गर्मजोशी से होगा शीतकालीन सत्र का आगाज

चुनावों को लेकर सत्तारुढ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन और प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस के बीच गर्मागरम बहस हो सकती है

Update: 2018-12-09 11:20 GMT

नयी दिल्ली। संसद के मंगलवार से शुरु हो रहे शीतकालीन सत्र के हंगामेदार रहने की संभावना है। राफेल सौदे ,सीबीआई विवाद ,किसानों की समस्या, उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था, बेरोजगारी जैसे मुद्दों को लेकर विपक्ष की सरकार को घेरने की तैयारी को देखते हुये सत्ता पक्ष ने जवाबी रणनीति में राममंदिर के मुद्दे को गरमाने के लिए पूरी तरह से कमर कस ली है।

सत्र शुरु होने के दिन ही पांच राज्यों में हुये विधानसभा चुनाव के परिणाम आने हैं जिनका असर भी दोनों सदनों की कार्यवाही पर दिखायी देगा।

विपक्षी दल उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था के मुद्दे को उछालने का प्रयास कर सकते हैं। वामपंथी दल किसानों की समस्याओं को भी सदन में उठाना चाहते हैं जिनमें गन्ना किसानों की कठिनाइयां प्रमुख है।

संसद के दोनों सदनों में भारतीय जनता पार्टी के सांसद अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर राममंदिर के निर्माण के लिए गैरसरकारी विधेयक पेश करने की घोषणा कर चुके हैं। राज्यसभा में मनोनीत सांसद प्रो. राकेश सिन्हा और लोकसभा में धारवाड़ से निर्वाचित श्री प्रह्लाद जोशी ने ये घोषणा की है।

उल्लेखनीय है कि उच्चतम न्यायालय द्वारा अयोध्या में विवादित स्थल के स्वामित्व का मामले की सुनवाई जनवरी तक टालने के बाद संत समाज, विश्व हिन्दू परिषद (विहिप), राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ओर से सरकार पर इस बात का दबाव है कि अदालत से उम्मीद टूटने के बाद वह अध्यादेश या संसद में विधेयक लाये।

भारतीय जनता पार्टी के सदस्य पश्चिम बंगाल में पार्टी की सांगठनिक स्थिति को चुस्त दुरुस्त करने और और लोकसभा चुनाव के पूर्व अपने पक्ष में हवा बनाने के लिए पार्टी की रथयात्रा की अनुमति नहीं मिलने को लेकर अपना आक्रोश व्यक्त कर सकते हैं जिसका तृणमूल कांग्रेस की ओर से कड़ा जबाव दिया जायेगा ।

विपक्षी दल उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था के मुद्दे को उछालने का प्रयास कर सकते हैं । वामपंथी दल किसानों की समस्याओं को भी सदन में उठाना चाहते हैं जिनमें गन्ना किसानों की कठिनाइयां प्रमुख है।

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