पश्चिम एशिया तनाव से फिर उछला कच्चा तेल
नई दिल्ली, पश्चिम एशिया में एक बार फिर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में मंगलवार को शुरुआती कारोबार में तेजी दर्ज की गई।;
नई दिल्ली, पश्चिम एशिया में एक बार फिर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में मंगलवार को शुरुआती कारोबार में तेजी दर्ज की गई। यह तेजी ऐसे समय आई है जब अमेरिकी सेना ने ईरान के केशम द्वीप पर कार्रवाई की है, जिससे क्षेत्रीय संघर्ष के और गहराने तथा ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने की आशंकाएं बढ़ गई हैं।
अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 2.23 प्रतिशत बढ़कर 107.21 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। वहीं अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड 2.15 प्रतिशत की बढ़त के साथ 98.62 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखाई दिया।
कीमतों में यह उछाल ऐसे समय आया है जब पिछले कारोबारी सत्र में तेल बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई थी। सोमवार को ब्रेंट क्रूड 8.66 डॉलर या 7.6 प्रतिशत टूटकर 104.77 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ था।
अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से आई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि अमेरिकी सेना ने केशम द्वीप को निशाना बनाया। कुछ अधिकारियों ने इस अभियान को रक्षात्मक कार्रवाई बताया है, जिसका उद्देश्य ईरान की उस क्षमता को सीमित करना है जिसके जरिए वह होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों के लिए खतरा पैदा कर सकता है।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि इस घटनाक्रम के बाद निवेशकों ने कच्चे तेल की कीमतों में फिर से "जियोपॉलिटिकल रिस्क प्रीमियम" जोड़ना शुरू कर दिया है। इससे संकेत मिलता है कि बाजार आपूर्ति बाधित होने के जोखिम को अधिक गंभीरता से देखने लगा है।
हालांकि तनाव के बीच कूटनीतिक प्रयास भी जारी हैं। ईरान ने कहा है कि संघर्ष समाप्त करने के उद्देश्य से वॉशिंगटन के साथ बातचीत जारी है। हालांकि कतर की मध्यस्थता में हाल में हुई वार्ताएं किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकीं, भले ही ईरान ने संशोधित प्रस्ताव पेश किए हों।
इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी संकेत दिया है कि तेहरान के साथ समझौते की संभावना अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। उन्होंने संभावित सैन्य कार्रवाई को लेकर अनिश्चितता जताते हुए कहा कि वार्ता का रास्ता अब भी खुला है।
फरवरी के आखिर में शुरू हुए इस संघर्ष का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर लगातार पड़ रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य, जहां से सामान्य परिस्थितियों में दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का परिवहन होता है, संघर्ष के कारण काफी प्रभावित हुआ है। इस वजह से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं लगातार बनी हुई हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार लंबे समय तक जारी व्यवधान ने ईंधन कीमतों को ऊंचे स्तर पर बनाए रखा है। इसका असर उपभोक्ताओं और सरकारों दोनों पर पड़ रहा है, खासकर अमेरिका में जहां पेट्रोल की कीमतें एक महत्वपूर्ण राजनीतिक और आर्थिक मुद्दा बनी हुई हैं।
अक्टूबर में ब्रेंट क्रूड छह महीने के उच्चतम स्तर पर बंद हुआ था। बाजार को आशंका है कि अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के बाद पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ सकता है, जिससे तेल कीमतों में फिर तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
एक अन्य महत्वपूर्ण घटनाक्रम में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने कहा कि सर्वोच्च नेता आयतुल्ला मोजतबा खामेनेई ने शांति वार्ताओं को आगे बढ़ाने के लिए सरकार को कुछ अतिरिक्त अधिकार सौंपे हैं। इससे संकेत मिलता है कि सैन्य तनाव के साथ-साथ कूटनीतिक समाधान की कोशिशें भी जारी हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया की घटनाएं, अमेरिकी राजनीतिक घटनाक्रम और होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन स्थिति वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएंगी।