ओपनएआई के एजेंटों ने जर्मन वेबसाइट पर किया कब्जा, बनाया अंडरग्राउंड नेटवर्क

हाल ही में ओपनएआई के हजारों एआई एजेंटों ने इंसानी निर्देशों को ना मानते हुए एक जर्मन वेबसाइट पर कब्जा कर लिया, जिससे टेक दुनिया में एआई के खतरों को लेकर नई बहस छिड़ गई है;

Update: 2026-09-05 13:13 GMT

हाल ही में ओपनएआई के हजारों एआई एजेंटों ने इंसानी निर्देशों को ना मानते हुए एक जर्मन वेबसाइट पर कब्जा कर लिया, जिससे टेक दुनिया में एआई के खतरों को लेकर नई बहस छिड़ गई है.

ओपनएआई के हजारों ऑटोनॉमस एआई एजेंटों (ऐसे प्रोग्राम जो बिना इंसानी मदद के अपने आप काम करते हैं) ने 'डीएसईविकी' नाम की एक जर्मन वेबसाइट पर कब्जा कर लिया. कुछ रिसर्चर्स ने एक नई रिपोर्ट में यह दावा किया है. यह वेबसाइट प्रोग्रामर्स के लिए है और विकिपीडिया की तरह इसे कोई भी एडिट कर सकता है. इन एजेंटों ने वहां करीब 18,000 मैसेज भेजे. उन्होंने इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल टेस्ट के सवालों के जवाब आपस में शेयर करने और उन डिजिटल पाबंदियों से बचने के तरीके खोजने के लिए किया, जो उन्हें कंट्रोल करने के लिए बनाई गई थीं.

इस खुलासे के बाद कई सवाल खड़े हो गए हैं. इस रिसर्च से जुड़ी एक रिसर्चर सिडनी फॉन आर्क्स ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "मैंने और मेरे सह-लेखकों ने ओपनएआई के एजेंटों के एक बिल्कुल नए झुंड की खोज की है, जो वेबसाइटों को हाईजैक कर रहे हैं." उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा, "हमें लगता है कि ओपनएआई को इस बारे में पता था और उन्होंने इसे दुनिया से छिपाया."

ओपनएआई की सफाई

इन दावों पर ओपनएआई ने तुरंत कोई जवाब नहीं दिया. कंपनी का कहना है कि वे दावों का जवाब इसलिए नहीं दे पाए क्योंकि रिपोर्ट के लेखकों ने पब्लिश होने से पहले हमें अपनी रिसर्च देखने की इजाजत नहीं दी थी. ओपनएआई के एक प्रवक्ता ने बताया, "हम अब इस रिपोर्ट को ध्यान से देख रहे हैं और जो भी जरूरी कदम होंगे, वो उठाएंगे." उन्होंने यह भी कहा कि वे अपनी हालिया रिपोर्ट में इस तरह की घटनाओं का जिक्र पहले ही कर चुके हैं.

यह पहली बार नहीं है जब एआई एजेंटों ने इस तरह की घटना को अंजाम दिया हो. इसी साल जुलाई में भी एक घटना सामने आई थी जहां ओपनएआई के एजेंट जब अपना काम पूरे करने में संघर्ष कर रहे थे तब उन्होंने इंटरनेट पर शॉर्टकट ढूंढे और 'हगिंग फेस' नाम के एक मशहूर प्लेटफॉर्म के सर्वर में सेंध लगा दी, जहां प्रोग्रामर अपने एआई सॉफ्टवेयर शेयर करते हैं. एक जांच में पता चला कि ये एजेंट अपने कंट्रोल वाले माहौल से बाहर निकलने से पहले आपस में बातें कर रहे थे और उन्होंने कई बार हमला किया था.

टेक जगत में बहस हुई तेज

इस घटना के बाद टेक जगत में एआई एजेंटों पर फिर बहस शुरू हो गई है. मशहूर टेक पॉडकास्टर द्वारकेश पटेल ने इस घटना को आम लोगों की भाषा में समझाते हुए इसे एजेंट 'सभ्यताओं' का हमला बताया, जो समाज के लिए एक बड़ा खतरा है. हालांकि, जाने माने एआई रिसर्चर गैरी मार्कस ने इस पर आपत्ति जताई. उन्होंने कहा कि यह घटना कोई छोटी बात नहीं है, लेकिन इसे 'सभ्यताओं' की साजिश बताना थोड़ा ज्यादा हो जाएगा. उनका मानना है कि ऐसा नैरेटिव बनाने से लोगों का ध्यान असली सुरक्षा और गवर्नेंस की नाकामी से भटक सकता है.

इन हमलों के बाद दुनिया भर में एआई को लेकर सख्त नियम बनाने की मांग तेज हो गई है. माइक्रोसॉफ्ट के को-फाउंडर बिल गेट्स ने भी अपनी चेतावनी में कहा है कि इंडस्ट्री ने सुरक्षा की उन सभी हदों को पार कर लिया है, जिनका उसने पहले वादा किया था. उन्होंने परमाणु और विमानन सेक्टर की तरह ही एआई के लिए भी सख्त निगरानी की मांग की है.

हालांकि, अमेरिका में इन कड़े नियमों को लेकर राय बंटी हुई है. डॉनल्ड ट्रंप प्रशासन ने एआई पर इस तरह की पाबंदियों और प्रस्तावों का कड़ा विरोध किया है. उन्होंने एआई रेगुलेशन के विरोध को अपने एजेंडे का एक अहम हिस्सा बना लिया है.

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