कोलकाताः पश्चिम बंगाल विधानसभा में पार्टी के भीतर उभरे संकट के बाद अब तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को संसद में भी संभावित असंतोष की खबरों का सामना करना पड़ रहा है। राजनीतिक गलियारों में ऐसी चर्चाएं तेज हैं कि लोकसभा में पार्टी के कुछ सांसद अलग गुट बनाने की कोशिश कर सकते हैं। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन लगातार सामने आ रही अटकलों ने टीएमसी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है। सूत्रों के मुताबिक, कुछ सांसदों के बीच अलग राजनीतिक मंच बनाने को लेकर बातचीत चल रही है और वरिष्ठ सांसद काकली घोष दस्तीदार का नाम संभावित नेतृत्व के रूप में लिया जा रहा है। यदि बड़ी संख्या में सांसद एक साथ अलग होते हैं, तो दल-बदल कानून के प्रावधानों को लेकर भी नई बहस खड़ी हो सकती है।
ममता ने अभिषेक बनर्जी को भेजा दिल्ली
संसद में संभावित असंतोष की चर्चाओं के बीच मुख्यमंत्री और टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी को दिल्ली भेजा है। माना जा रहा है कि उनका दौरा पार्टी सांसदों के साथ बातचीत और संगठनात्मक स्थिति का आकलन करने के उद्देश्य से है। हालांकि, पार्टी के कुछ नेताओं का कहना है कि उन्हें इस संबंध में किसी विशेष बैठक की जानकारी नहीं है। एक सांसद ने नाम सार्वजनिक न करने की शर्त पर कहा कि उन्हें यह नहीं मालूम कि अभिषेक बनर्जी का दिल्ली दौरा किस मकसद से किया जा रहा है और इस बारे में पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक सूचना नहीं दी गई है।
दिल्ली दौरे को लेकर भी लग रहे कयास
अभिषेक बनर्जी का दिल्ली दौरा ऐसे समय में हुआ है, जब उन्हें हस्ताक्षर जालसाजी से जुड़े एक मामले में आठ जून को कोलकाता के भवानी भवन स्थित सीआईडी कार्यालय में पेश होना है। बताया जा रहा है कि उन्होंने पूछताछ के लिए अतिरिक्त समय की मांग की थी, लेकिन जांच एजेंसी ने इसे स्वीकार नहीं किया और तय समय पर पेश होने का निर्देश दिया। इसी वजह से राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि उनका दिल्ली दौरा कानूनी मामलों से जुड़ी परिस्थितियों के बीच हुआ है। हालांकि, इस संबंध में पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
बागी नेताओं के दावों से बढ़ी सियासी सरगर्मी
टीएमसी के असंतुष्ट नेताओं की ओर से भी लगातार बयान सामने आ रहे हैं। पार्टी के बागी विधायक और विधानसभा में नए विधायी समूह के उपनेता संदीपन साहा ने दावा किया है कि संसद में भी वही स्थिति बन रही है, जैसी हाल में विधानसभा में देखने को मिली थी। उनके अनुसार, पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ने के पीछे नेतृत्व शैली को लेकर नाराजगी एक बड़ा कारण है। लोकसभा में फिलहाल टीएमसी के 28 सांसद हैं, जबकि राज्यसभा में पार्टी के 13 सदस्य हैं। ऐसे में यदि किसी प्रकार का विभाजन होता है, तो दल-बदल कानून के तहत आवश्यक संख्या को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं।
सांसदों से संपर्क की खबरें, लेकिन पार्टी ने किया खंडन
सूत्रों के अनुसार, कुछ असंतुष्ट नेता पिछले कुछ दिनों से लोकसभा और राज्यसभा के सांसदों से संपर्क साध रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि फोन कॉल और व्यक्तिगत बातचीत के माध्यम से समर्थन जुटाने की कोशिशें की जा रही हैं। वहीं, राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय ने हाल ही में सार्वजनिक रूप से कहा था कि उन्होंने इतने कम समय में बड़ी संख्या में विधायकों के पार्टी छोड़ने जैसी स्थिति पहले कभी नहीं देखी थी। उनके बयान के बाद संसद में भी संभावित असंतोष की चर्चाएं और तेज हो गईं।
टीएमसी नेतृत्व ने दावों को बताया अतिरंजित
दूसरी ओर, वरिष्ठ टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने पार्टी में टूट की खबरों को पूरी तरह खारिज किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दल टीएमसी को कमजोर करने के लिए इस तरह की चर्चाओं को हवा दे रहे हैं। उनके मुताबिक, पार्टी नेतृत्व पहले भी कई राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर चुका है और इस बार भी संगठन एकजुट रहेगा। मता बनर्जी के करीबी नेताओं का कहना है कि अधिकांश सांसद पार्टी नेतृत्व के साथ मजबूती से खड़े हैं और बगावत की खबरों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है। बावजूद इसके, हालिया घटनाक्रम ने यह साफ कर दिया है कि तृणमूल कांग्रेस के सामने अपने संसदीय दल की एकजुटता बनाए रखना आने वाले दिनों में बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।