बंगाल में मतदान से ठीक पहले कांग्रेस को झटका, मगराहट पश्चिम में उम्मीदवार का TMC में शामिल होना बना चर्चा का विषय

चुनाव प्रचार के अंतिम दिन इस तरह का घटनाक्रम सामने आने से सभी राजनीतिक दलों के बीच चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। हालदार के कांग्रेस छोड़ने और TMC उम्मीदवार समीम अहमद का समर्थन करने से मुकाबला अब और दिलचस्प हो गया है।;

Update: 2026-04-27 12:22 GMT

कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे और अंतिम चरण से ठीक पहले सियासी माहौल अचानक गर्म हो गया है। 29 अप्रैल को होने वाले मतदान से पहले दक्षिण 24 परगना जिले की मगराहट पश्चिम (सीट नंबर 142) में एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। कांग्रेस के उम्मीदवार अब्दुल मजीद हालदार ने आखिरी समय में पार्टी छोड़कर तृणमूल कांग्रेस (TMC) का दामन थाम लिया है। इस अप्रत्याशित कदम ने न सिर्फ स्थानीय राजनीति में हलचल मचा दी है, बल्कि पूरे राज्य में इस सीट को चर्चा का केंद्र बना दिया है।

प्रचार खत्म, लेकिन सियासी हलचल तेज

चुनाव प्रचार के अंतिम दिन इस तरह का घटनाक्रम सामने आने से सभी राजनीतिक दलों के बीच चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। हालदार के कांग्रेस छोड़ने और TMC उम्मीदवार समीम अहमद का समर्थन करने से मुकाबला अब और दिलचस्प हो गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बदलाव का असर सीधे तौर पर चुनावी समीकरणों पर पड़ सकता है, खासकर ऐसे समय में जब मतदान में सिर्फ कुछ ही घंटे बाकी हैं।

कांग्रेस में मजबूत पकड़, फिर भी असंतोष

अब्दुल मजीद हालदार लंबे समय से कांग्रेस से जुड़े रहे हैं और संगठन में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती थी। वह मगराहट पश्चिम ब्लॉक कांग्रेस के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। इसके अलावा, वह सुंदरबन जिला कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर मनोरंजन हालदार और मौजूदा जिला अध्यक्ष मुक्तार अहमद के करीबी माने जाते हैं। इसके बावजूद, पार्टी के भीतर उनकी स्थिति को लेकर पिछले कुछ समय से सवाल उठ रहे थे। खासतौर पर पंचायत चुनाव के बाद उनके प्रति असंतोष बढ़ने लगा था।

पंचायत चुनाव के बाद बदली स्थिति

पंचायत चुनावों में हालदार ने उत्तर कुसुम क्षेत्र से स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें तृणमूल कांग्रेस के प्रत्याशी से हार का सामना करना पड़ा। इस हार के बाद उन्हें ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष बनाया गया, लेकिन पार्टी के कई पुराने कार्यकर्ताओं ने उनके नेतृत्व को स्वीकार नहीं किया। संगठन के भीतर असहमति और असंतोष का माहौल धीरे-धीरे बढ़ता गया।

टिकट मिलने पर भी उठे थे सवाल

विधानसभा चुनाव के लिए हालदार को टिकट दिए जाने के बाद भी पार्टी के भीतर सवाल उठे थे। कई कार्यकर्ताओं और नेताओं का मानना था कि ऐसे महत्वपूर्ण चुनाव में उन्हें उम्मीदवार बनाना सही फैसला नहीं था। हालांकि, शीर्ष नेतृत्व के समर्थन के चलते उन्हें टिकट दिया गया, लेकिन अंदरूनी विरोध खत्म नहीं हुआ।

TMC से पारिवारिक जुड़ाव बना चर्चा का कारण

हालदार के तृणमूल कांग्रेस में शामिल होने के पीछे उनके पारिवारिक संबंधों को भी एक अहम वजह माना जा रहा है। उनके भाई उत्तरी कुसुम क्षेत्र में TMC के सक्रिय नेता और पंचायत सदस्य हैं। इसी कारण पहले से ही यह अटकलें लगाई जा रही थीं कि हालदार पर पार्टी बदलने का दबाव हो सकता है। अब उनके इस कदम के बाद इन अटकलों को और बल मिल गया है।

समर्थकों के साथ बदला पाला

अब्दुल मजीद हालदार अकेले नहीं, बल्कि अपने कुछ करीबी समर्थकों के साथ तृणमूल कांग्रेस में शामिल हुए हैं। इससे स्थानीय स्तर पर कांग्रेस को नुकसान होने की संभावना जताई जा रही है। TMC नेतृत्व इस घटनाक्रम को अपनी राजनीतिक मजबूती के रूप में पेश कर रहा है और इसे चुनाव से पहले मिली बड़ी सफलता मान रहा है।

कांग्रेस ने किया असर को कमतर

वहीं कांग्रेस नेतृत्व इस पूरे घटनाक्रम को ज्यादा महत्व देने से बचता नजर आ रहा है। स्थानीय नेताओं का कहना है कि एक व्यक्ति के जाने से पार्टी संगठन पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा। उनका दावा है कि पार्टी के कार्यकर्ता और समर्थक पूरी तरह संगठित हैं और चुनाव परिणाम पर इसका ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ेगा।

मुकाबला हुआ और दिलचस्प

मगराहट पश्चिम सीट पर यह घटनाक्रम चुनावी मुकाबले को और रोचक बना चुका है। मतदान से ठीक पहले हुए इस दल-बदल ने यह साफ कर दिया है कि पश्चिम बंगाल की राजनीति में अंतिम समय तक समीकरण बदल सकते हैं। अब सबकी नजर 29 अप्रैल को होने वाले मतदान और उसके बाद आने वाले नतीजों पर टिकी है, जो यह तय करेंगे कि इस राजनीतिक उलटफेर का असली असर क्या रहा।

Tags:    

Similar News