Padma Awards 2026 : यूपी को एक पद्म विभूषण और 10 पद्मश्री सम्मान, जानें उनका योगदान

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) से लंबे समय तक जुड़ी रहीं सुप्रसिद्ध वायलिन वादक सुश्री एन. राजम को पद्म विभूषण से सम्मानित किए जाने की घोषणा हुई है, जबकि प्रदेश की 10 अन्य विभूतियों को पद्मश्री प्रदान करने का ऐलान किया गया है।

Update: 2026-01-26 06:24 GMT
लखनऊ। Padma Awards 2026: गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर घोषित पद्म पुरस्कारों की सूची ने उत्तर प्रदेश को विशेष गौरव का अवसर दिया है। कला, खेल, चिकित्सा, विज्ञान, साहित्य, कृषि और पुरातत्व जैसे विविध क्षेत्रों में असाधारण योगदान देने वाली प्रदेश की हस्तियों को इस वर्ष देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में शामिल किया गया है। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) से लंबे समय तक जुड़ी रहीं सुप्रसिद्ध वायलिन वादक सुश्री एन. राजम को पद्म विभूषण से सम्मानित किए जाने की घोषणा हुई है, जबकि प्रदेश की 10 अन्य विभूतियों को पद्मश्री प्रदान करने का ऐलान किया गया है।

इन सम्मानों की घोषणा के साथ ही वाराणसी, लखनऊ, नोएडा, मुरादाबाद, गाजीपुर, बस्ती और बागपत सहित पूरे प्रदेश में खुशी और गर्व का माहौल है। शैक्षणिक संस्थानों, सांस्कृतिक संगठनों और सामाजिक हलकों में इन विभूतियों के योगदान को याद करते हुए उन्हें बधाइयां दी जा रही हैं।

पद्म विभूषण : एन. राजम (कला – वायलिन), वाराणसी

हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की विश्वविख्यात वायलिन वादक सुश्री एन. राजम को पद्म विभूषण से अलंकृत करने की घोषणा ने संगीत जगत को विशेष रूप से गौरवान्वित किया है। 8 अप्रैल 1938 को चेन्नई में जन्मीं एन. राजम का जीवन और कर्मक्षेत्र दशकों से वाराणसी से गहराई से जुड़ा रहा है। वे बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के संगीत संकाय में प्रोफेसर रहीं और यहीं से उन्होंने वायलिन वादन की एक नई परंपरा को स्थापित किया।

एन. राजम ने वायलिन को ‘गायकी अंग’ में बजाने की विशिष्ट शैली विकसित की, जिसमें वाद्य के माध्यम से मानवीय स्वर की कोमलता और भावनाओं को अभिव्यक्त किया जाता है। बीते 50 वर्षों से अधिक समय से वे एकल वादन कर रही हैं और भारत ही नहीं, बल्कि विश्व के प्रमुख मंचों पर उन्होंने अपनी कला का प्रदर्शन किया है। इससे पहले उन्हें पद्म श्री (1984) और पद्म भूषण (2004) से सम्मानित किया जा चुका है। 87 वर्ष की आयु में भी एन. राजम सक्रिय हैं। संगीत कार्यक्रमों में भाग ले रही हैं और युवा संगीतकारों को प्रशिक्षित कर रही हैं। हाल ही में दिल्ली और अन्य शहरों में उनके कंसर्ट हुए, जहां श्रोताओं ने खड़े होकर उनका अभिनंदन किया। वे आज भी जीवंत शास्त्रीय संगीत परंपरा की प्रतीक मानी जाती हैं।

पद्मश्री से सम्मानित विभूतियां


प्रवीण कुमार (खेल – पैरा हाई जंप), नोएडा

पैरा एथलेटिक्स में भारत का नाम रोशन करने वाले प्रवीण कुमार को पद्मश्री से सम्मानित किया गया है। 15 मई 2003 को जन्मे प्रवीण वर्तमान में नोएडा में रहते हैं। उन्होंने 2024 के पेरिस पैरालंपिक में हाई जंप में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा, जबकि 2020 टोक्यो पैरालंपिक में रजत पदक हासिल किया था। अर्जुन पुरस्कार और खेल रत्न से पहले ही सम्मानित हो चुके प्रवीण कुमार आज अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में सक्रिय हैं। साथ ही वे युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनकर प्रशिक्षण और मार्गदर्शन भी दे रहे हैं।

मंगला कपूर (साहित्य एवं शिक्षा – संगीत), वाराणसी

वाराणसी की सुश्री मंगला कपूर को साहित्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में पद्मश्री प्रदान किया गया है। वे बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में एसोसिएट प्रोफेसर हैं और पिछले 30 वर्षों से हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत का अध्यापन कर रही हैं।

उनकी विशेषता संगीत की आध्यात्मिक गहराई और उसकी दार्शनिक व्याख्या है। वर्तमान में वे एमएमवी संगीत विभाग में कार्यरत हैं और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। उनके शिष्य देश-विदेश में संगीत जगत में सक्रिय हैं।

श्याम सुंदर (चिकित्सा – संक्रामक रोग), वाराणसी

संक्रामक रोगों के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रोफेसर श्याम सुंदर को पद्मश्री से सम्मानित किया गया है। वे बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से जुड़े हैं और लीशमैनियासिस तथा एचआईवी जैसे रोगों पर दशकों से अनुसंधान कर रहे हैं। उनके नाम 777 से अधिक शोध प्रकाशन हैं और वे विश्व के शीर्ष दो प्रतिशत वैज्ञानिकों में शामिल हैं। वर्तमान में वे उष्णकटिबंधीय चिकित्सा पर अनुसंधान करते हुए रोग नियंत्रण और जनस्वास्थ्य सुधार में योगदान दे रहे हैं।

