यूपी सरकार का एक लाख नौकरी देने का वादा सिर्फ चुनावी जुमला: अजय राय

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज हो गई है। रक्षाबंधन से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश की बुजुर्ग महिलाओं के लिए बड़ी घोषणा करते हुए 60 वर्ष या उससे अधिक उम्र की महिलाओं को यूपी रोडवेज की बसों में आजीवन मुफ्त यात्रा की सुविधा देने का ऐलान किया है। इस घोषणा पर उत्तर प्रदेश कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने इन घोषणाओं को चुनावी जुमला करार दिया है।;

Update: 2026-08-26 17:05 GMT

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज हो गई है। रक्षाबंधन से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश की बुजुर्ग महिलाओं के लिए बड़ी घोषणा करते हुए 60 वर्ष या उससे अधिक उम्र की महिलाओं को यूपी रोडवेज की बसों में आजीवन मुफ्त यात्रा की सुविधा देने का ऐलान किया है। इस घोषणा पर उत्तर प्रदेश कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने इन घोषणाओं को चुनावी जुमला करार दिया है।

लखनऊ में यूपी कांग्रेस चीफ अजय राय ने कहा कि चुनाव नजदीक आते ही सरकार की ओर से जनता से तरह-तरह के वादे किए जाने लगते हैं। अब चुनाव आ गया है तो सरकार की ओर से झूठे वादे किए जाएंगे। उन्हें प्रदेश की जनता, 60 साल से अधिक उम्र की महिलाएं, रक्षाबंधन और एक लाख लोगों को नौकरी देने का वादा याद आने लगा है, क्योंकि चुनाव आ गया है।

इसी दौरान अजय राय ने भाजपा के हर साल दो करोड़ नौकरियां देने के कथित वादे का भी जिक्र किया। केंद्र सरकार के करीब 12 साल के कार्यकाल में कितने युवाओं को रोजगार मिला? मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से एक लाख लोगों को नौकरी देने का वादा भी केवल चुनावी जुमला है। प्रदेश की जनता के सामने सरकार का दोहरा चरित्र सामने आ चुका है। लोगों को ठगने और भ्रमित करने का काम किया गया है। मैं समझता हूं कि जनता अब जाग चुकी है और करारा जवाब देने के लिए चुनाव का इंतजार कर रही है।

दूसरी ओर, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के घुसपैठ को लेकर दिए बयान पर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सांसद मनोज झा ने तंज कसा।

उन्होंने कहा कि ‘धर्मशाला’ वाली शब्दावली से आगे भी उन्हें बात करनी चाहिए। अगर वे इससे आगे बात नहीं करेंगे तो ऐसा लगेगा कि उनके पास कहने के लिए और कुछ नहीं है। इस मुद्दे को कई बार उठाया और दोहराया जा चुका है। देश की प्राथमिक जरूरतों पर चर्चा होनी चाहिए। इनमें रोजगार, बेहतर शिक्षा व्यवस्था, महंगाई पर नियंत्रण और बेहतर परीक्षा प्रणाली जैसे मुद्दे शामिल हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि इन बुनियादी मुद्दों पर सरकार कुछ नहीं कर पा रही है और इन्हीं कमियों के बीच सरकार अपना अस्तित्व तलाशने की कोशिश कर रही है।

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