रायपुर/वॉशिंगटन : अमेरिका ने सूडान में चल रहे गृहयुद्ध को कथित रूप से बढ़ावा देने के आरोप में आठ व्यक्तियों और संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाए हैं। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल (OFAC) ने शुक्रवार को यह घोषणा की। इन प्रतिबंधों में एक भारतीय नागरिक और भारत से जुड़ी एक कंपनी का नाम भी शामिल है, जिसने इस मामले को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि इन संस्थाओं और व्यक्तियों ने सूडानी सशस्त्र बलों (SAF) और रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (RSF) को हथियार, विस्फोटक सामग्री और अन्य सहायता उपलब्ध कराई, जिससे देश में जारी संघर्ष और अधिक गंभीर हो गया।
भारतीय नागरिक और कंपनी पर लगे आरोप
प्रतिबंध सूची में छत्तीसगढ़ के रहने वाले आलोक चौधरी का नाम शामिल है। वे एसबीएल एनर्जी लिमिटेड (जिसे अमीन एक्सप्लोसिव प्राइवेट लिमिटेड के नाम से भी जाना जाता है) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) हैं। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के अनुसार, इस कंपनी ने सूडानी सेना से जुड़े एक हथियार भंडारण का रखरखाव करने वाली कंपनी को बड़ी मात्रा में विस्फोटक और संबंधित सामग्री की आपूर्ति की। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह आपूर्ति 200 से अधिक खेपों में की गई थी। इसके अलावा, इस सूची में सूडान और मिस्र में सक्रिय अन्य कंपनियों के नाम भी शामिल हैं, जिन पर युद्ध को बढ़ावा देने का आरोप लगाया गया है।
अमेरिकी विदेश विभाग का बयान
अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने कहा कि इन नेटवर्क्स ने सूडानी सशस्त्र बलों और रैपिड सपोर्ट फोर्सेज दोनों को हथियार, विस्फोटक और विदेशी लड़ाके उपलब्ध कराए हैं। उनके अनुसार, इन गतिविधियों ने सूडान में चल रहे संघर्ष को लंबा खींचा है और मानवीय संकट को और गंभीर बनाया है। अमेरिका का मानना है कि ऐसे नेटवर्क युद्ध को समाप्त करने के प्रयासों में बाधा डालते हैं।
कंपनी ने लगाए गए प्रतिबंधों पर उठाए सवाल
इस कार्रवाई के बाद एसबीएल एनर्जी लिमिटेड ने अमेरिकी प्रतिबंधों को लेकर आपत्ति जताई है। कंपनी के कॉर्पोरेट कार्यालय, रायपुर में मैनेजर पंकज अग्रवाल ने कहा कि कंपनी बिना किसी पूर्व सूचना के इस सूची में शामिल किए जाने से हैरान है। उन्होंने दावा किया कि एसबीएल एनर्जी लिमिटेड भारत की एक प्रमुख विस्फोटक निर्माण कंपनी है, जो पिछले 22 वर्षों से देश और विदेश में खदानों और औद्योगिक परियोजनाओं के लिए विस्फोटक सामग्री की आपूर्ति कर रही है।
कानूनी रूप से अधिकृत आपूर्ति का दावा
कंपनी प्रबंधन के अनुसार, वे केवल उन्हीं देशों को विस्फोटक सामग्री का निर्यात करते हैं, जिनके लिए भारत सरकार से आवश्यक अनुमति प्राप्त होती है। कंपनी का कहना है कि सभी निर्यात प्रक्रियाएं भारतीय कानूनों और लाइसेंसिंग नियमों के तहत की जाती हैं। मैनेजर ने यह भी कहा कि कंपनी को सरकार द्वारा थ्री-स्टार अवार्ड प्राप्त है, जो उसके उद्योग मानकों और प्रदर्शन का प्रमाण है।
'गलतफहमी का परिणाम हो सकता है मामला'
कंपनी ने आशंका जताई है कि यह पूरी कार्रवाई किसी गलतफहमी या गलत जानकारी के आधार पर की गई हो सकती है। प्रबंधन का कहना है कि एक बार उत्पाद की डिलीवरी होने के बाद उसका अंतिम उपयोग या पुनर्वितरण कंपनी के नियंत्रण में नहीं रहता। इसी आधार पर कंपनी ने इस प्रतिबंध के खिलाफ अपील करने की तैयारी शुरू कर दी है।
वैश्विक हथियार आपूर्ति नेटवर्क पर निगरानी बढ़ी
विशेषज्ञों के अनुसार, सूडान में चल रहे गृहयुद्ध ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान आकर्षित किया है। अमेरिका और अन्य पश्चिमी देश ऐसे नेटवर्क्स पर लगातार नजर रख रहे हैं, जो संघर्षरत पक्षों को हथियार और विस्फोटक सामग्री उपलब्ध कराते हैं। OFAC की यह कार्रवाई इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है, जिसका उद्देश्य युद्ध को बढ़ावा देने वाले वित्तीय और आपूर्ति नेटवर्क को कमजोर करना है।
सूडान में जारी संघर्ष और मानवीय संकट
सूडान में सेना और अर्धसैनिक रैपिड सपोर्ट फोर्सेज के बीच लंबे समय से संघर्ष जारी है। इस गृहयुद्ध ने देश में गंभीर मानवीय संकट पैदा कर दिया है, जिसमें लाखों लोग विस्थापित हुए हैं और बड़ी संख्या में नागरिक प्रभावित हुए हैं। अमेरिका का कहना है कि ऐसे नेटवर्क यदि सक्रिय रहते हैं तो शांति प्रयासों को सफलता मिलना कठिन हो जाता है।