॉडल जैसा पड़ोसी राज्य थुरिंगिया में अपनाया गया था.