पश्चिम बंगाल में कांग्रेस के कई जिला नेता सीट बंटवारे के खिलाफ, अकेले लड़ना चाहते हैं विधानसभा चुनाव
पश्चिम बंगाल में कांग्रेस के ज्यादातर जिला स्तर के नेता 2026 के विधानसभा चुनाव में किसी भी पार्टी के साथ सीट-बंटवारे की योजना के खिलाफ हैं। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों ने बुधवार को यह जानकारी दी।
कोलकाता। पश्चिम बंगाल में कांग्रेस के ज्यादातर जिला स्तर के नेता 2026 के विधानसभा चुनाव में किसी भी पार्टी के साथ सीट-बंटवारे की योजना के खिलाफ हैं। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों ने बुधवार को यह जानकारी दी।
सूत्रों के मुताबिक, पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने हाल ही में जिला नेताओं से गठबंधन और सीट बंटवारे पर राय मांगी थी। ज्यादातर नेताओं ने कहा कि पार्टी को कुछ सीटें जीतने के लिए सहयोगियों पर निर्भर रहने की बजाय, चुनाव अकेले ही लड़ना चाहिए।
जिला नेताओं से विशेष रूप से सीपीआई (एम) नेतृत्व वाले वाम मोर्चा, तृणमूल कांग्रेस, एआईएसएफ और निलंबित तृणमूल कांग्रेस विधायक हुमायूं कबीर की जनता उन्नयन पार्टी के साथ गठबंधन और सीट शेयरिंग पर राय मांगी गई थी।
सूत्रों ने कहा कि केवल दो जिलों के नेता ही वाम मोर्चा के साथ गठबंधन को जारी रखने के पक्ष में थे। किसी भी जिला नेता ने तृणमूल कांग्रेस के साथ किसी समझौते का समर्थन नहीं किया।
वैसे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल महासचिव अभिषेक बनर्जी पहले ही कांग्रेस के साथ किसी भी समझौते से इनकार कर चुके हैं। वहीं वाम मोर्चा के कुछ घटक दलों की आपत्तियों के बावजूद, सीपीआई (एम) नेतृत्व ने कांग्रेस के साथ सीट बंटवारे का विकल्प खुला रखा है।
महिला एवं बाल विकास समिति के एक अंदरूनी सूत्र ने बताया कि सीट बंटवारे पर अंतिम फैसला पार्टी की उच्च कमान या अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी करेगी। राज्य नेतृत्व ने केवल जिला स्तर पर प्रतिक्रिया एकत्र की है और अब इसे अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी को भेजा जाएगा।
राजनीतिक विश्लेषक कहते हैं कि 2026 के विधानसभा चुनाव में सुचारू सीट बंटवारे की योजना शुरू से ही मुश्किल लग रही थी। 2016 से वाम मोर्चा-कांग्रेस के समझौते के पीछे मुख्य नेता स्व. सीताराम येचुरी और अधीर रंजन चौधरी थे। येचुरी के निधन के बाद और अधीर रंजन की भूमिका सीमित होने के कारण अब गठबंधन की बातचीत अधर में लटक सकती है।