नई दिल्ली: बेटी अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की मांग लेकर दिल्ली पहुंचे उसके माता-पिता को बुधवार शाम राजघाट पर पुलिस की कार्रवाई का सामना करना पड़ा। महात्मा गांधी की समाधि के सामने मौन व्रत रखकर बैठे अंकिता के माता-पिता और सामाजिक कार्यकर्ताओं को दिल्ली पुलिस ने वहां से हटा दिया। इस दौरान उन्हें हिरासत में भी लिया गया। पुलिस की कार्रवाई के बीच अंकिता की मां सोनी देवी की तबीयत बिगड़ गई और वह बेहोश हो गईं। उन्हें उपचार के लिए बुराड़ी अस्पताल ले जाया गया। इस बारे में अलग-वर्गों से आने वाली महिलाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने प्रतिक्रिया की।
क्या आप खुद को सुरक्षित महसूस करते हैं?
अभिनेत्री रिचा चड्ढा ने कहा, सिर्फ भारत में ही किसी मृत पीड़िता की मां के साथ ऐसा बर्ताव किया जा सकता है। क्या बेटी की हत्या हो जाना ही काफी बड़ा दुख नहीं है? अपने आस-पास देखिए। लोग अब बलात्कारियों और हत्यारों का बचाव करने लगे हैं - समाज में उनकी वापसी का जश्न मनाते हैं, उन्हें मालाएं पहनाते हैं। क्या आप ऐसे समाज में रहना चाहते हैं? जहां अपने बच्चों को बड़ा करना चाहें? क्या आप खुद को सुरक्षित महसूस करते हैं? उन्होंने आगे कहा कि एक बार फिर अपने आस-पास देखिए; जो लोग ऐसी घिनौनी हरकतों का बचाव करते हैं, 'राजनीति' की आड़ लेते है, या ऐसे अनदेखा कर देते हैं मानो यह सब बहुत सामान्य बात हो - तो कृपया ऐसे लोगों को जी भर कर कोसिए।
माता-पिता के साथ अमानवीय व्यवहार
सपा की सांसद डिंपल यादव ने कहा कि बेटी अंकिता भंडारी के माता-पिता के साथ दिल्ली पुलिस की बर्बरता और अमानवीय व्यवहार ने पूरे देश और देवभूमि के बेटियों के स्वाभिमान को झकझोर दिया है। न्याय की गुहार लगा रहे माता-पिता को सरेआम घसीटा गया जिससे अंकिता की माता जी बेहोश हो गईं। भाजपा के संवेदनहीन सत्ताधीश आखिर कब तक मौन रहेंगे? क्या बेटी के लिए न्याय मांगना अपराध है?
सिस्टम का बुरा बर्ताव
शिवसेना यूबीटी की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि अंकिता भंडारी का परिवार अपनी बेटी के लिए न्याय की लड़ाई लड़ रहा है, लेकिन सिस्टम उनके साथ बुरा बर्ताव कर रहा है। वहीं, इस हत्याकांड में आरोपी तथाकथित VIP बिना किसी पछतावे के एक संवैधानिक पद पर बैठा है।
न्याय की मांग
कांग्रेस नेत्री सुप्रिया श्रीनेत्र ने कहा कि नारी वंदन - BJP playbook। अंकिता भंडारी के लिए न्याय मांगती हुई उसकी मां के साथ यह बदसलूकी सिर्फ़ और सिर्फ़ BJP कर सकती है। शाबाश मोदी जी देवभूमि उत्तराखंड से इसका जवाब आयेगा
बुनियादी सवालों के जवाब
सामाजिक कार्यकर्ता गुरमेहर कौर ने कहा कि कांग्रेस अंकिता भंडारी की मां ने चार साल तक बहुत कष्ट झेला। वे सड़क पर बैठी रहीं और अपनी 19 साल की बेटी की हत्या के मामले में बस कुछ बुनियादी सवालों के जवाब मांगती रहीं। चार साल तक उनका परिवार उस "VIP" का नाम पूछता रहा जिसका अंकिता की मौत से संबंध था, लेकिन सरकार ने उसी नेता को इनाम के तौर पर राज्यपाल बना दिया। और अब दूसरी बार, पुलिस ने उन्हें सुबह 4 बजे इंडिया गेट से जबरन हटाया और फिर राजघाट पर भी उन्हें घेर लिया। जब सोनी देवी का शरीर अत्यधिक शारीरिक कष्ट और सदमे के कारण जवाब दे गया और वे बेहोश हो गईं, तो पुलिस ने एम्बुलेंस तक नहीं बुलाई। उन्होंने उन्हें घसीटा, एक वैन में धकेल दिया और इधर-उधर घुमाते रहे, ताकि कैमरे उनकी करतूत न देख लें और सड़क खाली हो जाए। यह सब एक खास पार्टी, उनके नेताओं और उनकी गिरती हुई साख को बचाने के लिए किया गया। लेकिन याद रखें: हम इसे भूलेंगे नहीं, और इस देश की महिलाएं कभी माफ़ नहीं करेंगी और न ही कभी भूलेंगी कि आपने क्या किया है।
राजघाट पर धरना देने पर पुलिस ने हटाया
जानकारी के अनुसार, अंकिता के पिता वीरेंद्र भंडारी, मां सोनी देवी और सामाजिक कार्यकर्ता योगिता भयाना बुधवार शाम राजघाट पहुंचे थे। यहां उन्होंने महात्मा गांधी की समाधि के सामने मौन व्रत रखकर धरना शुरू किया। शाम को पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों को राजघाट से हटने के लिए कहा। जब उन्होंने इन्कार किया तो पुलिसकर्मी उन्हें जबरन हटाने लगे। पुलिस धरना दे रहे सभी लोगों को गाड़ियों में बैठाकर अपने साथ ले गई। इसी दौरान सोनी देवी की तबीयत बिगड़ गई। उन्हें तत्काल पुलिस वाहन से बुराड़ी अस्पताल पहुंचाया गया। वहीं, वीरेंद्र भंडारी और अन्य कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर थाने भेज दिया गया। मध्य जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के अनुसार, राजघाट राष्ट्रीय समाधि स्थल है और यहां धरना-प्रदर्शन की अनुमति नहीं है।