राजेंद्र प्रसाद (चिकित्सा – फेफड़े रोग), बस्ती/लखनऊ

फेफड़ों के रोगों के विशेषज्ञ डॉ. राजेंद्र प्रसाद को चिकित्सा क्षेत्र में पद्मश्री से नवाजा गया है। 17 फरवरी 1950 को बस्ती जिले के मुंडेरवा में जन्मे डॉ. प्रसाद ने किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी से शिक्षा प्राप्त की। चार दशकों से अधिक अनुभव के साथ उन्होंने टीबी और श्वसन रोगों के उपचार और अनुसंधान में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। वर्तमान में वे इरा लखनऊ मेडिकल कॉलेज में निदेशक चिकित्सा शिक्षा और प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हैं।

डॉ. केवल कृष्ण ठकराल (आयुर्वेद), लखनऊ

उत्तर प्रदेश सरकार के आयुर्वेद विभाग के सेवानिवृत्त निदेशक डॉ. केवल कृष्ण ठकराल को आयुर्वेद के क्षेत्र में पद्मश्री प्रदान किया गया है। उन्होंने सुश्रुत संहिता के अनुवाद और व्याख्या में उल्लेखनीय योगदान दिया। लखनऊ में रहते हुए उन्होंने पारंपरिक आयुर्वेदिक चिकित्सा को आधुनिक स्वास्थ्य प्रणालियों से जोड़ने पर काम किया। सेवानिवृत्ति के बाद भी वे आयुर्वेदिक ग्रंथों पर लेखन और शोध में सक्रिय हैं।

चिरंजी लाल यादव (कला – ढोकरा शिल्प), मुरादाबाद 

मुरादाबाद के बेल मेटल ढोकरा शिल्पकार चिरंजी लाल यादव को पद्मश्री से सम्मानित किया गया है। उन्होंने पारंपरिक धातु कला को राष्ट्रीय पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई है। 2008 में राष्ट्रीय मेरिट प्रमाणपत्र प्राप्त कर चुके चिरंजी लाल यादव जीआई टैग से जुड़ी पहलों में भी सक्रिय रहे हैं। वे पारंपरिक और आधुनिक डिजाइनों का समन्वय करते हुए मुरादाबाद की धातु विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं।

अशोक कुमार सिंह (विज्ञान एवं इंजीनियरिंग – कृषि), गाजीपुर

पादप आनुवंशिकी विशेषज्ञ अशोक कुमार सिंह को विज्ञान एवं इंजीनियरिंग के क्षेत्र में पद्मश्री से सम्मानित किया गया है। 1 जुलाई 1962 को गाजीपुर में जन्मे सिंह भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के पूर्व निदेशक रह चुके हैं। बासमती धान की उन्नत किस्मों के विकास में उनके योगदान से कृषि उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। वे राष्ट्रीय कृषि विज्ञान अकादमी के सदस्य हैं और सतत कृषि विकास के लिए कार्यरत हैं।

बुद्ध रश्मि मणि (पुरातत्व), बागपत

पुरातत्वविद बुद्ध रश्मि मणि को पद्मश्री से अलंकृत किया गया है। 17 अप्रैल 1955 को मसूरी में जन्मे मणि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के पूर्व अतिरिक्त महानिदेशक रह चुके हैं। उन्होंने 2003 में अयोध्या खुदाई का नेतृत्व किया और वर्तमान में भारतीय विरासत संस्थान में प्रोफेसर हैं। बागपत में प्रोटो-ऐतिहासिक स्थल की खुदाई के माध्यम से उन्होंने भारतीय इतिहास को नई दृष्टि दी है।

रघुपत सिंह (कृषि – मरणोपरांत), मुरादाबाद

मुरादाबाद के किसान रघुपत सिंह को मरणोपरांत पद्मश्री से सम्मानित किया गया है। उन्होंने विलुप्त हो रही पारंपरिक सब्जियों और दुर्लभ बीजों के संरक्षण में असाधारण योगदान दिया। उनके प्रयासों से कृषि जैवविविधता को नई दिशा मिली और कई किसानों को नई फसलों के लिए प्रेरणा मिली।

अनिल कुमार रस्तोगी (कला – रंगमंच/फिल्म), लखनऊ

लखनऊ के वरिष्ठ रंगकर्मी और अभिनेता अनिल कुमार रस्तोगी को पद्मश्री प्रदान किया गया है। 4 अप्रैल 1943 को जन्मे रस्तोगी 1962 से रंगमंच से जुड़े हैं। उन्होंने रंगमंच के साथ-साथ फिल्मों (थप्पड़, मुल्क) और टीवी में भी सशक्त भूमिकाएं निभाईं। उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार और यश भारती से सम्मानित रस्तोगी 81 वर्ष की आयु में भी सक्रिय हैं।

प्रदेश के लिए गौरव का क्षण

इन पद्म सम्मानों ने एक बार फिर साबित किया है कि उत्तर प्रदेश न केवल राजनीतिक और सांस्कृतिक रूप से, बल्कि कला, विज्ञान, खेल और चिकित्सा जैसे क्षेत्रों में भी देश को दिशा देने वाली प्रतिभाओं की धरती है। गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर घोषित यह सम्मान प्रदेश के लिए गर्व और प्रेरणा का प्रतीक बन गया है।

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