बजट 2026: कैंसर की दवाइयों से विदेश यात्रा तक कई चीजें सस्ती, शराब और तंबाकू महंगे

केंद्र सरकार के ताजा बजटीय फैसलों का सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ने वाला है। एक ओर जहां कैंसर की दवाओं, इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक व्हीकल बैटरियों और विदेश यात्रा जैसे खर्चों में राहत दी गई है, वहीं शराब, तंबाकू और कुछ आयातित सामान महंगे हो सकते हैं।

Update: 2026-02-02 06:14 GMT

नई दिल्ली। केंद्र सरकार के ताजा बजटीय फैसलों का सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ने वाला है। एक ओर जहां कैंसर की दवाओं, इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक व्हीकल बैटरियों और विदेश यात्रा जैसे खर्चों में राहत दी गई है, वहीं शराब, तंबाकू और कुछ आयातित सामान महंगे हो सकते हैं। सरकार ने कस्टम ड्यूटी और टैक्स ढांचे में कई अहम बदलाव किए हैं, जिनका उद्देश्य घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना, निर्यात बढ़ाना और स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ बनाना है।

1. कैंसर की दवाएं सस्ती

सरकार ने कैंसर के इलाज में उपयोग होने वाली 17 जीवनरक्षक दवाओं पर बेसिक कस्टम ड्यूटी पूरी तरह समाप्त कर दी है। इसके अलावा सात दुर्लभ बीमारियों के इलाज के लिए विदेश से मंगाई जाने वाली दवाओं और विशेष खाद्य पदार्थों को भी टैक्स से मुक्त कर दिया गया है। इस कदम से उन परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी, जो महंगी विदेशी दवाओं पर निर्भर हैं। इलाज की लागत में कमी आने से गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को आर्थिक मदद मिल सकेगी।

2. माइक्रोवेव ओवन और इलेक्ट्रॉनिक्स सस्ते

घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में भी राहत दी गई है। माइक्रोवेव ओवन बनाने में इस्तेमाल होने वाले प्रमुख कंपोनेंट्स पर कस्टम ड्यूटी घटा दी गई है। इससे उत्पादन लागत कम होगी और आने वाले समय में माइक्रोवेव ओवन की कीमतों में गिरावट संभव है। सरकार का लक्ष्य भारत को कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स का वैश्विक हब बनाना है। स्मार्टफोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों की कीमतों पर भी सकारात्मक असर पड़ सकता है।

3. EV बैटरी और सोलर पैनल निर्माण को बढ़ावा

ऊर्जा संक्रमण (एनर्जी ट्रांजिशन) की दिशा में सरकार ने लिथियम-आयन बैटरी निर्माण से जुड़ी मशीनों और बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम के सामान पर टैक्स छूट का दायरा बढ़ा दिया है। साथ ही, सोलर ग्लास बनाने में इस्तेमाल होने वाले ‘सोडियम एंटीमोनेट’ पर कस्टम ड्यूटी हटा दी गई है। इससे देश में सोलर पैनल निर्माण सस्ता होगा और नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा।

यह कदम इलेक्ट्रिक वाहनों और सोलर एनर्जी सेक्टर को प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

4. जूते, कपड़े और सी-फूड सस्ते हो सकते हैं

निर्यात बढ़ाने के लिए समुद्री उत्पाद, लेदर और टेक्सटाइल सेक्टर को भी राहत दी गई है।

सी-फूड एक्सपोर्ट के लिए ड्यूटी-फ्री आयात सीमा 1% से बढ़ाकर 3% कर दी गई है।

लेदर और सिंथेटिक जूतों के साथ ‘शू अपर्स’ के निर्यात पर टैक्स छूट दी गई है।

जब कंपनियों को कच्चा माल सस्ता मिलेगा, तो उत्पादन लागत घटेगी। यदि इसका लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जाता है, तो लेदर जूते, स्पोर्ट्स शूज और सी-फूड की कीमतें कम हो सकती हैं या स्थिर रह सकती हैं।

5. विदेश यात्रा अब सस्ती

विदेश यात्रा करने वालों को भी राहत मिली है। पहले 10 लाख रुपये तक के टूर पैकेज पर 5% और उससे अधिक खर्च पर 20% टीसीएस (टैक्स कलेक्शन एट सोर्स) लगता था। अब इसे घटाकर सीधे 2% कर दिया गया है और रकम की सीमा भी हटा दी गई है। टीसीएस एक तरह का अग्रिम आयकर है, जिसे बाद में आयकर रिटर्न में समायोजित किया जा सकता है। इस कटौती से विदेश घूमना पहले की तुलना में सस्ता होगा।

6. एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस और MRO सस्ता

नागरिक उड्डयन और रक्षा क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए विमान निर्माण में इस्तेमाल होने वाले पुर्जों और कंपोनेंट्स पर कस्टम ड्यूटी हटा दी गई है। डिफेंस सेक्टर में एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल (MRO) के लिए आयातित कच्चे माल पर भी टैक्स नहीं लगेगा। इससे देश में विमान निर्माण और मरम्मत की लागत घटेगी तथा भारत को एमआरओ हब के रूप में विकसित करने में मदद मिलेगी।

7. व्यक्तिगत उपयोग के आयातित सामान सस्ते

विदेश से निजी उपयोग के लिए मंगाए जाने वाले सामान पर लगने वाला टैक्स 20% से घटाकर 10% कर दिया गया है। इससे व्यक्तिगत आयात सस्ते हो जाएंगे।

क्या हुआ महंगा?

कुछ वस्तुओं पर टैक्स बढ़ाया गया है:

शराब पर टीसीएस 1% से बढ़ाकर 2%

बीड़ी, सिगरेट, तंबाकू और गुटका

फ्यूचर्स पर एसटीटी 0.02% से बढ़ाकर 0.05%

ऑप्शंस पर एसटीटी 0.15%

लग्जरी घड़ियां

कम लागत वाले आयातित छाते

एटीएम/कैश डिस्पेंसर मशीन और उनके पार्ट्स

उर्वरक इनपुट जैसे अमोनियम फॉस्फेट

कॉफी रोस्टिंग/ब्रूइंग मशीनें

एसटीटी (सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स) हर शेयर बाजार सौदे पर लगता है। दरें बढ़ने से ट्रेडिंग की लागत बढ़ेगी।

जीएसटी स्लैब में पहले ही हो चुका बदलाव

22 सितंबर 2025 से जीएसटी ढांचे को सरल बनाते हुए चार स्लैब घटाकर दो 5% और 18% कर दिए गए हैं। जीएसटी काउंसिल की 56वीं बैठक में लिए गए इस फैसले से घी, पनीर, कार और एसी जैसी कई वस्तुएं पहले ही सस्ती हो चुकी हैं।

मेक इन इंडिया को बढ़ावा

सरकार के इन फैसलों से स्वास्थ्य, ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स और निर्यात क्षेत्रों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। आम उपभोक्ता को दवाइयों, इलेक्ट्रॉनिक्स और विदेश यात्रा में राहत मिलेगी, जबकि तंबाकू और शराब जैसी वस्तुएं महंगी होंगी। यह बजटीय बदलाव “मेक इन इंडिया”, ऊर्जा आत्मनिर्भरता और उपभोक्ता राहत के संतुलन को साधने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

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