ग्रेटर नोएडा में बीटेक छात्र को हॉस्टल संचालक व वार्डन ने पीटा, आहत होकर छात्र ने दी जान

उदित सोनी बीटेक का छात्र था और ईजेड हॉस्टल के कमरा नंबर 404 में रहता था। उसके पिता विजय सोनी मूल रूप से टोड़ी फतेहपुर के निवासी हैं और वर्तमान में झांसी के मऊरानीपुर में व्यवसाय करते हैं। परिवार के मुताबिक उदित पढ़ाई में गंभीर था और भविष्य को लेकर योजनाएं बना रहा था।

Update: 2026-01-24 23:00 GMT

ग्रेटर नोएडा। नॉलेज पार्क क्षेत्र के ईजेड हॉस्टल में शुक्रवार रात एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई, जब झांसी के मऊरानीपुर निवासी बीटेक छात्र उदित सोनी (22) ने कथित उत्पीड़न से आहत होकर चौथी मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर ली। आरोप है कि हॉस्टल संचालक और वार्डन ने शराब पीने के आरोप में छात्र के साथ मारपीट की, उससे 10 हजार रुपये जुर्माना वसूला और घटना का वीडियो उसके पिता को भेज दिया। पुलिस ने मामले में हॉस्टल संचालक शिखर और वार्डन को गिरफ्तार कर लिया है।

कौन थे उदित सोनी

उदित सोनी बीटेक का छात्र था और ईजेड हॉस्टल के कमरा नंबर 404 में रहता था। उसके पिता विजय सोनी मूल रूप से टोड़ी फतेहपुर के निवासी हैं और वर्तमान में झांसी के मऊरानीपुर में व्यवसाय करते हैं। परिवार के मुताबिक उदित पढ़ाई में गंभीर था और भविष्य को लेकर योजनाएं बना रहा था।

क्या हुआ उस रात

प्रत्यक्षदर्शी छात्रों के अनुसार, शुक्रवार रात करीब नौ बजे उदित अपने दोस्तों चेतन और कुलदीप के साथ हॉस्टल लौटा। हॉस्टल की आंतरिक समय-सारिणी के अनुसार, बाहर से लौटने की अनुमति रात 10 बजे तक थी। छात्रों का कहना है कि वे खाना खाने जा रहे थे, तभी हॉस्टल कर्मचारियों ने उन पर शराब पीने का आरोप लगाया। आरोप है कि अनुशासनहीनता का हवाला देते हुए उदित से 10 हजार रुपये का जुर्माना वसूला गया। इसके बाद भी मामला शांत नहीं हुआ। छात्रों का दावा है कि वार्डन और संचालक ने उदित को पीटा और इस पूरी घटना का वीडियो बनाकर उसके पिता को भेज दिया।

पिता को वीडियो, बेटे पर बढ़ा दबाव


बताया जा रहा है कि वीडियो मिलने के बाद उदित के पिता ने फोन पर उससे बातचीत की। पहले उन्होंने डांटा, फिर नाम कटवाकर घर बुलाने की बात कही और समझाया भी। साथियों के अनुसार, पिता की नाराजगी और घर बुलाने की चेतावनी ने उदित को मानसिक रूप से तोड़ दिया। इसी तनाव में वह रात करीब 10 बजे हॉस्टल की चौथी मंजिल से कूद गया। गिरने की तेज आवाज सुनकर छात्र मौके पर पहुंचे और पुलिस को सूचना दी। गंभीर रूप से घायल उदित को तत्काल ऑटो से शारदा अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

“आज तक पिता ने हाथ नहीं उठाया”

उदित के एक करीबी दोस्त ने बताया कि घटनाक्रम के दौरान जब वार्डन और कर्मचारी उस पर दबाव बना रहे थे, तब उदित चिल्लाते हुए कह रहा था“आज तक पिता ने हाथ नहीं उठाया।” दोस्तों का आरोप है कि विरोध करने पर उसके साथ मारपीट की गई और पिता को फोन कर स्थिति को और भड़काया गया।

गुस्साए छात्रों का हंगामा


उदित की मौत की खबर फैलते ही हॉस्टल में रहने वाले छात्र भड़क उठे। देर रात करीब 11:30 बजे तक डेढ़ घंटे तक छात्रों ने परिसर में हंगामा किया। आरोप है कि गुस्साए छात्रों ने हॉस्टल के बाहर खड़ी बसों के शीशे तोड़ दिए और इमारत में लगे कांच पर पथराव किया। छात्रों का कहना था कि संचालक और वार्डन के गलत व्यवहार व कथित प्रताड़ना ने उदित को यह कदम उठाने पर मजबूर किया।

पुलिस कार्रवाई और जांच


पुलिस ने घटना के बाद तुरंत कार्रवाई करते हुए मामला दर्ज किया और हॉस्टल संचालक शिखर तथा वार्डन को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस का कहना है कि प्रारंभिक जांच में मामला आत्महत्या का प्रतीत होता है, लेकिन सभी पहलुओं की गहन जांच की जा रही है। एडीसीपी (ग्रेटर नोएडा) सुधीर कुमार ने बताया, “प्रकरण में कुछ छात्रों और हॉस्टल स्टाफ से पूछताछ की जा रही है। घटनाक्रम की सटीक जानकारी जुटाने के लिए हॉस्टल में लगे सीसीटीवी फुटेज भी खंगाले जा रहे हैं। मामले में दर्ज एफआईआर के आधार पर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।”

सवालों के घेरे में हॉस्टल प्रबंधन


यह घटना निजी हॉस्टलों में अनुशासन के नाम पर कथित उत्पीड़न, मनमानी वसूली और छात्रों पर मानसिक दबाव के मुद्दे को फिर सामने ले आई है। छात्र संगठनों ने मांग की है कि निजी हॉस्टलों की नियमित निगरानी, स्पष्ट आचार संहिता और शिकायत निवारण तंत्र लागू किया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।

दोषियों को कड़ी सजा मिले


पुलिस जांच के नतीजों पर अब सभी की नजरें टिकी हैं। परिजनों और छात्रों की मांग है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषियों को कड़ी सजा मिले। साथ ही, शैक्षणिक संस्थानों और हॉस्टलों में छात्रों की मानसिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। यदि आप या आपके आसपास कोई व्यक्ति मानसिक दबाव में है, तो समय पर मदद लेना जरूरी है। भरोसेमंद लोगों से बात करें और स्थानीय हेल्पलाइन या काउंसलिंग सेवाओं से संपर्क करें।

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