भारत-अमेरिका का आतंकवाद के खिलाफ साझा युद्धाभ्यास
नई दिल्ली, भारत और अमेरिका की सेनाएं 'युद्ध अभ्यास 2026' के अंर्तगत अपनी आतंकवाद-रोधी क्षमताओं को परख रही हैं। उत्तराखंड के औली में दोनों देशों के जवानों ने आतंकी ठिकानों में घुसने व वहां स्थित कमरों को प्रवेश करने का विशेष अभ्यास किया।;
नई दिल्ली, भारत और अमेरिका की सेनाएं 'युद्ध अभ्यास 2026' के अंर्तगत अपनी आतंकवाद-रोधी क्षमताओं को परख रही हैं। उत्तराखंड के औली में दोनों देशों के जवानों ने आतंकी ठिकानों में घुसने व वहां स्थित कमरों को प्रवेश करने का विशेष अभ्यास किया।
यह अभ्यास ऐसी परिस्थितियों को ध्यान में रखकर किया गया, जहां सैनिकों को बेहद सीमित जगह में तेजी और समन्वय के साथ कार्रवाई करनी होती है। इस दौरान सैन्य टीमों के साथ ड्रोन, रोबोटिक डॉग, प्रशिक्षित मिलिटरी डॉग और स्नाइपर भी तैनात रहे। जवानों ने इन आधुनिक तकनीकों और विशेषज्ञ टीमों के साथ मिलकर अभियान चलाने का अभ्यास किया। अभ्यास के दौरान अमेरिकी सेना ने भारतीय सैनिकों द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे उपकरणों को समझा और जवानों से बातचीत की।
उन्होंने अभियान में अपनाई जा रही तकनीकों और विभिन्न क्षमताओं को करीब से देखा। इस दौरान दोनों सेनाओं के जवानों के बीच अनुभवों और पेशेवर जानकारी का भी आदान-प्रदान हुआ। दोनों सेनाओं के बीच हुए इस प्रशिक्षण से आतंकवाद-रोधी अभियानों में सामरिक समझ, पेशेवर आदान-प्रदान और आपसी तालमेल को और मजबूत करने में मदद मिली।
इस अभ्यास के दौरान सैन्य दलों ने इमारत को सुरक्षित करने और एक-एक कमरे की तलाशी लेने की कार्रवाई को अंजाम दिया। यहां आतंकवाद-रोधी अभियानों में आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञ सैनिकों के संयुक्त इस्तेमाल को प्रदर्शित किया गया। युद्ध अभ्यास 2026 के इस प्रशिक्षण से दोनों सेनाओं के बीच सामरिक समझ और आपसी समन्वय को और मजबूत करने में मदद मिली। अभ्यास ने आतंकवाद-रोधी अभियानों में संयुक्त रूप से काम करने की क्षमता, पेशेवर आदान-प्रदान और दोनों सेनाओं के बीच परिचालन तालमेल को बढ़ाने पर जोर दिया।
गौरतलब है कि भारत और अमेरिका की सेनाएं संयुक्त सैन्य अभ्यास कर रही हैं। खास बात यह है कि अभ्यास उत्तराखंड के ऊंचे पहाड़ी इलाके औली से लेकर राजस्थान के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज तक एक साथ चल रहा है। अभ्यास में कुल 1200 जवान शामिल हैं। इनमें भारत और अमेरिका के करीब 600-600 सैन्यकर्मी हिस्सा ले रहे हैं। इस अभ्यास में दोनों सेनाएं पहाड़ी और अर्ध-पहाड़ी इलाकों में एकीकृत युद्ध समूहों के संचालन की क्षमता को मजबूत कर रही हैं। सैनिक अलग-अलग परिस्थितियों में एक-दूसरे के साथ तालमेल बनाकर अभियान चलाने की रणनीति और तकनीक का अभ्यास कर रहे हैं।
'युद्ध अभ्यास 2026’ में आधुनिक तकनीक पर भी फोकस किया जा रहा है। सैनिक निगरानी और टोह लेने के लिए ड्रोन और स्वायत्त प्रणालियों का इस्तेमाल कर रहे हैं। दोनों सेनाओं के विशेषज्ञ उभरती सैन्य तकनीकों और बहु-क्षेत्रीय युद्धकला में हो रहे बदलावों पर भी चर्चा भी करेंगे। इस दौरान रणनीति, तकनीक और संचालन प्रक्रियाओं को साझा किया जाएगा। इससे दोनों सेनाओं के बीच आपसी तालमेल और संयुक्त अभियानों की क्षमता को और मजबूती मिलेगी।