जेन-जी के सड़कों पर आने से सरकार खामोश; पहले सांसदों के खरीद-बिक्री की दुकान खोल रखी थी : शत्रुघ्न सिन्हा
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने केंद्र सरकार और विपक्षी सांसदों के दलबदल पर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि देश की युवा पीढ़ी और जेन-जी के सड़कों पर उतरने से सत्ताधारी पार्टी खामोश हो गई है;
आसनसोल। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने केंद्र सरकार और विपक्षी सांसदों के दलबदल पर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि देश की युवा पीढ़ी और जेन-जी के सड़कों पर उतरने से सत्ताधारी पार्टी खामोश हो गई है। साथ ही उन्होंने टीएमसी के बागी नेताओं के एनसीपी में शामिल होने को लेकर भी कहा कि "कुछ तो मजबूरियां रही होंगी, यूं ही कोई बेवफा नहीं होता।"
शत्रुघ्न सिन्हा ने आसनसोल में पत्रकारों से कहा, "हमारी युवा पीढ़ी, हमारे छात्र और जेन-जी इस तरह आगे आए कि ऐसा लगा मानो वे पूरी तरह खामोश हो गए हों। संसद एक मिनट के लिए भी नहीं चल रही है। सरकार ने सांसदों के खरीद-बिक्री की दुकान खोल दी थी। सत्ताधारी पार्टी के लोगों ने बहुत कोशिश की थी।"
उन्होंने दल बदलने वाले नेताओं पर सवाल उठाते हुए कहा, "जो लोग अचानक दूसरी तरफ चले गए हैं,और जिस तरह से वे गए हैं, वे देश की सेवा करने या मातृभूमि की सेवा करने के लिए वहां नहीं गए हैं। ऐसा नहीं है कि उन्हें अचानक एहसास हुआ कि वे वहां देश की बेहतर सेवा कर सकते हैं, या वे ऐसा सिर्फ भाजपा में हमारे दोस्तों के जरिए ही कर सकते हैं। यह बात समझ से परे है। वे किस नीयत से गए हैं, वह सोचने वाली बात है। जो अभी दीदी के साथ हैं, वह बहुत अच्छे लोग हैं। ऐसे में जो टिके हुए हैं, वह जबरदस्त हैं। महाराष्ट्र में शिवसेना के साथ भी ऐसा ही हुआ।"
टीएमसी के एक बागी सांसद के एनसीपी में शामिल होने पर शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा, "मेरी निजी राय में आपके साथ कितने लोग हैं, यह उतना मायने नहीं रखता। जो लोग आपका समर्थन कर रहे हैं, वे ज्यादा महत्वपूर्ण हैं। जो लोग आपको छोड़कर चले गए, जब वे इस तरह से गए, तो कभी-कभी लगता है कि अच्छा हुआ कि वे इसी समय चले गए।"
उन्होंने कहा, "वे 21 तारीख को होने वाले 'शहीद दिवस' से पहले ही चले गए। अगर वे बाद में जाते, तो स्थिति और भी मुश्किल होती। अगर ममता बनर्जी को कुछ राहत मिलती और उसके बाद वह जाते तो क्या होता।"
शत्रुघ्न सिन्हा ने बागी नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा, "सभी दीदी के बनाए हुए लोग हैं। वे दीदी का गुणगान और अभिषेक बनर्जी की जय-जयकार करते थे। उसके बाद वही लोग अचानक अभिषेक बनर्जी पर ठीकरा फोड़कर पार्टी छोड़ दिए। क्या वह पैसे या डर के लालच में गए? कुछ तो मजबूरियां रही होंगी, यूं ही कोई बेवफा नहीं होता।"