राहुल गांधी की मुश्‍किलें बढ़ीं, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने CBI-ED को दिया आय से अधिक संपत्ति की जांच के आदेश

न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान और न्यायमूर्ति जफर अहमद की पीठ ने कर्नाटक के भाजपा कार्यकर्ता एस. विग्नेश शिशिर द्वारा दायर एक आपराधिक रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया।;

Update: 2026-05-15 02:46 GMT

लखनऊ : इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ ने कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ कथित रूप से 'आय से अधिक संपत्ति' अर्जित करने के मामले में एक बड़ा निर्देश दिया है। कोर्ट ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) को इस शिकायत की जांच करने और अपनी प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है।

कोर्ट का आदेश और जांच की प्रक्रिया

न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान और न्यायमूर्ति जफर अहमद की पीठ ने कर्नाटक के भाजपा कार्यकर्ता एस. विग्नेश शिशिर द्वारा दायर एक आपराधिक रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि संबंधित एजेंसियों को शिकायत प्राप्त हुई है, तो वे कानून के अनुसार आरोपों का सत्यापन करें। कोर्ट ने न केवल CBI और ED को निर्देश दिए हैं, बल्कि केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT), वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग, कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय और गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (SFIO) को भी आठ सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई 20 जुलाई को निर्धारित की गई है।

एजेंसियों का रुख

सुनवाई के दौरान CBI ने अदालत को सूचित किया कि उन्हें याचिकाकर्ता की शिकायत मिल गई है और वे आगामी आठ सप्ताह के भीतर अपना जवाब कोर्ट में पेश करेंगे। वहीं, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी शिकायत प्राप्त होने की पुष्टि की और कहा कि वे आरोपों का परीक्षण कर रहे हैं और जल्द ही प्रगति रिपोर्ट से अदालत को अवगत कराएंगे। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए कोर्ट ने वरिष्ठ रजिस्ट्रार को निर्देश दिया है कि याचिकाकर्ता द्वारा प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों और पेपर-बुक को सीलबंद लिफाफे में सुरक्षित रखा जाए।

याचिकाकर्ता एस. विग्नेश शिशिर की पृष्ठभूमि

यह याचिका बेंगलुरु के व्यवसायी और भाजपा कार्यकर्ता एस. विग्नेश शिशिर द्वारा दायर की गई है। शिशिर लंबे समय से राहुल गांधी के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। याचिका में दावा किया गया है कि राहुल गांधी ने आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति अर्जित की है, जिसकी जांच उच्चस्तरीय एजेंसियों द्वारा किया जाना अनिवार्य है।

शिशिर की पृष्ठभूमि और उनके पिछले प्रयासों के कारण यह मामला चर्चा में है। वे इससे पहले भी राहुल गांधी पर कथित दोहरी नागरिकता (ब्रिटिश और भारतीय) का आरोप लगाते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा चुके हैं। नागरिकता से जुड़ा मामला फिलहाल मुख्य न्यायाधीश के पास लंबित है, ताकि उस पर सुनवाई के लिए एक नई बेंच का गठन किया जा सके।

कानूनी और राजनीतिक महत्व

हालांकि राहुल गांधी के खिलाफ देशभर में कई मामले दर्ज हैं, लेकिन 'आय से अधिक संपत्ति' का यह पहला मामला है जो सीधे अदालत और केंद्रीय जांच एजेंसियों के स्तर तक पहुंचा है। याचिका की योग्यता (maintainability) के प्रश्न पर कोर्ट ने कहा है कि इस पर निर्णय सभी पक्षों के जवाब और हलफनामे आने के बाद ही लिया जाएगा।

रायबरेली के सांसद होने के नाते राहुल गांधी का यह मामला लखनऊ हाईकोर्ट के क्षेत्राधिकार में आता है। याचिकाकर्ता का लगातार लखनऊ में सक्रिय रहना और एक के बाद एक कानूनी चुनौतियां पेश करना, इस मामले को राजनीतिक और कानूनी दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण बना देता है। अब सबकी निगाहें 20 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई और एजेंसियों द्वारा सौंपी जाने वाली रिपोर्ट पर टिकी हैं।

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