अमेरिकी चुनाव नतीजों के बाद गिरा कच्चा तेल का दाम

नई दिल्ली, वैश्विक कच्चे तेल बाजार में गुरुवार को लगातार चौथे कारोबारी सत्र में गिरावट दर्ज की गई। ब्रेंट क्रूड 94 डॉलर प्रति बैरल से नीचे फिसल गया, जबकि अमेरिकी डब्ल्यूटीआई भी 87 डॉलर प्रति बैरल के नीचे पहुंच गया। अमेरिकी मिडटर्म चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी की बड़ी जीत और ईरान के साथ संभावित तनाव कम होने की उम्मीदों ने तेल की कीमतों पर भारी दबाव डाला है।;

By :  IANS
Update: 2026-11-05 05:50 GMT

नई दिल्ली, वैश्विक कच्चे तेल बाजार में गुरुवार को लगातार चौथे कारोबारी सत्र में गिरावट दर्ज की गई। ब्रेंट क्रूड 94 डॉलर प्रति बैरल से नीचे फिसल गया, जबकि अमेरिकी डब्ल्यूटीआई भी 87 डॉलर प्रति बैरल के नीचे पहुंच गया। अमेरिकी मिडटर्म चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी की बड़ी जीत और ईरान के साथ संभावित तनाव कम होने की उम्मीदों ने तेल की कीमतों पर भारी दबाव डाला है।

बाजार में सबसे बड़ी चिंता रहे पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक जोखिमों का असर अब कम होता दिखाई दे रहा है। निवेशकों का मानना है कि अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों में डेमोक्रेटिक बढ़त के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए ईरान के खिलाफ आक्रामक सैन्य रुख अपनाना पहले की तुलना में अधिक कठिन हो सकता है। इससे कूटनीतिक समाधान की उम्मीद बढ़ी है और तेल बाजार में जोखिम प्रीमियम कम हुआ है।

गुरुवार को ब्रेंट क्रूड करीब 1 प्रतिशत गिरकर 93.65 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड 1.36 प्रतिशत टूटकर 86.92 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा। इससे पहले दोनों बेंचमार्क बुधवार को 8 प्रतिशत से अधिक टूटे थे और अगस्त के अंत के बाद के सबसे निचले स्तर पर बंद हुए थे।

इस सप्ताह अब तक कच्चे तेल की कीमतों में करीब 16 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी है, जो हाल के वर्षों की सबसे तेज साप्ताहिक गिरावटों में से एक मानी जा रही है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, खाड़ी देशों के सरकारी हलकों से जुड़े सूत्रों का मानना है कि ईरान पर बड़े पैमाने के सैन्य हमले की संभावना अब पहले की तुलना में कम हो गई है। वहीं राष्ट्रपति ट्रंप ने भी संकेत दिया है कि फिलहाल अमेरिका की ओर से ईरान पर तत्काल हमला करने की कोई योजना नहीं है।

इसके साथ ही उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी युद्ध की उपयोगिता पर सवाल उठाए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी नतीजों के बाद अमेरिकी प्रशासन पर कूटनीतिक समाधान खोजने का दबाव बढ़ सकता है। इसी उम्मीद ने बाजार में भारी बिकवाली को जन्म दिया।

कच्चे तेल की आपूर्ति स्थिति में भी सुधार के संकेत मिले हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति लगभग युद्ध-पूर्व स्तरों के करीब पहुंचने लगी है। इससे वैश्विक बाजार में आपूर्ति को लेकर चिंताएं कम हुई हैं।

रिपोर्ट्स के अनुसार, खाड़ी क्षेत्र से तेल आपूर्ति बहाल होने के बाद वैश्विक तेल बाजार एक बार फिर अधिशेष (सरप्लस) की स्थिति में पहुंच रहा है। बैंक का अनुमान है कि सितंबर में वैश्विक बाजार में प्रतिदिन लगभग 11 लाख बैरल और अक्टूबर में 14 लाख बैरल अतिरिक्त आपूर्ति रही।

हालांकि ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा गिरावट को स्थायी मान लेना जल्दबाजी होगी। उनका कहना है कि भू-राजनीतिक हालात तेजी से बदल सकते हैं और अमेरिकी कांग्रेस की नई संरचना जनवरी से प्रभावी होगी, इसलिए तत्काल नीति परिवर्तन की उम्मीद नहीं करनी चाहिए।

इसके अलावा, प्रमुख उपभोक्ता देशों में वाणिज्यिक तेल भंडार पिछले 15 वर्षों के निचले स्तर के करीब हैं। अमेरिका में भी पिछले सप्ताह कच्चे तेल, पेट्रोल और डिस्टिलेट के भंडार घटे हैं, जबकि मांग एक वर्ष के उच्च स्तर पर पहुंची है। ऐसे में कीमतों में तेज गिरावट लंबे समय तक बनी रहेगी, इस पर अभी निश्चित रूप से कुछ नहीं कहा जा सकता।

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