राजनाथ सिंह बोले- बांग्लादेश की तर्ज पर सत्ता परिवर्तन करना चाहती है कांग्रेस

बीजेपी के प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में राजनाथ सिंह ने कहा कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दल युवाओं की ऊर्जा को राष्ट्र निर्माण में लगाने के बजाय राजनीतिक टकराव की ओर मोड़ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष की ओर से ‘रिजीम चेंज’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल गंभीर चिंता का विषय है।;

Update: 2026-10-16 05:29 GMT

लखनऊ: चुनाव आयोग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर जारी राजनीतिक टकराव के बीच भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने शुक्रवार को देशभर में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर विपक्ष पर हमला बोला। लखनऊ में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कांग्रेस और इंडिया ब्लॉक पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि विपक्ष चुनाव सुधार के नाम पर सरकार के खिलाफ माहौल बना रहा है। उन्होंने दावा किया कि बांग्लादेश की घटनाओं की तर्ज पर भारत में भी सत्ता परिवर्तन की बात की जा रही है। राजनाथ सिंह ने राहुल गांधी पर संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने और ‘वोट चोरी’ के आरोपों के जरिए राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश करने का आरोप लगाया।

‘युवाओं के भविष्य के बजाय सत्ता परिवर्तन की कोशिश’

बीजेपी के प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में राजनाथ सिंह ने कहा कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दल युवाओं की ऊर्जा को राष्ट्र निर्माण में लगाने के बजाय राजनीतिक टकराव की ओर मोड़ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष की ओर से ‘रिजीम चेंज’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल गंभीर चिंता का विषय है। रक्षा मंत्री के मुताबिक, विपक्ष का उद्देश्य केवल चुनाव सुधार या मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े मुद्दे उठाना नहीं है, बल्कि देश में अस्थिरता पैदा करके सत्ता हासिल करना है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकार की आलोचना और विरोध का अधिकार है, लेकिन इस अधिकार का इस्तेमाल अराजकता फैलाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक भी मौजूद रहे।

राहुल गांधी के ‘वोट चोरी’ आरोप पर पलटवार

राजनाथ सिंह ने राहुल गांधी के ‘वोट चोरी’ संबंधी आरोपों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कांग्रेस के चुनावी प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए कहा कि पार्टी लंबे समय से लोकसभा में अपने दम पर सरकार नहीं बना पाई है। उन्होंने राहुल गांधी से सवाल किया कि कांग्रेस को मिले चुनावी नतीजों के लिए वह किसे जिम्मेदार मानते हैं। रक्षा मंत्री ने राहुल गांधी के ‘हाइड्रोजन बम’ वाले बयान पर तंज कसते हुए कहा कि जिस खुलासे को बड़े दावे के साथ पेश किया गया था, वह उनके मुताबिक दिवाली के पटाखे के बराबर भी साबित नहीं हुआ। उन्होंने विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक बयानबाजी बताते हुए कहा कि ऐसे दावों से संवैधानिक संस्थाओं पर जनता का भरोसा कमजोर करने की कोशिश की जा रही है।

‘लोकतंत्र विरोध का अधिकार देता है, अराजकता का नहीं’

राहुल गांधी की राजनीति पर टिप्पणी करते हुए राजनाथ सिंह ने उन्हें ‘पॉलिटिक्स ऑफ डिसरप्शन’ से बचने और अपनी राजनीतिक भूमिका पर आत्ममंथन करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में असहमति और विरोध के लिए पर्याप्त जगह है, लेकिन किसी को भी इसके नाम पर अराजकता फैलाने या संवैधानिक संस्थाओं को नुकसान पहुंचाने का अधिकार नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दल झूठे आक्रोश के जरिए जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, ये आरोप बीजेपी की ओर से लगाए गए हैं और विपक्ष की प्रतिक्रिया इस राजनीतिक विवाद का अहम पक्ष होगी।

कांग्रेस के इतिहास के तीन मामलों का किया जिक्र

राजनाथ सिंह ने कांग्रेस के इतिहास का उल्लेख करते हुए पार्टी पर तीन गंभीर गलतियां करने का आरोप लगाया। उन्होंने पहला मामला 1975 में लगाए गए आपातकाल का बताया और कहा कि उस दौरान लोकतांत्रिक अधिकारों पर रोक लगाई गई थी। दूसरे मामले में उन्होंने 1984 में सिख समुदाय के खिलाफ हुई हिंसा का जिक्र किया और कांग्रेस पर जिम्मेदारी से बचने का आरोप लगाया। तीसरे मामले में उन्होंने 1990 में अयोध्या में कारसेवकों पर गोली चलाए जाने की घटना का उल्लेख किया। राजनाथ सिंह ने आरोप लगाया कि इन घटनाओं के बाद अब कांग्रेस संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाकर एक और गंभीर गलती कर रही है।

राजीव गांधी की हत्या के बाद चुनाव स्थगित करने पर सवाल

रक्षा मंत्री ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के बाद चुनावी प्रक्रिया से जुड़े फैसलों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि किसी उम्मीदवार की मृत्यु होने पर किसी एक सीट का चुनाव स्थगित करने और पूरे देश में चुनाव रोकने के बीच अंतर है। राजनाथ सिंह ने सवाल उठाया कि राजीव गांधी की हत्या के बाद देशभर में चुनाव स्थगित करने का फैसला क्यों लिया गया, जबकि अमेठी में मतदान हो चुका था। उन्होंने इस उदाहरण के जरिए कांग्रेस की ओर से चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर उठाए जा रहे सवालों को चुनौती दी। 

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