शेख हसीना ने किया बांग्लादेश लौटने का ऐलान

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने मौत की सजा के बावजूद इस साल देश लौटने का ऐलान किया है. वह करीब दो साल से भारत में रह रही हैं.;

Update: 2026-06-29 05:28 GMT

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने मौत की सजा के बावजूद इस साल देश लौटने का ऐलान किया है. वह करीब दो साल से भारत में रह रही हैं.

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री और भगोड़ी घोषित की जा चुकी नेता शेख हसीना ने कहा है कि वह इस साल अपने देश लौटेंगी. मानवता के खिलाफ अपराधों के मामले में मौत की सजा सुनाए जाने के कई महीनों बाद उनका यह बयान आया है. 78 वर्षीय शेख हसीना अगस्त 2024 में बांग्लादेश छोड़कर भारत आ गई थीं. उस समय छात्र नेतृत्व वाले जनआंदोलन ने उनके 15 साल लंबे शासन का अंत कर दिया था. देश छोड़ने के बाद से वह सार्वजनिक रूप से बहुत कम दिखाई दी हैं. जनवरी में नई दिल्ली के एक प्रेस क्लब में प्रसारित उनके एक संबोधन को छोड़कर उनकी सार्वजनिक मौजूदगी लगभग ना के बराबर रही है.

भारतीय टीवी चैनल एनडीटीवी को दिए एक इंटरव्यू में हसीना ने कहा कि उन्हें मौत का कोई डर नहीं है. उन्होंने अपने खिलाफ दिए गए फैसले को अवैध, असंवैधानिक और राजनीतिक रूप से प्रेरित प्रक्रिया का हिस्सा बताया. हसीना ने कहा, "मेरे खिलाफ कई साजिशें रची गईं. लेकिन हर साजिश के जाल को तोड़ते हुए मैं जनता के वोट से पांच बार प्रधानमंत्री चुनी गई और देश के अभूतपूर्व विकास के लिए काम किया."

"मौत की सजा का डर नहीं"

जब उनसे पूछा गया कि क्या वह मौत की सजा के बावजूद बांग्लादेश लौटेंगी, तो उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा, "मैं साफ तौर पर कहना चाहती हूं कि हर बाधा और हर साजिश को पार करते हुए मैं इस साल अपने देश वापस लौटूंगी." पिछले साल नवंबर में ढाका की एक अदालत ने हसीना को उकसावे, हत्या के आदेश देने और अत्याचारों को रोकने में विफल रहने का दोषी ठहराया था. अदालत ने उन्हें फांसी की सजा सुनाई थी.

इस बीच उनकी पार्टी अवामी लीग की गतिविधियों पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया था. कभी देश की सबसे लोकप्रिय राजनीतिक पार्टियों में गिनी जाने वाली अवामी लीग अब कानूनी प्रतिबंधों का सामना कर रही है. भारत और बांग्लादेश के संबंधों में भी पिछले दो वर्षों के दौरान महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिले हैं. छात्र आंदोलन के बाद शेख हसीना के सत्ता से हटने और भारत पहुंचने के बाद दोनों देशों के रिश्तों में तनाव बढ़ गया था. बांग्लादेश लगातार हसीना के प्रत्यर्पण की मांग करता रहा है.

भारत-बांग्लादेश के सुधरते रिश्ते

हालांकि, फरवरी 2026 में बांग्लादेश में हुए चुनावों में प्रधानमंत्री तारिक रहमान की भारी जीत के बाद दोनों देशों के संबंधों में सुधार दर्ज किया गया. 17 करोड़ आबादी वाले दक्षिण एशियाई देश में नई सरकार बनने के बाद द्विपक्षीय संवाद फिर तेज हुआ है. इसी महीने भारत ने बांग्लादेशी नागरिकों के लिए पर्यटक वीजा फिर से जारी करने का फैसला किया है. ढाका में भारत के नए उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी ने 25 जून को बताया कि पर्यटक वीजा की प्रक्रिया 28 जून से दोबारा शुरू की जा रही है. दिनेश त्रिवेदी ने कहा, "हमें उम्मीद है कि इससे हमारे दोनों संप्रभु देशों के लोगों के बीच संबंध और मजबूत होंगे."

भारत और बांग्लादेश के बीच अगस्त 2024 के घटनाक्रम के बाद संबंधों में तनाव आ गया था. हसीना तब से भारत में रह रही हैं और बांग्लादेश कई बार उनके प्रत्यर्पण की मांग कर चुका है. तारिक रहमान के चुनाव जीतने के बाद दोनों देशों के संबंधों में कुछ सुधार हुआ. इसके बाद भारत ने इलाज के लिए वीजा जारी करना फिर शुरू किया और अब पर्यटक वीजा भी बहाल किए जा रहे हैं.

भारत और बांग्लादेश के बीच 4,096 किलोमीटर लंबी स्थलीय सीमा है. दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामाजिक संबंध लंबे समय से रहे हैं. हालांकि कुछ मुद्दों पर मतभेद अब भी बने हुए हैं. इनमें सीमा पार अवैध प्रवासन का मुद्दा प्रमुख है. भारत जिन लोगों को अवैध प्रवासी मानता है, सीमा पार बांग्लादेश भेजता रहा है. इस बात पर दोनों मुल्कों में तनावभी रहता है. ऐसे समय में शेख हसीना का अपने देश लौटने का सार्वजनिक संकल्प और भारत का पर्यटक वीजा बहाल करने की घोषणा, दोनों घटनाएं दक्षिण एशिया की राजनीति और भारत-बांग्लादेश संबंधों के संदर्भ में महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं.

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