27 सितंबर को इमरान खान का दल करेगा विरोध-प्रदर्शन: पाकिस्तान
इस्लामाबाद, पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) की ओर से 27 सितंबर को प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन एक बार फिर पाकिस्तान की उस गहरी राजनीतिक कमजोरी को सामने ला सकता है।;
इस्लामाबाद, पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) की ओर से 27 सितंबर को प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन एक बार फिर पाकिस्तान की उस गहरी राजनीतिक कमजोरी को सामने ला सकता है, जिसमें निर्वाचित सरकारों और सैन्य प्रतिष्ठान के बीच सत्ता के संतुलन का सवाल अब भी बना हुआ है। एक रिपोर्ट में यह बात कही गई है।
पीटीआई ने अपने संस्थापक और जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की रिहाई तथा संवैधानिक व्यवस्था की रक्षा की मांग को लेकर प्रदर्शन का ऐलान किया है। दल दावा कर रहा है कि सत्ता की कलई खोल कर रख देगा। सरकार कितनी खौफजदा है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पूर्व पीएम की बहनों को 30 दिन की हिरासत में रख लिया गया है।
सामाजिक नीति विशेषज्ञ क्रिसौला एस्टरियाडू ने प्रेसेंजा इंटरनेशनल प्रेस एजेंसी में प्रकाशित एक लेख में कहा कि 1977 के सैन्य तख्तापलट के करीब पांच दशक बाद भी पाकिस्तान इस बुनियादी सवाल का समाधान नहीं ढूंढ पाया है कि अंतिम राजनीतिक शक्ति किसके पास होनी चाहिए। ये चुनावों के जरिए वैधता हासिल करने वाली राजनीतिक संस्थाओं के पास होनी चाहिए या सैन्य प्रतिष्ठान के पास, जिसका प्रभाव उसके संवैधानिक रक्षा दायरे से आगे तक रहा है।
इमरान खान का राजनीतिक मामला इस विरोधाभास को एक बार फिर पाकिस्तान की राजनीति के केंद्र में ले आया है। हालांकि, उनके राजनीतिक सफर में भी ऐसे विरोधाभास रहे हैं, जिनकी वह अब आलोचना करते हैं।
2018 में इमरान खान के प्रधानमंत्री बनने के बाद उनके राजनीतिक उभार को लेकर विश्लेषकों और राजनीतिक विरोधियों ने दावा किया था कि उन्हें सैन्य प्रतिष्ठान का समर्थन हासिल था। खान और उनकी पार्टी पीटीआई ने इन आरोपों को खारिज किया था। इमरान खान के नेतृत्व वाली सरकार को पत्रकारों और मीडिया संस्थानों पर दबाव, साइबर अपराध कानूनों के इस्तेमाल और सरकार की आलोचना करने वाली आवाजों को कथित तौर पर डराने-धमकाने को लेकर भी आलोचना का सामना करना पड़ा था।
बाद में इमरान खान और सैन्य नेतृत्व के बीच संबंध बिगड़ गए। हालांकि, रिपोर्ट के अनुसार, इससे उनके राजनीतिक उभार से जुड़ा पिछला इतिहास खत्म नहीं हो जाता। बल्कि यह पाकिस्तान की उस राजनीतिक व्यवस्था को उजागर करता है, जिसमें नागरिक और सैन्य अभिजात वर्ग अपने हितों के मेल के दौरान साथ रहे हैं और सत्ता का संतुलन बदलने पर उनके बीच टकराव भी हुआ है।
रिपोर्ट में कहा गया कि इनमें से कोई भी बात इमरान खान के अधिकारों के किसी उल्लंघन को सही नहीं ठहराती और न ही उनकी लंबे समय से जारी हिरासत की वैधता तथा परिस्थितियों से जुड़े सवालों को अप्रासंगिक बनाती है। हालांकि, पाकिस्तान के मौजूदा संकट को केवल एक लोकतांत्रिक राजनेता और एक सैन्य जनरल के बीच टकराव के रूप में देखना भी पर्याप्त नहीं होगा।
रिपोर्ट के मुताबिक, खान का मामला ऐसी राजनीतिक व्यवस्था का लक्षण है, जिसमें निर्वाचित सत्ता और सैन्य प्रतिष्ठान के बीच संबंध लंबे समय से अस्थिर रहे हैं।
पाकिस्तान के मौजूदा सेना प्रमुख असीम मुनीर के कार्यकाल में यह मुद्दा और महत्वपूर्ण हो गया है। सैन्य संस्थान की भूमिका को मजबूत करने वाले कई बदलाव हाल के वर्षों में हुए हैं। मई 2025 में पाकिस्तान सरकार ने मुनीर को फील्ड मार्शल के पद पर पदोन्नत किया था। वह अयूब खान के बाद पाकिस्तान के इतिहास में यह पद हासिल करने वाले दूसरे सैन्य अधिकारी बने।
इसके बाद नवंबर 2025 में पाकिस्तान ने 27वें संविधान संशोधन के जरिए सैन्य कमान की संरचना में बदलाव किया और चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज का पद बनाया। मुनीर को सेना प्रमुख के पद के साथ यह जिम्मेदारी भी दी गई।
इस बीच 27 सितंबर को होने वाले PTI के प्रदर्शन से पहले इमरान खान की बहनों उजमा खान, नोरीन नियाजी और अलीमा खान को हिरासत में लिए जाने की खबर है। पाकिस्तान के अखबार डॉन के अनुसार, लाहौर के डिप्टी कमिश्नर के आदेश के बाद उजमा खान और नोरीन नियाजी को 30 दिनों के लिए हिरासत में लिया गया है।
लाहौर डीसी कार्यालय ने पंजाब मेंटेनेंस ऑफ पब्लिक ऑर्डर ऑर्डिनेंस, 1960 के तहत उनकी हिरासत का आदेश दिया। आदेश में उन्हें सार्वजनिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के लिए प्रतिकूल बताया गया। अलीमा खान को भी रविवार को इसी तरह के आदेश के तहत 30 दिनों के लिए हिरासत में लिया गया।
पीटीआई नेताओं ने 13 सितंबर को कहा था कि पार्टी 27 सितंबर को प्रदर्शन और लॉन्ग मार्च केवल इमरान खान की रिहाई की मांग को लेकर नहीं, बल्कि लोकतंत्र बहाल करने, संविधान की सर्वोच्चता और कानून के शासन को सुनिश्चित करने के लिए भी आयोजित करेगी।
पार्टी नेताओं हारिस तौरो, शाहिद अनवर, रियाजुर रहमान, इंसाफ लॉयर्स फोरम के अध्यक्ष अधिवक्ता सज्जाद अहमद, बख्तशाद खान और अन्य ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में पाकिस्तान के गंभीर राजनीतिक और आर्थिक संकट का जिक्र किया था।
उन्होंने दावा किया कि सत्तारूढ़ अभिजात वर्ग के कुछ सदस्यों ने भी स्वीकार किया है कि मौजूदा व्यवस्था विफल हो चुकी है और पाकिस्तान गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है।
इमरान खान को राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बताते हुए पीटीआई ने दावा किया कि वह पाकिस्तान को मौजूदा संकट से बाहर निकालने में सक्षम हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि देश की संवैधानिक और कानूनी संस्थाएं कमजोर हुई हैं तथा चुनावी प्रक्रिया को नुकसान पहुंचाया गया है।