लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले एक नया नाम सामने आया है। पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल (Divya Mittal) ने ‘जननीति भारत’ नाम से नई राजनीतिक पार्टी बनाने की घोषणा की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव में उतरेगी। प्रशासनिक सेवा छोड़कर राजनीति में कदम रखने वाली दिव्या मित्तल ने जनता की भागीदारी, जरूरत के आधार पर सरकारी फैसले और जवाबदेही को अपनी राजनीतिक सोच का आधार बताया है। उनका कहना है कि देश में समस्या राजनीति की कमी नहीं, बल्कि आम लोगों की समस्याओं को उचित तरीके से नहीं सुने जाने की है।
जनता से मिले समर्थन के बाद लिया फैसला
दिव्या मित्तल ने एक वीडियो संदेश के जरिए अपनी नई राजनीतिक पार्टी की घोषणा की। उन्होंने बताया कि इससे पहले जब उन्होंने राजनीति में आने की संभावना जताई थी, तब लोगों से संपर्क करने के लिए एक मोबाइल नंबर साझा किया था। इस नंबर पर बड़ी संख्या में संदेश आने लगे, जिसके कारण व्हाट्सएप ने उसे रोक दिया। उन्होंने कहा कि उन्हें लोगों की ओर से इतनी बड़ी प्रतिक्रिया मिलने की उम्मीद नहीं थी। संपर्क व्यवस्था पर्याप्त नहीं होने के कारण लोगों को हुई परेशानी के लिए उन्होंने माफी भी मांगी। जनता की प्रतिक्रिया का जिक्र करते हुए दिव्या मित्तल ने कहा कि उन्हें ऐसा लगा, जैसे वह सूरज के सामने दिया लेकर खड़ी हों, जबकि उन्हें केवल खिड़की खोलने की जरूरत थी। उनके इस बयान को जनता की भागीदारी और लोगों की आवाज को राजनीतिक प्रक्रिया से जोड़ने के उनके विचार के रूप में देखा जा रहा है।
जननीति भारत की तीन प्रमुख प्राथमिकताएं
दिव्या मित्तल ने नई पार्टी की कार्यप्रणाली के लिए तीन प्रमुख प्राथमिकताओं का उल्लेख किया है। इनमें आम जनता को नीतियों के केंद्र में रखना, जरूरत के आधार पर फैसले लेना और सरकारी योजनाओं की निगरानी को पारदर्शी बनाना शामिल है।
1. जनता की समस्याओं के आधार पर बनें नीतियां
दिव्या मित्तल के मुताबिक, किसी भी क्षेत्र की समस्याओं और जरूरतों को वहां रहने वाले लोग सबसे बेहतर तरीके से समझते हैं। इसलिए सरकारी नीतियां तैयार करने से पहले जनता की बात सुनी जानी चाहिए। उनका विचार है कि लोग अपनी जरूरतें और समस्याएं सामने रखें, जबकि विशेषज्ञ उनके समाधान के लिए प्रभावी योजनाएं तैयार करें। उनकी इस प्राथमिकता का उद्देश्य नीति निर्माण की प्रक्रिया में आम लोगों की भागीदारी बढ़ाना है, ताकि सरकारी योजनाएं वास्तविक जरूरतों के अनुरूप बनाई जा सकें।
2. जरूरत के आधार पर लिए जाएं सरकारी फैसले
दूसरी प्राथमिकता सरकारी निर्णयों में समानता और जरूरत को महत्व देना है। दिव्या मित्तल का कहना है कि किसी व्यक्ति की पहचान के बजाय उसकी वास्तविक परिस्थितियों और आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर फैसले किए जाने चाहिए। उनके अनुसार, ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए जिसमें नागरिकों की समस्याओं को सुना जाए और सरकारी योजनाओं का लाभ जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाने पर ध्यान दिया जाए। उनका जोर निर्णय प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और जनहित केंद्रित बनाने पर है।
3. सरकारी कामकाज की निगरानी हो डिजिटल
दिव्या मित्तल ने सरकारी योजनाओं और सार्वजनिक निर्माण कार्यों की निगरानी को पारदर्शी बनाने पर भी जोर दिया। उनका कहना है कि कई बार लोगों को यह पता नहीं चल पाता कि उनकी अर्जी किस स्तर पर लंबित है या उनके क्षेत्र में स्वीकृत विकास कार्य कितना आगे बढ़ा है। इससे बिचौलियों के जरिए पैसे मांगने जैसी समस्याओं की गुंजाइश बन सकती है। उन्होंने प्रस्ताव दिया कि आवेदन की स्थिति सीधे लोगों के मोबाइल फोन पर उपलब्ध कराई जाए। गांवों में सड़क, नाली, हैंडपंप और अन्य विकास कार्यों की जानकारी डिजिटल नक्शे पर दिखाई जा सकती है। इसमें काम की प्रगति, पूरा होने की संभावित समयसीमा और जिम्मेदार अधिकारियों का विवरण भी शामिल होना चाहिए।
2013 बैच की आईएएस अधिकारी रही हैं दिव्या मित्तल
दिव्या मित्तल 2013 बैच की आईएएस अधिकारी रही हैं। उन्होंने उत्तर प्रदेश में मेरठ, गोंडा, संत कबीर नगर, मिर्जापुर और देवरिया समेत विभिन्न जिलों में प्रशासनिक जिम्मेदारियां निभाईं। सितंबर 2026 में उनके इस्तीफे को स्वीकार किए जाने के बाद उनके राजनीतिक सफर का रास्ता साफ हुआ। मिर्जापुर की जिलाधिकारी रहते हुए वह दूरदराज के गांव लहुरिया दह तक पाइप के जरिए पानी पहुंचाने की पहल को लेकर भी चर्चा में रही थीं।
2027 के चुनाव में नई राजनीतिक चुनौती
‘जननीति भारत’ की घोषणा के साथ दिव्या मित्तल ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई भूमिका की शुरुआत की है। हालांकि, पार्टी का संगठनात्मक ढांचा, उम्मीदवारों के चयन और चुनावी रणनीति से जुड़ी विस्तृत जानकारी सामने आना अभी बाकी है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जनता की भागीदारी, पारदर्शिता और जवाबदेही पर आधारित उनका राजनीतिक मॉडल आगामी विधानसभा चुनाव में कितना समर्थन हासिल कर पाता है।