छात्रों पर पैलेट गन के इस्तेमाल को यूपी मंत्री ने बताया जायज, बोले- हिंसा के खिलाफ कार्रवाई जरूरी

योगेंद्र उपाध्याय ने कहा कि जंतर-मंतर पर पैलेट गन का इस्तेमाल परिस्थितियों के हिसाब से उचित था। उन्होंने दावा किया कि प्रदर्शन में कुछ ऐसे लोग भी शामिल थे, जिन्होंने देश की भावनाओं और महापुरुषों के बारे में अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया।;

Update: 2026-08-14 07:32 GMT

झांसी: उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पैलेट गन के इस्तेमाल को उचित ठहराया है। मंत्री ने कहा कि अगर किसी प्रदर्शन में हिंसा होती है या देश और संवैधानिक संस्थाओं के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया जाता है, तो कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई जरूरी है। उन्होंने यह टिप्पणी बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के दीक्षा समारोह में शामिल होने के दौरान पत्रकारों से बातचीत में की। मंत्री का बयान ऐसे समय आया है जब छात्रों के प्रदर्शनों और पुलिस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक बहस तेज है। उन्होंने प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर हुई हिंसा और आपत्तिजनक नारों का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसे मामलों में प्रशासन को कानून के तहत कदम उठाने का अधिकार है।

'पैलेट गन का इस्तेमाल जायज था'

योगेंद्र उपाध्याय ने कहा कि जंतर-मंतर पर पैलेट गन का इस्तेमाल परिस्थितियों के हिसाब से उचित था। उन्होंने दावा किया कि प्रदर्शन में कुछ ऐसे लोग भी शामिल थे, जिन्होंने देश की भावनाओं और महापुरुषों के बारे में अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया। मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित तौर पर अमर्यादित भाषा के इस्तेमाल का भी जिक्र किया। उनका कहना था कि जब प्रदर्शन हिंसा का रूप ले ले तो प्रशासन को स्थिति नियंत्रित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने पड़ते हैं। उन्होंने कहा कि हिंसा को रोकने के लिए उठाए गए हर वैधानिक कदम को वह उचित मानते हैं। हालांकि, पैलेट गन जैसे बल प्रयोग को लेकर मानवाधिकार और सुरक्षा से जुड़े सवाल लंबे समय से सार्वजनिक बहस का हिस्सा रहे हैं।

छात्र आंदोलन पर भी बोले मंत्री

प्रदर्शन कर रहे छात्रों की मांगों और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर भी मंत्री ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि परीक्षाओं में पेपर लीक नहीं होना चाहिए और इस तरह की घटनाओं से छात्रों का भविष्य प्रभावित होता है। योगेंद्र उपाध्याय ने उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए दावा किया कि सत्ता परिवर्तन के बाद राज्य में पेपर लीक की घटनाएं काफी कम हुई हैं। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों के समय पेपर लीक से जुड़ी घटनाओं की एक पूरी श्रृंखला देखने को मिलती थी।

नए कानून को बताया सख्त

मंत्री ने उत्तर प्रदेश में पेपर लीक और परीक्षा में अनियमितताओं पर रोक लगाने के लिए बनाए गए नए कानूनी प्रावधानों की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि नया कानून कड़ा है और परीक्षा में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का प्रावधान करता है। उनके मुताबिक कानून के प्रभावी क्रियान्वयन से पेपर लीक और परीक्षा संबंधी धोखाधड़ी में शामिल लोगों पर लगाम लगाई जा सकेगी। उन्होंने कहा कि छात्रों को निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था मिलना जरूरी है और सरकार इसके लिए लगातार कदम उठा रही है।

प्रदर्शन और कानून-व्यवस्था पर जोर

मंत्री ने छात्रों की समस्याओं और प्रदर्शन के अधिकार को लेकर सीधे तौर पर विस्तृत टिप्पणी नहीं की, लेकिन उन्होंने कानून-व्यवस्था को प्राथमिकता देने की बात कही। उनका कहना था कि किसी भी आंदोलन में हिंसा या सार्वजनिक व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने की स्थिति पैदा नहीं होनी चाहिए। उन्होंने परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता को भी जरूरी बताया। मंत्री के अनुसार प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने वाले लाखों छात्रों की मेहनत दांव पर होती है, इसलिए पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकना सरकार की जिम्मेदारी है।

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