UP News: रातभर अफवाह, सुबह एक्शन… सहारनपुर में मस्जिद पर क्यों चला बुलडोजर? जानें समझिए पूरा विवाद

प्रशासन के अनुसार, सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने 16 जुलाई 2026 को विवादित जमीन को सरकारी भूमि मानते हुए मस्जिद के निर्माण को अवैध घोषित किया था। आदेश में परिसर खाली करने के निर्देश के साथ क्षतिपूर्ति की राशि भी निर्धारित की गई थी। मस्जिद कमेटी ने इस आदेश को जिला अदालत में चुनौती दी थी।;

Update: 2026-09-05 06:09 GMT

सहारनपुर: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद को लेकर चल रहा करीब डेढ़ साल पुराना विवाद शनिवार सुबह प्रशासन की कार्रवाई के बाद नए मोड़ पर पहुंच गया। प्रशासन ने तड़के करीब चार बजे मस्जिद को हटाने की कार्रवाई शुरू की। अधिकारियों के मुताबिक, विवादित निर्माण को सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण घोषित किए जाने के बाद यह कदम उठाया गया। कार्रवाई के दौरान कलेक्ट्रेट परिसर में भारी पुलिस बल तैनात रहा और मस्जिद के हिस्से को बुलडोजर से हटाया गया।

छह बुलडोजर से शुरू हुई कार्रवाई

शुक्रवार रात से ही मस्जिद को गिराए जाने की खबरें शहर में फैलने लगी थीं। इसके बाद कलेक्ट्रेट परिसर और आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गई। शनिवार तड़के प्रशासन ने कार्रवाई शुरू की और इमारत को हटाने के लिए छह बुलडोजर लगाए गए। कलेक्ट्रेट के पांचों गेट रात में ही बंद कर दिए गए थे। नेताओं और स्थानीय लोगों को परिसर में प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई। पुलिस और आरआरएफ के जवानों की तैनाती के बीच प्रशासन ने कार्रवाई पूरी की।

मस्जिद निर्माण को प्रशासन ने बताया अवैध

प्रशासन के अनुसार, सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने 16 जुलाई 2026 को विवादित जमीन को सरकारी भूमि मानते हुए मस्जिद के निर्माण को अवैध घोषित किया था। आदेश में परिसर खाली करने के निर्देश के साथ क्षतिपूर्ति की राशि भी निर्धारित की गई थी। मस्जिद कमेटी ने इस आदेश को जिला अदालत में चुनौती दी थी। 2 सितंबर को जिला जज की अदालत ने कमेटी की अपील खारिज करते हुए सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखा। इसके दो दिन बाद प्रशासन ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू कर दी।

मस्जिद पक्ष ने 150 साल पुरानी होने का दावा किया

मस्जिद कमेटी की ओर से अदालत में विवादित संपत्ति को वक्फ की जमीन बताया गया था। साथ ही मस्जिद के करीब 150 वर्ष पुरानी होने का दावा किया गया। हालांकि, अदालत में इस दावे के समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य नहीं दिए जाने की बात सामने आई। मामले की शुरुआत 24 मार्च 2025 को हुई थी, जब बजरंग दल के पूर्व प्रांत संयोजक विकास त्यागी की शिकायत के आधार पर सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत में कार्रवाई शुरू हुई थी।

इकरा हसन हाउस अरेस्ट

मस्जिद पर कार्रवाई की जानकारी मिलने के बाद कैराना से समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन सहारनपुर जाने की तैयारी में थीं। पुलिस ने उन्हें देर रात उनके आवास पर ही रोक दिया। उनके घर के बाहर भारी पुलिस बल तैनात किए जाने की जानकारी सामने आई है। इकरा हसन सहारनपुर में घटनास्थल का दौरा करने जा रही थीं। प्रशासन की ओर से जिले में राजनीतिक जमावड़े और संभावित तनाव को देखते हुए कई स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल लगाया गया है।

कई नेताओं को कलेक्ट्रेट के बाहर रोका

मस्जिद विवाद की जानकारी मिलने के बाद सपा विधायक आशु मलिक, सपा एमएलसी शाहनवाज खान और अन्य नेता कलेक्ट्रेट पहुंचे थे। हालांकि, उन्हें परिसर में प्रवेश नहीं दिया गया। देर रात कुछ नेताओं ने जिलाधिकारी अरविंद चौहान से मुलाकात कर कार्रवाई को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने भी देर रात सोशल मीडिया के माध्यम से मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी। नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद के भी सहारनपुर पहुंचने की बात सामने आई।

सहारनपुर में सुरक्षा बढ़ाई गई

मस्जिद पर कार्रवाई के बाद प्रशासन ने पूरे जिले में हाई अलर्ट जारी कर दिया है। संवेदनशील इलाकों में पीएसी और आरआरएफ की तैनाती की गई है। दमकल की गाड़ियों को भी अलग-अलग स्थानों पर लगाया गया है। प्रशासन का फोकस किसी भी तरह की भीड़ जुटने और कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने से रोकने पर है। कलेक्ट्रेट परिसर के आसपास भी सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई है।

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