डिग्री हाथ में, आंखों में नए सपने... IIT कानपुर के 3,104 विद्यार्थियों ने रचा नया अध्याय

IIT Kanpur News:59वें दीक्षांत समारोह में 3,104 विद्यार्थियों को मिली उपाधियां, उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्रों को प्रतिष्ठित पदकों से किया गया सम्मानित।;

Update: 2026-07-15 15:25 GMT

कानपुर। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर का 59वां दीक्षांत समारोह उत्साह और गौरव के माहौल में आयोजित हुआ। इस अवसर पर कुल 3,104 विद्यार्थियों को विभिन्न पाठ्यक्रमों की उपाधियां प्रदान की गईं। इनमें 1,325 स्नातकोत्तर, 1,247 स्नातक और ई-मास्टर्स आउटरीच डिग्री कार्यक्रम के 532 विद्यार्थी शामिल रहे। समारोह में विद्यार्थियों को शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिए प्रतिष्ठित पदकों और पुरस्कारों से भी सम्मानित किया गया।


दो सत्रों में संपन्न हुआ दीक्षांत समारोह

दीक्षांत समारोह का आयोजन दो चरणों में किया गया। पहले सत्र में मुख्य सभागार में राष्ट्रपति स्वर्ण पदक, निदेशक स्वर्ण पदक सहित अन्य प्रतिष्ठित पुरस्कार प्रदान किए गए। दूसरे सत्र में विभिन्न लेक्चर हॉल में विद्यार्थियों को औपचारिक रूप से डिग्रियां सौंपी गईं। यह प्रक्रिया सीनेट पोस्ट ग्रेजुएट समिति (SPGC) और सीनेट अंडर ग्रेजुएट समिति (SUGC) के अध्यक्षों के नेतृत्व में पूरी हुई। समारोह में भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र (IN-SPACe) के अध्यक्ष और आईआईटी कानपुर के पूर्व छात्र डॉ. पवन गोयनका मुख्य अतिथि रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के कार्यवाहक अध्यक्ष जयंत पाटिल ने की, जबकि संस्थान के निदेशक प्रो. मनीन्द्र अग्रवाल भी मौजूद रहे।


'बड़े सपने देखिए, हार मत मानिए'

मुख्य अतिथि डॉ. पवन गोयनका ने विद्यार्थियों को जीवन और करियर के लिए प्रेरक संदेश दिया। उन्होंने कहा कि जीवन 100 मीटर की दौड़ नहीं बल्कि एक लंबी इंजीनियरिंग परियोजना की तरह है, जिसमें असफलताओं से सीखकर आगे बढ़ना पड़ता है। उन्होंने विद्यार्थियों से कभी हार न मानने, बड़े सपने देखने, लोगों पर भरोसा रखने, लगातार सीखते रहने और अपने दिल की आवाज सुनने की सलाह दी। उन्होंने वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए कहा कि आज के स्नातक उस समय अपने करियर के महत्वपूर्ण दौर में होंगे। ऐसे में उन्हें ऐसा योगदान देना चाहिए, जिस पर वे भविष्य में गर्व कर सकें।


'डिग्री अंत नहीं, नई शुरुआत है'

जयंत पाटिल ने विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि वर्षों की मेहनत और संघर्ष का परिणाम है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का सफर डिग्री मिलने के साथ समाप्त नहीं होता, बल्कि यहीं से नई शुरुआत होती है। उन्होंने विद्यार्थियों से ईमानदारी, नवाचार और समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का आह्वान किया।वहीं, निदेशक प्रो. मनीन्द्र अग्रवाल ने कहा कि तकनीक के इस दौर में केवल जानकारी होना पर्याप्त नहीं है। सही प्रश्न पूछना, नैतिक निर्णय लेना और समाज पर तकनीक के प्रभाव को समझना ही मानवीय बुद्धिमत्ता की असली पहचान है। उन्होंने विद्यार्थियों को जीवनभर सीखते रहने और बदलते समय के अनुसार स्वयं को विकसित करने की सलाह दी।


390 पीएचडी सहित कई पाठ्यक्रमों के विद्यार्थियों को मिली उपाधियां

इस वर्ष 390 पीएचडी, 53 एमटेक-पीएचडी, एक एमडिजाइन-पीएचडी, चार एमएस (रिसर्च)-पीएचडी, 502 एमटेक, 852 बीटेक, 212 बीएस, 186 एमएससी, 59 एमबीए, 36 एमडिजाइन, 66 एमएस (रिसर्च), 40 पीजीपीईएक्स-वीएलएफएम, 35 डबल मेजर, 107 ड्यूल डिग्री, 28 एमएस-पीडी तथा ई-मास्टर्स कार्यक्रम के 492 विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गईं। यह विविधता संस्थान की बहुविषयक शिक्षा और अनुसंधान आधारित उत्कृष्टता को दर्शाती है।


सागर के. वी. को राष्ट्रपति स्वर्ण पदक, आदित्य वी. और ऋत्विक शंकर को निदेशक स्वर्ण पदक

समारोह में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को प्रतिष्ठित सम्मान भी दिए गए। कम्प्यूटर साइंस एवं इंजीनियरिंग विभाग के सागर के. वी. को राष्ट्रपति स्वर्ण पदक प्रदान किया गया। वहीं स्टैटिस्टिक्स एंड डेटा साइंस के आदित्य वी. और एयरोस्पेस इंजीनियरिंग के ऋत्विक शंकर को निदेशक स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया। इसके अलावा ध्रुव बुधेदेव को रतन स्वरूप स्मृति पुरस्कार दिया गया। विभिन्न शैक्षणिक कार्यक्रमों के मेधावी विद्यार्थियों को अकादमिक उत्कृष्टता पुरस्कार और अन्य संस्थागत सम्मान भी प्रदान किए गए।


परंपरा और जिम्मेदारी के साथ नई शुरुआत

दीक्षांत समारोह में सभी विद्यार्थियों ने संस्थान की परंपरा के अनुरूप निर्धारित परिधान पहनकर हिस्सा लिया। डिग्री प्राप्त करने के साथ विद्यार्थियों ने केवल आईआईटी कानपुर की शैक्षणिक विरासत ही नहीं, बल्कि ज्ञान, ईमानदारी, नेतृत्व और समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का संकल्प भी अपने साथ आगे बढ़ाया।

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