भारत ने एफएटीएफ का किया समर्थन, टेरर फंडिंग रोकने वाली संस्था पर पाक के हमलों को किया खारिज
भारत ने अंतरराष्ट्रीय आतंक-वित्तपोषण निगरानी संस्था पर पाकिस्तान द्वारा किए गए हमलों का बचाव करते हुए कहा है कि ये आलोचनाएं “जांच के डर” से प्रेरित हैं।;
संयुक्त राष्ट्र । भारत ने अंतरराष्ट्रीय आतंक-वित्तपोषण निगरानी संस्था पर पाकिस्तान द्वारा किए गए हमलों का बचाव करते हुए कहा है कि ये आलोचनाएं “जांच के डर” से प्रेरित हैं।
भारत ने आतंकवाद के वित्तपोषण पर निगरानी रखने वाली वैश्विक संस्था फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) का मजबूती से बचाव करते हुए कहा है कि उस पर होने वाले हमले अक्सर “जांच के डर” से प्रेरित होते हैं।
भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने सोमवार को एफएटीएफ को वैश्विक आतंकवाद-रोधी वित्तपोषण और धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) ढांचे का एक “अनिवार्य स्तंभ” बताया। उन्होंने कहा, “इसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठाने की कोशिशें अक्सर वास्तविक प्रक्रिया संबंधी चिंताओं से अधिक, जांच के डर को दर्शाती हैं।”
उन्होंने कहा, “हमारा इतिहास दिखाता है कि गंभीर आतंकवादी वित्तपोषण जोखिम कभी भी अनाम रूप से सामने नहीं आए हैं। इन्हें कुछ राज्य तत्वों सहित प्रायोजित किया गया है।”
हालांकि उन्होंने किसी देश का नाम नहीं लिया, लेकिन उनका संकेत स्पष्ट रूप से पाकिस्तान की ओर माना गया, क्योंकि पाकिस्तान ने पहले एफएटीएफ पर राजनीतिक रूप से पक्षपाती होने का आरोप लगाया था, जब उसे “ग्रे सूची” में रखा गया था।
पी. हरीश संयुक्त राष्ट्र के काउंटर-टेररिज्म वीक के दौरान फ्रांस के साथ भारत द्वारा सह-आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे, जिसका विषय था- “उभरते खतरों और नई तकनीकों के संदर्भ में आतंकवाद के वित्तपोषण से निपटने के लिए संयुक्त प्रयास।”
उन्होंने कहा, “दशकों से भारत सीमा पार आतंकवाद का सामना कर रहा है और नई डिजिटल तकनीकें अब संपत्ति के प्रवाह के स्रोतों, तरीकों और माध्यमों को और अधिक जटिल बना रही हैं।”
एफएटीएफ का बचाव करते हुए उन्होंने कहा कि इसका काम “तकनीकी, साक्ष्य-आधारित और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार्य मानकों पर आधारित” है।
उन्होंने कहा, “जिन देशों की रिपोर्टिंग में कमियां पाई जाती हैं, उन्हें उन कमियों को दूर करना चाहिए, घरेलू प्रवर्तन को मजबूत करना चाहिए, वित्तीय पारदर्शिता बढ़ानी चाहिए और आतंक वित्तपोषण नेटवर्क के खिलाफ ठोस कार्रवाई दिखानी चाहिए।”
उन्होंने आगे कहा, “एफएटीएफ की जांच का जवाब संयुक्त राष्ट्र मंचों पर राजनीतिक सक्रियता नहीं बल्कि वास्तविक अनुपालन है।”
पी. हरीश ने यह भी कहा, “जो देश अपने क्षेत्र, संस्थानों या वित्तीय चैनलों का आतंकवाद के लिए दुरुपयोग होने देते हैं, उन्हें अस्थिरता का निर्यात बंद कर अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के प्रति अपने दायित्व निभाने चाहिए।”
एफएटीएफ (40 सदस्यीय संस्था) वैश्विक स्तर पर आतंकवाद वित्तपोषण और मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ कार्रवाई का नेतृत्व करती है तथा देशों की निगरानी करती है ताकि वे अवैध वित्तीय गतिविधियों के सुरक्षित ठिकाने न बनें।
भारत ने इस मंच पर अपनी भागीदारी और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ी नई डिजिटल तकनीकों के खिलाफ कदमों का भी उल्लेख किया।
उन्होंने बताया कि भारत ने वर्चुअल एसेट सर्विस प्रोवाइडर्स को अपने एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग ढांचे में शामिल किया है और केंद्रीकृत एक्सचेंजों व उपयोगकर्ताओं के लिए सत्यापन मानकों को मजबूत किया है।
पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय दबाव में एफएटीएफ की “ग्रे सूची” से बाहर आने के लिए शर्तें माननी पड़ी थीं, लेकिन वह अब भी एफएटीएफ और उसके सहयोगी एशिया/पैसिफिक ग्रुप ऑन मनी लॉन्ड्रिंग की निगरानी में है।