कांवड़ यात्रा में हुड़दंग नहीं होना चाहिए, हैदराबाद स्कूल में 'कलमा' होमवर्क विवाद निंदनीय: शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी
ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने आगामी कांवड़ यात्रा, हैदराबाद के एक स्कूल में कथित धार्मिक दबाव के विवाद और भगवान श्रीकृष्ण को लेकर मौलाना जरजिस के विवादित बयान पर अपनी प्रतिक्रिया दी;
बरेली। ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने आगामी कांवड़ यात्रा, हैदराबाद के एक स्कूल में कथित धार्मिक दबाव के विवाद और भगवान श्रीकृष्ण को लेकर मौलाना जरजिस के विवादित बयान पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सभी समुदायों से संयम बरतने और धार्मिक सौहार्द बनाए रखने की अपील की।
मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने कहा कि 30 जुलाई से शुरू होने वाली कांवड़ यात्रा को लेकर उनकी उत्तर प्रदेश सरकार से अपील है कि यात्रा पूरी तरह अमन और शांति के माहौल में संपन्न हो। सरकार को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने चाहिए ताकि यात्रा के दौरान किसी प्रकार की अव्यवस्था या तनाव की स्थिति पैदा न हो। यात्रा के दौरान बड़े-बड़े डीजे के इस्तेमाल से बचा जाना चाहिए और रास्तों में किसी तरह का हुड़दंग नहीं होना चाहिए। कई बार आम राहगीरों के वाहनों के साथ तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आती हैं, जो उचित नहीं हैं। हर व्यक्ति चाहता है कि कांवड़ यात्रा सकुशल और शांतिपूर्ण ढंग से निकले, लेकिन यदि कोई कानून अपने हाथ में लेता है तो इससे सामाजिक तनाव और विवाद की स्थिति पैदा होती है।
नेमप्लेट विवाद पर मौलाना रजवी ने कहा कि दुकानों पर नाम और पहचान संबंधी बोर्ड लगाने में कोई आपत्ति नहीं है। प्रत्येक दुकानदार को अपना बोर्ड लगाना चाहिए और यदि आवश्यक हो तो फूड प्रोसेसिंग विभाग से अनुमति लेकर उसकी प्रति भी प्रदर्शित करनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि किसी व्यक्ति की दुकान केवल उसके धर्म के आधार पर हटाने या उसका विरोध करने की बात पूरी तरह गलत है। भारतीय संविधान प्रत्येक नागरिक को देश के किसी भी हिस्से में कारोबार करने का अधिकार देता है और इस अधिकार का सम्मान होना चाहिए।
हैदराबाद स्कूल में 'कलमा' होमवर्क विवाद पर मौलाना ने कहा कि यदि ऐसी घटना वास्तव में हुई है तो यह निंदनीय है। किसी भी गैर-मुस्लिम को इस्लामी धार्मिक वाक्य या कुरान की आयतें पढ़ने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी मुसलमान को 'जय श्रीराम' का नारा लगाने के लिए बाध्य किया जाता है, तो वह भी गलत और आपत्तिजनक है। किसी भी समुदाय द्वारा दूसरे समुदाय के लोगों पर धार्मिक नारे लगाने या धार्मिक अनुष्ठान करने का दबाव नहीं बनाया जाना चाहिए। ऐसा करने से टकराव की स्थिति पैदा होगी, सांप्रदायिक सौहार्द प्रभावित होगा और देश की छवि पर भी नकारात्मक असर पड़ेगा। उन्होंने दोनों समुदायों से इस प्रकार की गतिविधियों से बचने की अपील की।
भगवान श्रीकृष्ण को लेकर मौलाना जरजिस के उस बयान पर, जिसमें कथित तौर पर कहा गया कि श्रीकृष्ण मुसलमान थे और नमाज पढ़ते थे, मौलाना शहाबुद्दीन रज़वी बरेलवी ने असहमति जताई। उन्होंने कहा कि ऐसा दावा वास्तविक तथ्यों के विपरीत है। उनके अनुसार भगवान श्रीकृष्ण मुसलमान नहीं थे, इसलिए उनके नमाज पढ़ने का प्रश्न ही नहीं उठता। सनातन धर्म इस्लाम से कहीं अधिक प्राचीन है, जबकि इस्लाम को अस्तित्व में आए लगभग 1,500 वर्ष हुए हैं। इसी प्रकार नमाज भी इस्लामी परंपरा का हिस्सा है, इसलिए उसे भगवान श्रीकृष्ण के समय से जोड़ना ऐतिहासिक रूप से सही नहीं है।
मौलाना रजवी ने आगे कहा कि इस तरह के बयान दूसरे धर्म के लोगों की धार्मिक आस्था को ठेस पहुंचाते हैं और सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुंचा सकते हैं। उन्होंने धार्मिक नेताओं से अपील की कि वे ऐसे विवादित और भड़काऊ बयान देने से बचें जिससे समाज में अनावश्यक तनाव पैदा हो।