Uttarakhand: 23 साल पुराने जेनी प्रकरण में नया मोड़, हरक सिंह रावत पर गंभीर आरोप; दोबारा DNA जांच की मांग

जेनी ने अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि वह वर्ष 2002 में मॉडलिंग के सिलसिले में देहरादून आई थीं। काम नहीं मिलने के कारण उन्होंने एक एसटीडी बूथ पर नौकरी शुरू कर दी। इसी दौरान एक कांग्रेस नेता के माध्यम से उन्हें हरक सिंह रावत के घर पर काम मिला।;

Update: 2026-11-08 06:39 GMT

देहरादून : Harak Singh Rawat Jenny case: उत्तराखंड की राजनीति में करीब 23 साल पुराने इंद्राणी देवड़ी उर्फ जेनी प्रकरण ने एक बार फिर हलचल मचा दी है। वर्षों तक सार्वजनिक रूप से खामोश रहने के बाद जेनी ने शनिवार को उत्तराखंड कांग्रेस चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष और पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत पर गंभीर आरोप लगाए। जेनी का दावा है कि वर्ष 2002 में महज 16 साल की उम्र में उनके साथ देहरादून स्थित आवास पर दुष्कर्म किया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि इस घटना ने उनकी जिंदगी को प्रभावित किया और अब वह अपने बेटे को पिता का नाम और पहचान दिलाना चाहती हैं। जेनी ने पूर्व में हुई सीबीआइ और डीएनए जांच पर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की दोबारा निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली जांच के दौरान उनकी बात ठीक से नहीं सुनी गई और जांच में गड़बड़ी हुई। जेनी ने नए सिरे से डीएनए परीक्षण कराने के साथ नार्को टेस्ट की मांग भी उठाई है। 

मॉडलिंग के लिए देहरादून आई थीं जेनी

जेनी ने अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि वह वर्ष 2002 में मॉडलिंग के सिलसिले में देहरादून आई थीं। काम नहीं मिलने के कारण उन्होंने एक एसटीडी बूथ पर नौकरी शुरू कर दी। इसी दौरान एक कांग्रेस नेता के माध्यम से उन्हें हरक सिंह रावत के घर पर काम मिला। जेनी के मुताबिक, इस दौरान हरक सिंह रावत ने कथित तौर पर घर और बाहर कई स्थानों पर उनके साथ दुष्कर्म किया। उन्होंने दावा किया कि बच्चे के जन्म के बाद जब उन्होंने हरक सिंह रावत से पिता का नाम और पहचान देने की मांग की तो उनके साथ प्रताड़ना शुरू हो गई। जेनी ने आरोप लगाया कि उन्हें मानसिक रूप से परेशान किया गया और पागल महिलाओं के साथ रखा गया। उनके अनुसार, इस दौरान उनसे जबरन हस्ताक्षर भी कराए गए। शनिवार को अपनी आपबीती बताते हुए जेनी भावुक हो गईं और उन्होंने कहा कि अब वह अपने बेटे को उसका अधिकार दिलाना चाहती हैं।

पुरानी सीबीआइ जांच पर उठाए सवाल

जेनी ने पूर्व में हुई सीबीआइ जांच को लेकर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि जब जांच टीम उनसे मिलने पहुंची थी, उस समय उनकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी। उन्होंने दावा किया कि जांच अधिकारी उनसे केवल एक बार मिले थे और वह उस दौरान अपनी बात ठीक से नहीं रख सकीं। जेनी ने कहा कि उनकी परिस्थितियों और मानसिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए मामले की दोबारा जांच होनी चाहिए। उन्होंने डीएनए परीक्षण को फिर से कराने की मांग करते हुए कहा कि इससे उनके बेटे की पहचान से जुड़े सवालों का समाधान हो सकता है। पत्रकार वार्ता से पहले जेनी शनिवार को पुलिस महानिदेशक से भी मिलीं। उन्होंने डीजीपी को शिकायती पत्र सौंपकर मामले की निष्पक्ष जांच कराने और अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की।

2003 में बच्चे के जन्म के बाद शुरू हुआ था विवाद

इस प्रकरण की शुरुआत वर्ष 2003 में हुई थी। तत्कालीन नारायण दत्त तिवारी सरकार के कार्यकाल में असम की युवती इंद्राणी देवड़ी उर्फ जेनी ने जून में देहरादून के सरकारी अस्पताल में बच्चे को जन्म दिया था। उस समय जेनी ने तत्कालीन राजस्व मंत्री हरक सिंह रावत को बच्चे का पिता बताया था। 18 जून 2003 को इस विवाद के बाद हरक सिंह रावत को मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था। इसके बाद 23 जुलाई को सीबीआइ ने जेनी के बयान के आधार पर हरक सिंह रावत के खिलाफ दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज किया था। मामले की जांच सीबीआइ ने की और डीएनए परीक्षण भी कराया गया। जांच के बाद हरक सिंह रावत को क्लीन चिट मिलने की बात सामने आई थी। हालांकि, जुलाई 2016 में दिल्ली में उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज होने की खबर भी सामने आई थी, लेकिन इसके बाद मामला आगे नहीं बढ़ा।

हरक सिंह बोले- राजनीतिक नुकसान पहुंचाने की कोशिश

जेनी के नए आरोपों पर हरक सिंह रावत ने कहा कि यह मामला करीब 23 साल पहले सीबीआइ जांच और डीएनए परीक्षण के बाद बंद हो चुका था। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा इस पुराने प्रकरण को उठाकर उन्हें राजनीतिक नुकसान पहुंचाना चाहती है। हरक सिंह रावत ने पुराने मामले का हवाला देते हुए आरोपों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया। वहीं, जेनी ने दोबारा जांच की मांग करते हुए कहा कि वह अपने बेटे को पिता की पहचान दिलाने के लिए न्याय की लड़ाई जारी रखेंगी।

भाजपा ने कांग्रेस नेतृत्व की चुप्पी पर उठाए सवाल

जेनी के आरोपों के बाद भाजपा ने कांग्रेस नेतृत्व पर भी निशाना साधा है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और राज्यसभा सदस्य सुधांशु त्रिवेदी ने नई दिल्ली में कहा कि एक महिला द्वारा वरिष्ठ कांग्रेस नेता पर लगाए गए आरोप गंभीर हैं। उन्होंने कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी और पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा की चुप्पी को दुखद और कष्टप्रद बताया। त्रिवेदी ने कहा कि कांग्रेस को इस मामले में अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। फिलहाल जेनी की शिकायत के बाद मामले की आगे की कार्रवाई और जांच को लेकर सबकी नजरें पुलिस प्रशासन पर टिकी हैं।

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