आजम खान को बड़ा झटका! जौहर यूनिवर्सिटी के 38 भवन घोषित हुए अवैध, ध्वस्तीकरण का आदेश

रामपुर विकास प्राधिकरण ने बिना स्वीकृत नक्शे के बने 38 भवनों पर की कार्रवाई, विस्तृत सुनवाई के बाद जारी हुआ आदेश।;

Update: 2026-07-15 16:07 GMT

लखनऊ,उत्तर प्रदेश के रामपुर में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और जेल में बंद मोहम्मद आजम खान के ड्रीम प्रोजेक्ट मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय पर बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई हुई है। रामपुर विकास प्राधिकरण (आरडीए) ने विश्वविद्यालय परिसर में बिना स्वीकृत नक्शे के निर्मित 38 भवनों को अवैध मानते हुए उनके ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया है। यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम, 1973 की धारा-27(1) के तहत की गई है। आदेश में कहा गया है कि विस्तृत सुनवाई, दस्तावेजों के परीक्षण और संबंधित अभिलेखों की जांच के बाद यह निर्णय लिया गया।


8 जुलाई को जवाब, 15 जुलाई को सुनवाई के बाद आया फैसला -

जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी ने बताया कि जिले में अवैध निर्माण के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में क्षेत्रीय अवर अभियंता की रिपोर्ट के आधार पर जौहर विश्वविद्यालय के निर्माण की जांच शुरू हुई।विश्वविद्यालय प्रबंधन को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया। विश्वविद्यालय प्रशासन ने 8 जुलाई को अपना जवाब दाखिल किया, जबकि 15 जुलाई को व्यक्तिगत सुनवाई हुई। इस दौरान विश्वविद्यालय और रामपुर विकास प्राधिकरण दोनों पक्षों के अधिकारी एवं अधिवक्ता मौजूद रहे।


विश्वविद्यालय ने क्या दी दलील? -

सुनवाई के दौरान विश्वविद्यालय की ओर से कहा गया कि जिस ग्राम सिंगनखेड़ा में विश्वविद्यालय स्थित है, वह 27 सितंबर 2024 से पहले रामपुर विकास प्राधिकरण के विकास क्षेत्र में शामिल नहीं था। इसलिए प्राधिकरण से नक्शा स्वीकृत कराने की आवश्यकता नहीं थी। यह भी दलील दी गई कि अधिकांश निर्माण काफी पहले किए गए थे, इसलिए उन्हें वर्तमान नियमों के आधार पर अवैध नहीं माना जा सकता।हालांकि, रामपुर विकास प्राधिकरण ने इन तर्कों को स्वीकार नहीं किया। आदेश में कहा गया कि निर्माण के समय संबंधित सक्षम प्राधिकारी से नक्शे की स्वीकृति लेना अनिवार्य था, चाहे क्षेत्र बाद में विकास प्राधिकरण की सीमा में शामिल हुआ हो।


केवल दो भवनों के नक्शे मिले स्वीकृत-

जांच के दौरान जिला पंचायत रामपुर से प्राप्त अभिलेखों में केवल मेडिकल कॉलेज भवन और अकादमिक ब्लॉक के नक्शे स्वीकृत पाए गए। शेष 38 भवनों के लिए किसी प्रकार की वैध स्वीकृति उपलब्ध नहीं मिली। प्राधिकरण ने इसे नियमों का स्पष्ट उल्लंघन माना। डीएम अजय कुमार द्विवेदी के अनुसार, विश्वविद्यालय प्रबंधन स्वयं इस तथ्य से अवगत था, क्योंकि उसने दो भवनों के लिए जिला पंचायत से अनुमति प्राप्त की थी। इसके बावजूद अन्य भवनों का निर्माण बिना अनुमोदन कराया गया।


प्राधिकरण ने कानूनी तर्क भी खारिज किए-

ध्वस्तीकरण आदेश में विश्वविद्यालय की ओर से मास्टर प्लान, जोनल प्लान और अधिनियम की विभिन्न धाराओं के आधार पर दिए गए कानूनी तर्कों का भी परीक्षण किया गया। रामपुर विकास प्राधिकरण ने कहा कि इन प्रावधानों की गलत व्याख्या की गई है और इनके आधार पर निर्माण को वैध नहीं माना जा सकता। आदेश में स्पष्ट किया गया कि किसी भी भवन की वैधता का आधार निर्माण के समय लागू कानून के अनुसार सक्षम प्राधिकारी से प्राप्त स्वीकृति होती है।

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