डिविजनल रेलवे अस्पताल मालदा में विश्व कुष्ठ रोग दिवस 2026 मनाया, थीम 'कलंक असली चुनौती' पर जोर
डिविजनल रेलवे अस्पताल, मालदा में विश्व कुष्ठ रोग दिवस 2026 धूमधाम से मनाया गया। यह कार्यक्रम डीआरएम/मालदा मनीष कुमार गुप्ता के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया
मालदा। डिविजनल रेलवे अस्पताल, मालदा में शनिवार को विश्व कुष्ठ रोग दिवस 2026 धूमधाम से मनाया गया। यह कार्यक्रम डीआरएम/मालदा मनीष कुमार गुप्ता के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया, जिसकी वैश्विक थीम 'कुष्ठ रोग ठीक हो सकता है, असली चुनौती कलंक है' थी।
इस थीम के अनुरूप कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य कुष्ठ रोग (हैंसेन रोग) के बारे में जागरूकता फैलाना, शुरुआती पहचान और समय पर इलाज के महत्व को रेखांकित करना और बीमारी से जुड़े गहरे सामाजिक कलंक को दूर करना था। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रो. (डॉ.) आर. एन. भट्टाचार्य, एचओडी, प्लास्टिक एंड रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी विभाग, आरजी कर मेडिकल कॉलेज, कोलकाता ने विशेषज्ञ व्याख्यान दिया।
22 वर्षों से कुष्ठ रोग से प्रभावित मरीजों की रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी में समर्पित कार्य कर रहे डॉ. भट्टाचार्य ने भारत में कुष्ठ रोग की स्थिति पर विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि भारत अभी भी कुष्ठ रोग के मामलों में प्रमुख देशों में शामिल है, जहां पश्चिम बंगाल रिपोर्ट किए गए मामलों में तीसरे स्थान पर है।
डॉ. भट्टाचार्य ने जोर देकर कहा कि कुष्ठ रोग पूरी तरह ठीक हो सकता है, बहु-औषधि चिकित्सा (एमडीटी) से मुफ्त इलाज उपलब्ध है, लेकिन देर से निदान के कारण होने वाली विकृतियां मरीजों को सामाजिक बहिष्कार और अस्वीकृति का शिकार बनाती हैं। रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी और संरचित फिजियोथेरेपी से खोए कार्यों को बहाल किया जा सकता है, जिससे मरीज मुख्यधारा समाज में वापस लौट सकें। उन्होंने महात्मा गांधी की कुष्ठ रोगियों के प्रति आजीवन प्रतिबद्धता और उनकी गरिमा बहाल करने के प्रयासों का जिक्र किया, जो आज भी प्रेरणादायक है।
कार्यक्रम में एक इंटरैक्टिव सत्र भी हुआ, जिसका संचालन डॉ. अमिताभ मंडल, डिप्टी सीएमओएच-III, मालदा ने किया। उन्होंने डॉक्टरों, स्वास्थ्य कर्मियों और उपस्थित लोगों के साथ सार्वजनिक स्वास्थ्य रणनीतियों, शुरुआती पहचान, उपचार और समुदाय-आधारित सहायता पर चर्चा की। सत्र में कुष्ठ रोग के लक्षण, संक्रमण रोकथाम और कलंक मुक्ति के उपायों पर सवाल-जवाब हुआ।
अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी जैसे डॉ. एस. बोस (एसीएमएस/पी), डॉ. एस. रॉय (डीएमओ/ईएनटी), डॉ. एस. भट्टाचार्य (एसीएमएस) सहित नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ ने सक्रिय भागीदारी की। उनका उत्साहपूर्ण सहयोग अस्पताल की कुष्ठ रोग के चिकित्सा एवं सामाजिक दोनों स्तरों पर लड़ाई की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।