वाराणसी : काशी के ऐतिहासिक मणिकर्णिका घाट के पुनर्विकास और सुंदरीकरण कार्य को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक और कानूनी मोर्चे पर पहुंच गया है। राजमाता अहिल्याबाई होलकर समेत हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियों को नुकसान पहुंचने का दावा करते हुए एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) से बनी तस्वीरें सोशल मीडिया पर प्रसारित करने के मामले में पुलिस ने आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह, कांग्रेस समर्थक बिहार से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव, हरियाणा की कांग्रेस नेता जसविंदर कौर सहित कुल आठ लोगों को नोटिस भेजा है। पुलिस का आरोप है कि इन नेताओं और सोशल मीडिया यूजर्स ने फर्जी एआई तस्वीरों के साथ ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर ऐसी टिप्पणियां कीं, जिनसे लोगों की धार्मिक आस्था को ठेस पहुंची और समाज में विद्वेष फैलने की आशंका पैदा हुई।
क्या है पूरा मामला
बीते मंगलवार को मणिकर्णिका घाट पर चल रहे विकास कार्य के दौरान कुछ वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुईं। इनमें दावा किया गया कि राजमाता अहिल्याबाई होलकर सहित कई मूर्तियों और मंदिरों को तोड़ा या क्षतिग्रस्त किया गया है। इन तस्वीरों और वीडियो को लेकर कांग्रेस, सपा और आप के नेताओं ने उत्तर प्रदेश सरकार पर गंभीर आरोप लगाए और इसे हिंदू आस्था पर हमला बताया। हालांकि, प्रशासन ने शुरू से ही इन दावों को खारिज किया और कहा कि सभी मूर्तियां सुरक्षित हैं तथा किसी भी धार्मिक संरचना को नुकसान नहीं पहुंचाया गया है।
शुरुआती जांच में एआई से बनी तस्वीरों की पुष्टि
पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया कि सोशल मीडिया पर प्रसारित कई तस्वीरें वास्तविक नहीं थीं, बल्कि एआई की मदद से बनाई गई थीं। इसके बाद शनिवार को चौक थाने में आठ नामजद और कुछ अज्ञात लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं में मामला दर्ज किया गया। इन धाराओं के तहत तीन से पांच साल तक की सजा का प्रावधान है। इसी वजह से पुलिस ने तत्काल गिरफ्तारी के बजाय पहले नोटिस जारी कर तथ्यों की गहराई से जांच करने का फैसला किया है, ताकि अदालत से वारंट लेने की स्थिति मजबूत हो सके।
पुलिस कमिश्नर का बयान
पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि यह मामला इंटरनेट मीडिया पर फर्जी तस्वीरें डालकर भ्रम फैलाने से जुड़ा है। उन्होंने बताया कि जिन तस्वीरों को मणिकर्णिका घाट से जोड़कर साझा किया गया, वे वास्तव में श्रीकाशी विश्वनाथ धाम स्थित कुंभा महादेव मंदिर की हैं, जो मणिकर्णिका घाट से लगभग 250 मीटर दूर स्थित है और पूरी तरह सुरक्षित है। मोहित अग्रवाल के अनुसार, एआई की मदद से बनाई गई तस्वीरों में मंदिर को क्षतिग्रस्त दिखाया गया, जबकि वास्तविकता में ऐसा कुछ भी नहीं है। पुलिस अब सभी डिजिटल सबूतों को फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी (एफएसएल) भेजकर जांच करा रही है और रिपोर्ट आने के बाद ही अगला कदम उठाया जाएगा।
किन लोगों पर दर्ज हुआ केस
इस मामले में जिन लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई है, उनमें एक्स हैंडल यूजर आशुतोष पोट्सनिस, संजय सिंह, पप्पू यादव और जसविंदर कौर प्रमुख हैं। इन पर आरोप है कि इन्होंने अपने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए सरकार को “आक्रांता” बताया और यह संदेश फैलाया कि सुंदरीकरण के नाम पर देवी-देवताओं की मूर्तियां तोड़ी जा रही हैं। इसके अलावा, सुंदरीकरण कार्य के नोडल अधिकारी और नगर निगम के अपर नगर आयुक्त संगम लाल की ओर से प्रज्ञा गुप्ता, मनीष सिंह, रितु राठौर और संदीप देव के खिलाफ भी लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने और भड़काऊ संदेश लिखने के आरोप में केस दर्ज कराया गया है। कार्यदायी कंपनी जीवीएस के प्रोजेक्ट मैनेजर मनो ने भी शनिवार देर रात चौक थाने में अलग से तहरीर दी।
मुख्यमंत्री योगी का सख्त रुख
इस विवाद पर शनिवार को काशी दौरे पर पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दो टूक कहा कि मणिकर्णिका घाट पर कोई मूर्ति नहीं तोड़ी गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल एआई से बने वीडियो और तस्वीरें फैलाकर लोगों को गुमराह कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा, “यह सीधा अपराध है। जो लोग फर्जी तस्वीरें और वीडियो फैलाकर धार्मिक भावनाएं भड़काने की कोशिश कर रहे हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।”
संजय सिंह का पलटवार
नोटिस मिलने के बाद आप सांसद संजय सिंह ने रविवार को एक वीडियो जारी कर सरकार पर पलटवार किया। उन्होंने दावा किया कि मणिकर्णिका घाट पर कुछ मंदिरों और मूर्तियों को नुकसान पहुंचा है और इस मुद्दे को उठाने के बजाय उनके खिलाफ केस दर्ज किया गया। संजय सिंह ने कहा, “हिंदू धर्म की आस्था पर चोट पहुंचाने वालों पर कार्रवाई करने के बजाय सरकार मुझे डराने की कोशिश कर रही है। माता अहिल्याबाई के परिवार ने भी मूर्तियों के खंडित होने पर आपत्ति जताई है। भाजपा नेता सुमित्रा महाजन ने भी इसका विरोध किया था।” उन्होंने इसे सरकार की “निरर्थक डराने की कोशिश” बताते हुए कहा कि सच बोलने से वे पीछे नहीं हटेंगे।
आस्था, तकनीक और राजनीति का टकराव
मणिकर्णिका घाट का यह विवाद अब केवल विकास कार्य तक सीमित नहीं रह गया है। इसमें एआई तकनीक के दुरुपयोग, धार्मिक भावनाओं, सोशल मीडिया की भूमिका और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप सब एक साथ जुड़ गए हैं। अब सबकी नजरें एफएसएल की रिपोर्ट और पुलिस की आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं। यह मामला तय करेगा कि एआई से बनी फर्जी तस्वीरें फैलाने पर कानून किस हद तक सख्ती दिखाता है और राजनीति में तकनीक के इस्तेमाल की सीमाएं कहां तक तय होती हैं।