बेटा न मिला तो पिता को उठाकर थाने में बर्बरता, मौत के बाद दारोगा-सिपाही समेत छह पर केस

परिवार का आरोप है कि आठ जुलाई को रेवती थाने के सब इंस्पेक्टर सचिन सरोज और कांस्टेबल अंकित सिंह ने कामजी गोंड को हिरासत में लिया और बेटे को थाने बुलाने का दबाव बनाया। आरोप है कि इस दौरान उनके साथ मारपीट की गई, जिससे उनकी हालत खराब हो गई।;

Update: 2026-07-13 06:25 GMT

बलिया: उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में पुलिस हिरासत के दौरान एक व्यक्ति की मौत का मामला सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है। परिजनों ने आरोप लगाया है कि मारपीट के एक मामले में आरोपी बेटे को थाने बुलाने के दबाव में पुलिस उसके पिता को घर से उठाकर ले गई और वहां उनके साथ मारपीट की गई। इसके बाद उनकी हालत बिगड़ गई और इलाज के दौरान वाराणसी के बीएचयू ट्रामा सेंटर में उनकी मौत हो गई। मामले के सामने आने के बाद पुलिस विभाग ने कार्रवाई करते हुए एक सब इंस्पेक्टर और कांस्टेबल को निलंबित कर दिया है। वहीं, रेवती थानाध्यक्ष को लाइन हाजिर कर दिया गया है। पूरे प्रकरण की जांच शुरू कर दी गई है।

मारपीट के मामले से शुरू हुआ विवाद

जानकारी के अनुसार, घटना की शुरुआत सात जुलाई को हुई थी। मृतक कामजी गोंड का बेटा विशाल गांव में ही सूरज कन्नौजिया की दुकान पर मुर्गे का मांस खरीदने गया था। इसी दौरान किसी बात को लेकर दोनों पक्षों में कहासुनी हुई और मामला मारपीट तक पहुंच गया। इसके बाद सूरज कन्नौजिया की शिकायत पर पुलिस ने कार्रवाई शुरू की। परिवार का आरोप है कि पुलिस विशाल को तलाश रही थी, लेकिन उसके नहीं मिलने पर उसके पिता कामजी गोंड को थाने ले जाया गया।

परिजनों ने लगाया पिटाई का आरोप

परिवार का आरोप है कि आठ जुलाई को रेवती थाने के सब इंस्पेक्टर सचिन सरोज और कांस्टेबल अंकित सिंह ने कामजी गोंड को हिरासत में लिया और बेटे को थाने बुलाने का दबाव बनाया। आरोप है कि इस दौरान उनके साथ मारपीट की गई, जिससे उनकी हालत खराब हो गई। परिजनों के मुताबिक, पुलिस ने कामजी को सीधे परिवार के हवाले करने के बजाय दूसरे पक्ष से जुड़े लोगों को सौंप दिया। बाद में वह घर के पास ही बेहोशी की हालत में मिले। उनके शरीर पर चोट के निशान थे।

इलाज के दौरान हुई मौत

कामजी गोंड की तबीयत खराब होने के बाद परिजनों ने पहले गांव में ही उनका इलाज कराया। लेकिन हालत में सुधार नहीं हुआ। इसके बाद उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां से डॉक्टरों ने जिला अस्पताल रेफर कर दिया। गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें वाराणसी स्थित बीएचयू ट्रामा सेंटर भेजा गया। वहां इलाज के दौरान शुक्रवार देर रात उनकी मौत हो गई।

शव पहुंचने के बाद ग्रामीणों का प्रदर्शन

शनिवार देर रात कामजी गोंड का शव गांव पहुंचा। रविवार सुबह बड़ी संख्या में ग्रामीण और परिजन एकत्र हो गए और आरोपितों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। आक्रोशित लोगों ने सड़क पर शव रखकर जाम लगा दिया। प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि मामले में शामिल सभी आरोपितों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और पीड़ित परिवार को न्याय मिले। पुलिस अधिकारियों के आश्वासन के बाद स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की गई।

दारोगा और सिपाही निलंबित, छह लोगों पर केस

मामले में रेवती थाने के सब इंस्पेक्टर सचिन सरोज, कांस्टेबल अंकित सिंह, ग्राम प्रधान आशुतोष शंकर सिंह उर्फ लालू, उनके चालक मनीष यादव, सूरज कन्नौजिया और एक अन्य व्यक्ति के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस विभाग ने दारोगा और सिपाही को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। वहीं, रेवती थाना प्रभारी राजकेसर सिंह को लाइन हाजिर कर दिया गया है। मामले की जांच क्षेत्राधिकारी पुलिस लाइन मंजरी राव को सौंपी गई है।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच पर नजर

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृतक के शरीर पर चोटों के कई निशान मिले हैं। हालांकि, पुलिस अधीक्षक ओमवीर सिंह ने कहा कि मौत की स्पष्ट वजह अभी सामने नहीं आई है। जांच के लिए विसरा सुरक्षित रखा गया है। डीआईजी सुनील कुमार सिंह ने मामले की गंभीरता को देखते हुए मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

परिवार को न्याय का भरोसा

इस घटना के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। प्रशासन ने मामले की निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाया है। वहीं, मृतक के परिवार और ग्रामीण आरोपितों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट और आगे की कानूनी कार्रवाई पर टिकी है।

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